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लापरवाह अफसरों पर प्रशासनिक चाबुक! CM डैशबोर्ड की खराब रैंकिंग पर 6 अधिकारियों को अल्टीमेटम

बिजनौर में लापरवाह अफसरों पर प्रशासनिक चाबुक! CM डैशबोर्ड की खराब रैंकिंग पर 6 अधिकारियों को अल्टीमेटम, पेयजल कंपनियों पर कसता शिकंजा

​विशेष विश्लेषणात्मक रिपोर्ट: अवनीश त्यागी

डिजिटल डेस्क, Target TV Live 

​बिजनौर, 29 सितंबर: उत्तर प्रदेश शासन की मंशा के अनुसार विकास कार्यों को धरातल पर उतारने और प्रशासनिक शिथिलता पर नकेल कसने के उद्देश्य से मंगलवार को बिजनौर कलेक्ट्रेट स्थित महात्मा विदुर सभागार में एक बेहद महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक संपन्न हुई। उत्तर प्रदेश जल निगम ग्रामीण के प्रबंध निदेशक एवं जनपद के नोडल अधिकारी योगेश कुमार ने पूर्व में 13 अगस्त को प्रभारी मंत्री कपिल देव अग्रवाल की अध्यक्षता में हुई बैठक के फैसलों की प्रगति और मुख्यमंत्री डैशबोर्ड के आंकड़ों का गहन विश्लेषण किया।

​Target TV Live की इस विशेष विश्लेषणात्मक रिपोर्ट में जानिए कि कैसे नोडल अधिकारी की इस मैराथन बैठक ने बिजनौर के प्रशासनिक महकमे में हलचल तेज कर दी है और कौन-कौन से विभाग अब सीधी कार्रवाई की जद में हैं।

​1. CM डैशबोर्ड पर फिसड्डी अफसरों को अल्टीमेटम: 6 अधिकारियों पर लटकी कार्रवाई की तलवार

​समीक्षा बैठक का सबसे तीखा रुख अगस्त महीने की मुख्यमंत्री डैशबोर्ड रैंकिंग के विश्लेषण के दौरान देखने को मिला। समीक्षा में यह खुलासा हुआ कि जनपद में संचालित कुल 85 कार्यक्रमों में से 8 प्रमुख योजनाओं में विभागीय लापरवाही के कारण जनपद का प्रदर्शन बेहद खराब रहा।

​नोडल अधिकारी योगेश कुमार ने सी (C) और डी (D) श्रेणी में पिछड़ने वाली इन 8 योजनाओं से जुड़े 6 विभागीय अधिकारियों को तत्काल चेतावनी जारी करने के सख्त निर्देश दिए। उन्होंने अफसरों को दो टूक शब्दों में हिदायत दी कि सरकारी योजनाओं में हीला-हवाली किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी विभागों को आपसी समन्वय स्थापित कर दिसंबर 2026 तक हर हाल में शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल करने का अंतिम अवसर दिया गया है।

​2. जल जीवन मिशन की धज्जियां उड़ाने वाली कंपनियों पर एक्शन का फरमान

​ग्रामीण पाइप पेयजल योजना की प्रगति की समीक्षा करते हुए नोडल अधिकारी का गुस्सा फूट पड़ा। बिजनौर में पेयजल परियोजना का काम संभाल रही कार्यदायी संस्थाओं—एलसी इंफ्रा (LC Infra) और वीटीएल इंफ्रा (VTL Infra)—के महाप्रबंधकों को कड़े शब्दों में फटकार लगाई गई।

  • ​सड़कों के गड्ढों पर सख्त रुख: पाइपलाइन बिछाने के नाम पर ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों की सड़कों को खोदकर बेहाल छोड़ देने पर नोडल अधिकारी ने बेहद नाराजगी जताई। उन्होंने कंपनियों को स्पष्ट आदेश दिया कि खोदी गई सड़कों और गड्ढों की मरम्मत सर्वोच्च प्राथमिकता के आधार पर तुरंत की जाए।
  • ​कड़ी कार्रवाई की चेतावनी: उन्होंने चेतावनी दी कि यदि निर्माण कार्य की गुणवत्ता में समझौता पाया गया या गड्ढों को भरने में देरी हुई, तो संबंधित ठेकेदारों और कंपनियों के विरुद्ध एफआईआर व ब्लैकलिस्टिंग जैसी कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

​3. बिजनौर का रिपोर्ट कार्ड: A ग्रेड में बाजी, पर PWD और श्रम विभाग ने बिगाड़ा खेल

​मुख्य विकास अधिकारी (CDO) रणविजय सिंह ने बैठक में जनपद के विकास कार्यों का विस्तृत लेखा-जोखा पेश किया, जिससे जिले में योजनाओं की वास्तविक तस्वीर साफ हुई:

  • ​मुख्यमंत्री डैशबोर्ड रैंकिंग (अगस्त): जनपद के कुल 85 कार्यक्रमों में से 55 कार्यक्रमों में बिजनौर ने ‘A’ श्रेणी और 7 में ‘B’ श्रेणी हासिल कर अपनी स्थिति मजबूत रखी है। हालांकि, पंचायती राज, श्रम व सेवायोजन तथा उद्योग विभाग की 4 योजनाओं को ‘C’ श्रेणी मिली। वहीं युवा कल्याण, लोक निर्माण विभाग (PWD), श्रम विभाग और समाज कल्याण की 4 योजनाओं में ‘D’ श्रेणी मिलने से जिले की साख को धक्का लगा है। शेष 15 कार्यक्रम बिना श्रेणी वाले रहे।
  • ​स्वास्थ्य ढांचे का विस्तार: सीडीओ ने बताया कि जिला पंचायत बिजनौर द्वारा जिले में 36 नए स्वास्थ्य उपकेंद्र और 2 ब्लॉक पब्लिक हेल्थ यूनिट बनाए जा रहे हैं। इनमें से 17 उपकेंद्रों के लिए भूमि का चिन्हांकन पूरा कर लिया गया है और बाकी जमीनों का चयन अंतिम दौर में है।
  • ​पेयजल पाइपलाइन का आंकड़ा: एलसी इंफ्रा (फेज-2) को मिले 301 योजनाओं के लक्ष्य में से 178 पूर्ण हो चुकी हैं। वहीं वीटीएल इंफ्रा (फेज-3) को आवंटित 608 योजनाओं के सापेक्ष केवल 86 योजनाएं ही पूरी हो सकी हैं, जिस पर तेजी से काम करने के निर्देश दिए गए हैं।

​4. बिजली आपूर्ति से लेकर खेती-किसानी तक: नोडल अधिकारी की ऑन-द-स्पॉट पड़ताल

​जनसुविधाओं और आम जनता से जुड़ी प्राथमिकताओं की समीक्षा करते हुए नोडल अधिकारी ने हर क्षेत्र की बारीकी से पड़ताल की। बिजली आपूर्ति के दावों की जमीनी हकीकत जांचने के लिए जब अधिशासी अभियंता ने बताया कि शहरी क्षेत्र में 24 घंटे और ग्रामीण क्षेत्र में 18 घंटे विद्युत आपूर्ति दी जा रही है, तो नोडल अधिकारी ने कागजी दावों पर भरोसा न करते हुए सभागार में मौजूद अन्य जनपदीय अधिकारियों से इसका ऑन-द-स्पॉट फीडबैक लिया।

​खेती और पशुधन के संरक्षण पर जोर देते हुए उन्होंने कृषि विभाग को मिट्टी की उर्वरता (Soil Fertility) बढ़ाने के लिए तुरंत एक व्यावहारिक और वैज्ञानिक कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। वहीं पशुपालन विभाग को निर्देश दिया गया कि जनपद के सभी पशुओं का शत-प्रतिशत टीकाकरण सुनिश्चित किया जाए और इसके लिए ब्लॉकवार (Block-wise) विस्तृत सूची बनाकर नियमित समीक्षा की जाए।

​इसके अलावा, उद्यान विभाग को निर्देश दिए गए कि वह ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में क्लस्टर आधारित मॉडल बनाकर सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ किसानों व बागवानों तक पहुंचाए। नोडल अधिकारी ने प्रशासनिक तंत्र को चेताते हुए कहा कि आईजीआरएस (IGRS), सीएम हेल्पलाइन और जनप्रतिनिधियों से मिलने वाली जनसमस्याओं का त्वरित व पारदर्शी निस्तारण सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है, जिसमें किसी भी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं होगी।

​निष्कर्ष: कागजी दावों से इतर धरातल पर बदलाव की कसौटी

​नोडल अधिकारी योगेश कुमार की इस उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक ने यह संदेश पूरी तरह साफ कर दिया है कि शासन केवल फाइलों तक सीमित रहने वाले अफसरों के प्रति अब कोई ढील नहीं बरतने वाला। एक तरफ जहां 55 योजनाओं में ‘A’ ग्रेड लाकर बिजनौर ने अपनी काबिलियत साबित की है, वहीं PWD, समाज कल्याण और श्रम विभाग की ‘D’ श्रेणी ने अधिकारियों की पोल खोल दी है।

​समीक्षा बैठक में अपर जिलाधिकारी (प्रशासन), अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व), ज्वाइंट मजिस्ट्रेट स्मृति मिश्रा सहित जिले के तमाम वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। अब देखना यह दिलचस्प होगा कि इस बड़ी चेतावनी के बाद सुस्त पड़ा प्रशासनिक अमला दिसंबर 2026 की समयसीमा से पहले अपनी रैंकिंग में कितना सुधार ला पाता है।

​उत्तर प्रदेश और बिजनौर की हर छोटी-बड़ी, सटीक और विश्लेषणात्मक खबर के लिए जुड़े रहिए Target TV Live के साथ। ग्राउंड रिपोर्ट: अवनीश त्यागी

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