अक्टूबर से नया भट्ठा सत्र शुरू, बिना ऑनलाइन प्रमाण-पत्र चलाया भट्ठा तो खैर नहीं
ईंट-भट्ठा संचालकों के लिए बड़ी खबर: पायों के हिसाब से लगेगा विनियमन शुल्क, गलत जानकारी दी तो होगी राजस्व वसूली
बिजनौर DM उमेश प्रताप सिंह सख्त: भट्ठे का लोकेशन, पायों की संख्या अब पोर्टल पर होगी फीड, जियो-कोऑर्डिनेट अनिवार्य Target TV Live पर पढ़ें पूरी खबर।
बिजनौर। अवनीश त्यागी | Target TV Live
जनपद बिजनौर में अवैध और बिना नियमों के चल रहे ईंट-भट्ठों पर प्रशासन ने शिकंजा कस दिया है। जिलाधिकारी उमेश प्रताप सिंह ने ईंट-भट्ठा सत्र 2026-27 के लिए बड़ा आदेश जारी करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि अब बिना अग्रिम विनियमन शुल्क जमा किए कोई भी भट्ठा संचालित नहीं हो सकेगा। शासन के निर्देशों के बाद जिला प्रशासन पूरी तरह एक्शन मोड में है।
विशेष सचिव, उत्तर प्रदेश शासन, भूतत्व एवं खनिकर्म अनुभाग के 23 सितंबर 2026 के पत्र के क्रम में यह आदेश लागू किया गया है। इसके तहत उत्तर प्रदेश उपखनिज (परिहार) नियमावली, 2021 के नियम 21(2) के अनुसार पायों की संख्या के आधार पर शुल्क वसूला जाएगा।
विश्लेषण: क्यों सख्त हुआ प्रशासन?
दरअसल, हर साल ईंट-भट्ठा सत्र 1 अक्टूबर से शुरू होता है। पिछले वर्षों में देखा गया कि कई भट्ठा स्वामी शुल्क जमा किए बिना ही भट्ठे चला देते थे, पायों की संख्या कम बताकर राजस्व की चोरी करते थे। इस बार शासन ने पूरी प्रक्रिया को ऑनलाइन और पारदर्शी कर दिया है। जियो-कोऑर्डिनेट फीड करना अनिवार्य करने से अब भट्ठे की लोकेशन छिपाना संभव नहीं होगा।
Target TV Live के विश्लेषण के अनुसार, इस बार का फॉर्मूला साफ है – पहले फीस, फिर संचालन।
भट्ठा मालिकों को क्या-क्या करना होगा? (5 पॉइंट में समझें)
1. ऑनलाइन आवेदन अनिवार्य: http://upmines-upsdc.gov.in पोर्टल पर आवेदन करें।
2. 2000 रुपये फीस: आवेदन के साथ 2,000 रुपये आवेदन शुल्क जमा करना होगा।
3. पूरी डिटेल फीड करें: स्वामी का विवरण, भट्ठा स्थल का जियो-कोऑर्डिनेट, भट्ठे का प्रकार (सामान्य/जिग-जैग), पायों की संख्या, खनन क्षेत्र का विवरण देना होगा।
4. शपथ पत्र जरूरी: ईंट-मिट्टी की रॉयल्टी और पुराना विनियमन शुल्क बकाया न होने का शपथ पत्र लगाना होगा।
5. प्रमाण-पत्र डाउनलोड करें: शुल्क और पोल्यूशन की राशि ऑनलाइन जमा करने के बाद पोर्टल से ही प्रमाण-पत्र जनरेट होगा। यही आपके संचालन का लाइसेंस होगा।
शुल्क “0853-अलौह खनन तथा धातुकर्म उद्योग, 107-लघु खनिज रियायत शुल्क” मद में जमा होगा।
डेडलाइन और ब्याज का खेल
प्रशासन ने भट्ठा स्वामियों को राहत देते हुए 30 नवंबर 2026 तक शुल्क जमा करने पर जीरो ब्याज की छूट दी है। लेकिन इसके बाद जमा करने पर नियमानुसार ब्याज देना पड़ेगा। यानी समय पर शुल्क जमा करना ही समझदारी है।
गड़बड़ी की तो होगी राजस्व वसूली
DM ने चेतावनी दी है कि अगर जांच में पायों की संख्या घोषित संख्या से अधिक मिली, तो वास्तविक पायों के आधार पर राजस्व क्षति की वसूली होगी। साथ ही, अगर पायों की संख्या या भट्ठे के स्थान में कोई बदलाव होता है, तो 30 दिन के अंदर जिलाधिकारी, खान अधिकारी/खान निरीक्षक बिजनौर और निदेशालय के क्षेत्रीय कार्यालय को सूचित करना अनिवार्य होगा।
जिलाधिकारी उमेश प्रताप सिंह ने सभी भट्ठा स्वामियों से समयसीमा का पालन करने की अपेक्षा की है।
रिपोर्ट: अवनीश त्यागी, Target TV Live, बिजनौर












