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अस्पताल बना ‘चाइल्ड सेलिंग सेंटर’! 2 लाख में खरीदा, 5 लाख में बेचा… जानिए कैसे बेनकाब हुआ ये गंदा सिंडिकेट

बिजनौर Child Trafficking Racket: 15 दिन के मासूम को 2 लाख में खरीदा, 5 लाख में बेचा; 2 डॉक्टरों समेत 6 गिरफ्तार

targetTvLive डिजिटल डेस्क, बिजनौर विशेष विश्लेषणात्मक रिपोर्ट: अवनीश त्यागी

उत्तर प्रदेश के बिजनौर जनपद स्थित नगीना थाना पुलिस ने एक बेहद सनसनीखेज, चौंकाने वाले और इंसानियत को तार-तार करने वाले अंतर्राष्ट्रीय बाल तस्करी (Child Trafficking) सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है। पैसों की हवस में अंधे हुए एक गिरोह ने महज 15 दिन के नवजात मासूम बच्चे का 5 लाख रुपये में सौदा कर दिया। नगीना पुलिस ने बेहद मुस्तैदी और त्वरित कार्रवाई का परिचय देते हुए मासूम को सकुशल बरामद कर उसके परिजनों के सुपुर्द कर दिया है। इस मामले में पुलिस ने दो झोलाछाप/कथित डॉक्टरों और तीन महिलाओं सहित कुल 6 अभियुक्तों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।

1. घटनाक्रम और पुलिस की त्वरित कार्रवाई

यह पूरा मामला 28 सितंबर 2026 को सामने आया, जब नगीना थाना क्षेत्र के ग्राम भूरापुर निवासी ताजूद्दीन (पुत्र मेहंदी हसन) ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि उनकी बहन शबनम और बहनोई फरमान (निवासी ग्राम नैनपुरा) ने अपने नवजात शिशु को पालन-पोषण के नाम पर गांव की ही शफीकन को सौंपा था, जिसने अन्य आरोपियों के साथ मिलकर षड्यंत्र रचा और बच्चे का सौदा कर दिया।

मामले की गंभीरता को देखते हुए नगीना पुलिस ने तत्काल मु०अ०सं० 297/2026 दर्ज किया। पुलिस टीमों ने इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस और मुखबिर तंत्र को सक्रिय कर महज कुछ ही घंटों में मासूम को सुरक्षित बरामद कर लिया और गिरोह के सभी 6 सदस्यों को धर दबोचा।

2. क्राइम मोडस ऑपरेंडी: हॉस्पिटलों के आड़ में चल रहा था सिंडिकेट

पुलिस पूछताछ में इस गिरोह के काम करने की जो कार्यशैली (Modus Operandi) सामने आई, वह हैरान कर देने वाली है:

  • लाचारी का फायदा: आरोपी शबनम और उसके पति फरमान के पहले से 4 बच्चे थे। इसके बाद जब उन्हें जुड़वां बच्चे (एक लड़का और एक लड़की) हुए, तो अत्यधिक आर्थिक तंगी के कारण उन्होंने महज 15 दिन के नवजात बेटे को देने का फैसला किया।
  • 2 लाख में पहली खरीद: गांव की मध्यस्थ महिला शफीकन के जरिए डॉ. जितेन्द्र कुमार उर्फ विक्की, डॉ. कपिल उर्फ राजवीर और शिवानी ने 28 अगस्त 2025 को 15 दिन के मासूम को 2 लाख रुपये में हासिल किया।
  • 5 लाख में दूसरा सौदा: इसके बाद निःसंतान दंपत्ति (हरिद्वार के बहादराबाद निवासी प्रीतम सैनी और उनकी पत्नी सलोचना) की बेऔलादी और मजबूरी का फायदा उठाकर इस सिंडिकेट ने बच्चे का सौदा 5 लाख रुपये में कर दिया।
  • निजी हॉस्पिटलों का इस्तेमाल: सौदेबाज़ी के लिए बाकायदा निजी अस्पतालों का इस्तेमाल हुआ। पैसों का लेन-देन ‘रोनक हॉस्पिटल’ में डॉ. कपिल द्वारा कराया गया, जबकि मासूम का हैंडओवर ‘पीयूष हॉस्पिटल’ में डॉ. जितेन्द्र द्वारा किया गया।
  • रकम की बंदरबांट और ब्लैकमेलिंग: 5 लाख रुपये में से आरोपियों ने 1-1 लाख रुपये आपस में बांट लिए। जब जैविक माता-पिता को पता चला कि बच्चा भारी-भरकम रकम में बेचा गया है, तो उन्होंने शिकायत की धमकी दी; जिसके बाद उन्हें शांत रखने के लिए 1.5 लाख रुपये अतिरिक्त दे दिए गए।

3. कानूनी मार्गदर्शिका: बच्चा गोद लेने का सही नियम (CARA Process)

बिजनौर की यह घटना बताती है कि जानकारी के अभाव में किसी निजी अस्पताल या दलाल के जरिए बच्चा खरीदना कितना बड़ा कानूनी अपराध है। भारत में बच्चा गोद लेने के लिए केंद्रीय दत्तक-ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (CARA) का स्पष्ट कानून है:

  • CARA पोर्टल रजिस्ट्रेशन: इच्छुक माता-पिता को भारत सरकार की आधिकारिक वेबसाइट cara.wcd.gov.in पर ऑनलाइन पंजीकरण कराना अनिवार्य है।
  • गृह अध्ययन (Home Study Report): जिला बाल संरक्षण इकाई (DCPU) का अधिकारी आवेदक के घर जाकर सामाजिक और आर्थिक स्थिति की जांच करता है।
  • पारदर्शी मिलान (Matching): वरिष्ठता और नियमों के अनुसार पोर्टल के जरिए कानूनी रूप से मुक्त (Legally Free) बच्चे की प्रोफाइल दिखाई जाती है।
  • अदालती/DM आदेश: कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद जिलाधिकारी या सक्षम अदालत से दत्तक ग्रहण का अंतिम आदेश जारी होता है।

ध्यान दें: अस्पतालों, दलालों या सीधे रिश्तेदारों को पैसे देकर बच्चा लेना किशोर न्याय (Juvenile Justice Act) अधिनियम के तहत गैर-जमानती अपराध है, जिसमें खरीदने और बेचने वाले दोनों को जेल की सजा होती है।

4. गिरफ्तार अभियुक्तों का विवरण और आपराधिक रिकॉर्ड

नगीना पुलिस ने BNS की धाराओं 137(2), 351(3), 93, 143(4) और धारा 80/81 किशोर न्याय अधिनियम के तहत कार्रवाई करते हुए इन आरोपियों को गिरफ्तार किया है:

  • डॉ. जितेन्द्र कुमार उर्फ विक्की (पुत्र रोहताश, निवासी ग्राम नंदपुर, नगीना) — आपराधिक इतिहास: पूर्व में धोखाधड़ी, मेडिकल एक्ट (221/18) और गंभीर धाराओं व SC/ST एक्ट (94/25) में आरोपी।
  • डॉ. कपिल उर्फ राजवीर (पुत्र रोहताश, निवासी ग्राम नंदपुर, नगीना) — आपराधिक इतिहास: पूर्व में अश्लीलता/अभद्रता (241/16) और मेडिकल एक्ट (221/18) में नामजद।
  • फरमान (पुत्र शाहिद, निवासी ग्राम नैनपुरा, नगीना) — जैविक पिता।
  • शबनम (पत्नी फरमान, निवासी ग्राम नैनपुरा, नगीना) — जैविक माता।
  • शफीकन (पत्नी फरीद, निवासी ग्राम नैनपुरा, नगीना) — मुख्य बिचौलिया।
  • सलोचना (पत्नी प्रीतम सैनी, निवासी ग्राम बहादुरपुर सैफी, बहादराबाद, हरिद्वार) — खरीददार महिला।

5. पुलिस टीम की सराहनीय भूमिका

थाना प्रभारी धर्मेंद्र सिंह के नेतृत्व में नगीना पुलिस टीम ने इस रैकेट का भंडाफोड़ किया। टीम में उप-निरीक्षक अजीत कुमार व सुक्रमपाल राणा, हेड कांस्टेबल वरुण कुमार (441), विरेन्द्र कुमार (234) व ब्रिजेश कुमार (183), कांस्टेबल निर्दोष कुमार (2561), ललित कुमार (1934) व सुशांत कुमार (2770) तथा महिला कांस्टेबल मीनाक्षी (285), स्वाति (720) व मोनिका (578) शामिल रहे।

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