Target Tv Live

बिजनौर में झोलाछापों का ‘मकड़जाल’: 50 वर्षीय अफसाना की मौत के बाद भड़का जनआक्रोश, क्या अवैध उगाही का अड्डा बना स्वास्थ्य विभाग?

बिजनौर में झोलाछापों का मकड़जाल’: 50 वर्षीय अफसाना की मौत के बाद भड़का जनआक्रोश, क्या अवैध उगाही का अड्डा बना स्वास्थ्य विभाग?

TargetTvLive के लिए अवनीश त्यागी की विशेष विश्लेषणात्मक रिपोर्ट।

बिजनौर। जनपद बिजनौर में बिना किसी वैध डिग्री और पंजीकरण के अवैध रूप से अस्पताल और क्लीनिक संचालित करने वाले नीम-हकीमों (झोलाछाप डॉक्टरों) का मकड़जाल किस कदर फैल चुका है, इसकी खौफनाक बानगी धामपुर के गांव ढक्का करमचंद में देखने को मिली। बुखार से पीड़ित 50 वर्षीय महिला अफसाना की उपचार के दौरान दर्दनाक मौत हो गई। आरोप है कि गांव के ही एक कथित डॉक्टर ने महिला को पूरी तरह ठीक करने की ‘गारंटी’ देकर 8 से 10 दिनों तक अपने क्लीनिक पर भर्ती रखा और आखिर में इलाज के दौरान मरीज ने दम तोड़ दिया।

जैसे ही महिला की मौत की खबर सामने आई, परिजनों में कोहराम मच गया और ग्रामीणों का आक्रोश फूट पड़ा। गुस्साए लोग जब झोलाछाप डॉक्टर से जवाब-तलब करने पहुंचे, तो भीड़ देखकर डॉक्टर अपने पूरे स्टाफ के साथ क्लीनिक में ताला बंद कर रफूचक्कर हो गया। सूचना मिलने पर ‘112’ पुलिस टीम मौके पर पहुंची और प्राथमिक तहकीकात शुरू की। मृतका अपने पीछे 6 बच्चों का रोता-बिलखता परिवार छोड़ गई हैं।

पूरे प्रदेश में अव्वल बिजनौर! क्या वसूली का जरिया बने झोलाछाप?

विभागीय सूत्रों और स्थानीय जानकार सूत्रों का दावा है कि फर्जी और गैर-कानूनी ढंग से क्लीनिक चलाने के मामले में बिजनौर जनपद पूरे प्रदेश में शीर्ष स्थानों पर शुमार है। ग्रामीण अंचलों से लेकर शहरी इलाकों तक जगह-जगह मानकों की धज्जियां उड़ाकर फर्जी अस्पताल और पैथोलॉजी लैब संचालित हो रही हैं।

सूत्रों का यह भी गंभीर आरोप है कि यह पूरा नेटवर्क स्वास्थ्य विभाग के निचले अमले और कथित अधिकारियों के लिए ‘अवैध उगाही’ का एक बड़ा जरिया बन चुका है। विभाग द्वारा समय-समय पर दिखावे की कार्रवाई या नोटिस जारी करने का ढोंग तो किया जाता है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि इन नीम-हकीमों को खुलेआम दुकानें चलाने की मौन छूट मिली हुई है।

मानकों की उड़ रही धज्जियां, ‘मंकी/फर्जी’ अस्पतालों को संरक्षण!

सूत्रों के अनुसार, बिजनौर में न केवल बिना डिग्री वाले झोलाछाप क्लीनिक चला रहे हैं, बल्कि मानकों को ताक पर रखकर कई अवैध और ‘मंकी अस्पतालों’ का पंजीकरण तक कर दिया जाता है। कागजों में खानापूर्ति करके ऐसे केंद्रों को हरी झंडी दे दी जाती है, जहां न तो प्रशिक्षित स्टाफ होता है और न ही आपातकालीन जीवन रक्षक उपकरण। यही वजह है कि आए दिन निर्दोष मरीज अपनी जान गंवाने को मजबूर हैं।

प्रशासन और विभाग की चुप्पी पर उठ रहे तीखे सवाल

जब इस पूरे प्रकरण और जनपद में तेजी से फैल रहे झोलाछाप नेटवर्क पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) डॉ. कौशलेंद्र सिंह से पक्ष जानने और जानकारी लेने की कोशिश की गई, तो उनकी तरफ से केवल मौन या टालमटोल भरा जवाब ही मिला। विभागीय अधिकारियों का इस तरह चुप्पी साध लेना ही इस बात का पुख्ता प्रमाण है कि स्थिति कितनी विकराल और गंभीर हो चुकी है।

वहीं, वही मीडिया रिपोर्ट के अनुसार इस मामले को लेकर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. अंकित कुमार का कहना है कि मामला संज्ञान में आया है और विभाग द्वारा गांव में सर्वे कराकर जांच की जाएगी। उधर, सीओ अंजनी कुमार चतुर्वेदी का कहना है कि पुलिस पूरे मामले की गहनता से जांच कर रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

Leave a Comment

यह भी पढ़ें