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हल्दौर में खाकी और प्रशासन बेबस? 73 साल के अंधे बुजुर्ग को पीट-पीटकर आशियाना छीना, पिलर खड़े कर रचा षड्यंत्र!

बिजनौर में हैवानियत की हद: 73 साल के अंधे बुजुर्ग की दुकान-मकान तोड़कर कब्जा, भू-माफिया ने खड़ा  किया साम्राज्य

विशेष ग्राउंड रिपोर्ट: अवनीश त्यागी     TargetTvLive 
 बिजनौर (उत्तर प्रदेश)। योगी सरकार के भू-माफिया विरोधी अभियानों के दावों के बीच बिजनौर जिले के हल्दौर में एक ऐसी खौफनाक वारदात सामने आई है, जिसने पूरे जिले की प्रशासनिक व्यवस्था को कटघरे में खड़ा कर दिया है। 73 वर्ष का एक बूढ़ा इंसान… जो आँखों से पूरी तरह से अंधा है, अविवाहित है, गंभीर बीमारियों से घिरा है और चलने-फिरने तक से लाचार है—आज उसकी पूरी जिंदगी की कमाई और आशियाने पर इलाके के बेखौफ दबंगों ने डाका डाल दिया है।

पीड़ित बुजुर्ग की लाचारी का फायदा उठाकर न केवल उनकी करोड़ों की पुश्तैनी संपत्ति का फर्जी बैनामा (कूटरचित दस्तावेज) करा लिया गया, बल्कि करीब 63 लाख रुपये का सीधा वित्तीय नुकसान पहुंचाते हुए संपत्ति पर बुलडोजर जैसी तोड़-फोड़ मचाई जा रही है

न्याय की उम्मीद में गिड़गिड़ाते हुए 73 वर्षीय दृष्टिहीन बुजुर्ग जब परगनाधिकारी (SDM) बिजनौर की चौखट पर पहुंचे, तो पूरे तहसील परिसर में सन्नाटा पसर गया।

 मुख्य बिंदु: मामले की 5 बड़ी बातें

  • पीड़ित का नाम व स्थिति: पदम कुमार चौहान (73 वर्ष), निवासी मौहल्ला रईसान (पहाड़पुरिया), कस्बा व थाना हल्दौर, बिजनौर। (100% दृष्टिहीनता व शारीरिक लाचारी)
  • आरोपित दबंग: 1. नवनीत कुमार उर्फ बोबी (पुत्र रामपाल सिंह), 2. अरुण सिंह (पुत्र स्व० तेजपाल) — निवासीगण मौ० उत्तरी वैश्यान, हल्दौर।
  • घोटाले का तरीका: फर्जी तरीके से तीसरे व्यक्तियों को खड़ा कर कूटरचित बैनामा कराया गया।
  • सुलगता सवाल: दीवानी और आपराधिक (धोखाधड़ी) मुकदमे कोर्ट में विचाराधीन होने के बावजूद धड़ल्ले से जारी है अवैध निर्माण।
  • मांग: थानाध्यक्ष हल्दौर को तुरंत मौके पर भेजकर निर्माण कार्य रुकवाने और दबंगों की गिरफ्तारी की मांग।

 गुंडागर्दी और दबंगई की दास्तान: “कोर्ट का डर न कानून का खौफ!”

TargetTvLive की स्पेशल पड़ताल में सामने आया है कि आरोपी इतने बेखौफ हैं कि उन्हें न तो अदालत का डर है और न ही खाकी का। पीड़ित बुजुर्ग पदम कुमार चौहान ने तहसील दिवस में एडीएम,एसडीएम बिजनौर को दिए प्रार्थना पत्र में सीधे तौर पर आरोप लगाया है कि आरोपी संगठित गिरोह बनाकर आपराधिक गतिविधियों को अंजाम दे रहे हैं।

बुजुर्ग के अनुसार, आरोपी कई बार उनके साथ मारपीट कर चुके हैं। कोर्ट में स्टे (Stay Order) मिलने की कानूनी प्रक्रिया में हो रही देरी का सीधा फायदा उठाते हुए आरोपियों ने रातों-रात मकान और दुकान की दीवारें व छतें तोड़ दीं और वहां धड़ल्ले से पिलर खड़े कर नए अवैध निर्माण शुरू कर दिए हैं।

“मैं अंधा हूँ, देख नहीं सकता… लेकिन अपनी आंखों के सामने अपनी संपत्ति को लुटते और बर्बाद होते महसूस कर रहा हूँ। जब विरोध करता हूँ, तो ये बदमाश मारते-पीटते हैं और मुकदमा वापस न लेने पर जान से मारने की धमकी दे रहे हैं। मेरा 63 लाख रुपये का नुकसान हो चुका है, साहब मुझे बचा लीजिए!” — पदम कुमार चौहान, पीड़ित बुजुर्ग

 विवादित संपत्ति का सटीक विवरण (चौहद्दी)

प्रशासनिक और अदालती अभिलेखों में दर्ज संपत्ति का विवरण:

  • स्थान: मौहल्ला रईसान (पहाड़पुरिया), निकट लकड़शाह चौराहा, कस्बा हल्दौर, परगना दारानगर, तहसील व जिला बिजनौर।
  • पूर्व दिशा: रास्ता नगर पालिका
  • पश्चिम दिशा: लक्ष्मी रानी चौहान का प्लॉट
  • उत्तर दिशा: आलोक व सुरेश की दुकान
  • दक्षिण दिशा: स्व० नवनीत व विनीत का मकान व दुकान

 TargetTvLive का कड़ा विश्लेषण: कब जागेगा बिजनौर प्रशासन?

यह मामला केवल संपत्ति के लेन-देन या विवाद का नहीं है, बल्कि एक अत्यंत असहाय, बीमार और अंधे नागरिक पर किए जा रहे अमानवीय अत्याचार का है। यदि किसी जिले में 73 साल के दृष्टिहीन बुजुर्ग को अपनी संपत्ति बचाने के लिए अधिकारियों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं और दबंग खुलेआम तोड़-फोड़ कर रहे हैं, तो यह सीधे तौर पर स्थानीय हल्दौर थाना पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवालिया निशान खड़ा करता है।

TargetTvLive का दोटूक रुख:

  1. थानाध्यक्ष हल्दौर को तत्काल प्रभाव से मौके पर पुलिस बल भेजकर चल रहे अवैध निर्माण को तुरंत रुकवाना चाहिए।
  2. जब तक अदालत से स्वामित्व पर अंतिम फैसला नहीं आ जाता, तब तक संपत्ति पर यथास्थिति (Status Quo) कायम की जाए।
  3. बुजुर्ग को जान-माल की धमकी देने वाले अपराधियों पर सख्त कानूनी धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जेल भेजा जाए।

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