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मरीजों को परोसा जा रहा था ‘बीमारी का खाना’? बिजनौर FSDA की रेड में सामने आई बड़ी बदहाली

बिजनौर जिला अस्पताल की कैंटीन में FSDA का बड़ा छापा: गंदगी और बदहाली देख भड़के अफसर, दिए कड़े निर्देश

बिजनौर (Target TV Live) | अवनीश त्यागी की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट

मुख्य हाइलाइट्स

  • निरीक्षण: बिजनौर FSDA टीम का जिला अस्पताल कैंटीन में औचक छापा।
  • बदहाली: किचन के टूटे फर्श पर जमा मिला गंदा पानी, स्वच्छता मानक ध्वस्त।
  • सख्त आदेश: मक्खियों से बचाव के लिए फ्लाई ट्रैपर और बर्तन धोने को गर्म पानी अनिवार्य।

बिजनौर। मरीजों और तीमारदारों की सेहत के साथ जिला अस्पताल की कैंटीन में किस कदर खिलवाड़ हो रहा था, इसकी पोल उस वक्त खुल गई जब ‘खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन’ (FSDA) की टीम ने अचानक धावा बोल दिया। बिजनौर FSDA टीम के इस औचक निरीक्षण से कैंटीन संचालकों में हड़कंप मच गया। जांच के दौरान किचन की बदहाली, हर तरफ जमा गंदा पानी और मक्खियों की भरमार देखकर अधिकारियों का पारा चढ़ गया।

बीमारियों को न्योता देता किचन: फर्श टूटा, फैला गंदा पानी

निरीक्षण के दौरान सबसे भयावह स्थिति रसोई घर (Kitchen Area) में देखने को मिली। कैंटीन के फर्श की हालत बेहद जर्जर थी और उस पर नाली व सफाई का गंदा पानी जमा था। अस्पताल जैसी जगह, जहां स्वच्छता सबसे पहली शर्त होनी चाहिए, वहां इस तरह का जलजमाव सीधे तौर पर गंभीर संक्रमण और बैक्टीरिया को जन्म दे रहा था। टीम ने फर्श की तत्काल मरम्मत कराने और जलजमाव पूरी तरह खत्म करने का सख्त हुक्म दिया।

मक्खियों पर कड़ा प्रहार: तुरंत ‘फ्लाई ट्रैपर’ लगाने का आदेश

खाने-पीने की चीज़ों पर मंडराती मक्खियों और कीट-पतंगों को देख अधिकारियों ने कड़ी नाराजगी जताई। खाद्य सुरक्षा मानकों की धज्जियां उड़ते देख टीम ने निर्देश दिया कि रसोई और सर्विंग एरिया में तुरंत ‘फ्लाई ट्रैपर’ (Fly Trapper) मशीनें लगाई जाएं ताकि मरीजों तक पहुंचने वाले भोजन में संक्रमण का जरा भी खतरा न रहे।

बर्तन सफाई में बड़ा झोल: गर्म पानी की व्यवस्था का अल्टीमेटम

सफाई के नाम पर हो रही खानापूरी को पकड़ते हुए अधिकारियों ने साफ किया कि ठंडे या सामान्य पानी से बर्तनों की ग्रीस और बैक्टीरिया पूरी तरह खत्म नहीं होते। टीम ने कैंटीन संचालक को पाबंद किया कि बर्तन धोने के लिए गर्म पानी की पक्की व्यवस्था तत्काल शुरू की जाए।

प्रशासन का अल्टीमेटम: “जिला अस्पताल की कैंटीन में आने वाले मरीज पहले से ही कमजोर स्थिति में होते हैं। ऐसे में बासी या अस्वच्छ माहौल में बना खाना उनके जीवन के लिए खतरा बन सकता है। दिए गए निर्देशों का पालन तय समय सीमा में नहीं हुआ, तो कैंटीन को सील कर लाइसेंस निरस्त किया जाएगा।”

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