थानों में अचानक क्यों इशारों में बात करने लगे पुलिसवाले? जानिए खाकी के इस बड़े ‘मास्टरस्ट्रोक’ के पीछे की कहानी!

TargetTvLive एक्सक्लूसिव | अवनीश त्यागी का विशेष विश्लेषणात्मक विश्लेषण
हाई-इम्पैक्ट कैचलाइन:
“जब शब्द खामोश हो जाते हैं, तब संवेदनाएं बोलती हैं!”— अंतरराष्ट्रीय सांकेतिक भाषा दिवस पर बिजनौर पुलिस लाइन में एक ऐतिहासिक अध्याय की शुरुआत। जानिए, खाकी के इस ‘मास्टरस्ट्रोक’ से कैसे बदलेगा खाकी का अक्स और कैसे मिलेगा हर फरियादी को त्वरित न्याय।
Quick Highlights:
- खाकी का ‘डिजिटल और सेंसिटिव’ ट्रांसफॉर्मेशन: बिजनौर पुलिस अब सांकेतिक भाषा (Sign Language) के जरिए सीधे मूक-बधिर नागरिकों से संवाद स्थापित करेगी।
- थानों में खत्म होगा बिचौलियों का खेल: फरियाद लेकर आने वाले विशेष योग्यजनों को अब अपनी बात समझाने के लिए किसी बाहरी दुभाषिए की जरूरत नहीं पड़ेगी।
- लखनऊ से जारी निर्देशों का बिजनौर में सटीक मॉडल: डीआईजी (मुख्यालय, लखनऊ) के आदेश पर आयोजित हुआ यह राज्य स्तरीय मॉडल प्रशिक्षण शिविर।
- विशेषज्ञ टीम का मास्टरक्लास: ‘अखिल भारतीय उत्तर प्रदेश बधिर संस्था’ के 16 सदस्यीय एक्सपर्ट पैनल ने पुलिसकर्मियों को दी व्यावहारिक ट्रेनिंग।
विशेष ग्राउंड रिपोर्ट: न्याय के दरवाजे पर अब ‘खामोशी’ रुकावट नहीं बनेगी

बिजनौर। कानून की चौखट पर जब कोई पीड़ित अपनी शिकायत लेकर पहुंचता है, तो उसकी सबसे बड़ी ताकत होती है उसकी ‘आवाज’। लेकिन समाज का एक बड़ा वर्ग ऐसा भी है, जिसकी शिकायतें थानों के शोर में सिर्फ इसलिए दब जाती हैं क्योंकि वे बोल या सुन नहीं सकते। इस सबसे बड़ी व्यावहारिक चुनौती को ध्वस्त करते हुए बिजनौर पुलिस प्रशासन ने एक क्रांतिकारी और मिसाल कायम करने वाली पहल की है।
अंतरराष्ट्रीय सांकेतिक भाषा दिवस (23 सितंबर 2026) के अवसर पर रिजर्व पुलिस लाइन, बिजनौर में आयोजित 1-दिवसीय निशुल्क सांकेतिक भाषा प्रशिक्षण कार्यशाला केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि यूपी पुलिस के ‘मित्र पुलिस’ के दावे को धरातल पर साबित करने वाला सबसे बड़ा कदम है। targetTvLive के लिए अवनीश त्यागी का यह विशेष विश्लेषण इस बदलाव की पूरी इनसाइड स्टोरी बयां करता है।
नीतिगत दूरदर्शिता: डीआईजी मुख्यालय के आदेश पर उतरी धरातल पर रणनीति
यह ऐतिहासिक आयोजन महज इत्तेफाक नहीं, बल्कि सुनियोजित प्रशासनिक दूरदर्शिता का परिणाम है।
- शीर्ष नेतृत्व का विजन: यह कार्यशाला पुलिस उपमहानिरीक्षक (मुख्यालय, उत्तर प्रदेश, लखनऊ) के निर्देशों के क्रम में आयोजित की गई।
- संस्थागत तालमेल: अखिल भारतीय उत्तर प्रदेश बधिर संस्था के महासचिव के दिशा-निर्देशों के अनुरूप, जमीनी स्तर पर थानों में तैनात पुलिसकर्मियों को सीधे ट्रेन करने का खाका तैयार किया गया।
इस पहल का दूरगामी प्रभाव यह होगा कि दुष्कर्म, ठगी, मारपीट या अन्य अपराधों के शिकार मूक-बधिर पीड़ित बिना किसी झिझक या डर के सीधे पुलिस अधिकारी से अपनी आपबीती इशारों में बयां कर सकेंगे।
मास्टर ट्रेनर्स की फौज: 16 विशेषज्ञों ने सिखाया ‘साइन लैंग्वेज’ का ए-बी-सी-डी

कार्यशाला में बधिर समुदाय के 16 कुशल और अनुभवी प्रशिक्षकों ने पुलिस अधिकारियों और जवानों को ‘हैंड जेस्चर’, ‘फेस एक्सप्रेशन’ और ‘बॉडी लैंग्वेज’ के जरिए संवाद करने के गुर सिखाए।
- मास्टर ट्रेनर्स पैनल: विवेक राणा, शिवम कुमार, शांतनु, अरविंद, सुमित सिंह, विशाल राजपूत, अंकित कुमार, मो. सादिक, प्रांची राणा, अमन सिंह, अनश फरीदी, जुनैद, पूजा सिंह, विनीत चौधरी, वर्णिक एवं रिया ने व्यावहारिक और दैनिक पुलिसिंग में काम आने वाले सांकेतिक शब्दों का गहराई से अभ्यास कराया।
आरक्षी से लेकर अधिकारी तक: एक ही मंच पर खाकी का संवेदनशील रूप
पुलिस लाइन के इस प्रशिक्षण सत्र में न केवल थानों के जिम्मेदार अधिकारी बल्कि धरातल पर सबसे पहले नागरिक से मिलने वाले कांस्टेबल भी मुस्तैद दिखे।
- नेतृत्वकर्ता: प्रतिसार निरीक्षक (RI) श्री देवेन्द्र सिंह ढिकराव, उप-निरीक्षक (स.पु.) अशोक तोमर तथा उप-निरीक्षक (स.पु.) ओम सिंह की गरिमामयी मौजूदगी रही।
- जमीनी सिपाही: जिले के तमाम थानों से आए उप-निरीक्षक (SI), मुख्य आरक्षी (Head Constables), पुरुष आरक्षी तथा महिला आरक्षियों (Female Constables) ने पूरे मनोयोग और संवेदनशीलता से इस ट्रेनिंग में हिस्सा लिया।
सम्मान और कृतज्ञता: प्रशस्ति पत्र देकर बढ़ाया हौसला
प्रशिक्षण के समापन पर प्रतिसार निरीक्षक श्री देवेन्द्र सिंह ढिकराव ने पुलिस अधीक्षक बिजनौर की ओर से सभी बधिर प्रशिक्षकों को प्रशस्ति पत्र (Appreciation Certificate) देकर सम्मानित किया।
प्रतिसार निरीक्षक का वक्तव्य: “बधिर प्रशिक्षकों ने पुलिस महकमे को जो अमूल्य प्रशिक्षण दिया है, वह शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। यह प्रशिक्षण हमारी पुलिस व्यवस्था को और अधिक संवेदनशील, पारदर्शी और सर्व-समावेशी बनाएगा। हम इस संस्था का हृदय से आभार व्यक्त करते हैं।”
targetTvLive का विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण (अवनीश त्यागी की कलम से):
क्या यह पहल यूपी के अन्य जिलों के लिए रोल मॉडल बनेगी?
मूक-बधिर नागरिकों के साथ होने वाले अपराधों में अक्सर सबसे बड़ी बाधा ‘बयान दर्ज करना’ और ‘साक्ष्य जुटाना’ होती है। एफआईआर दर्ज कराने से लेकर कोर्ट में चार्जशीट दाखिल करने तक, भाषा का यह अंतर एक बड़ी दीवार बना रहता है। बिजनौर पुलिस का यह कदम न केवल कानून व्यवस्था के प्रति जन-विश्वास बढ़ाएगा, बल्कि मानवाधिकारों की रक्षा में एक मील का पत्थर साबित होगा।
targetTvLive इस जनहितैषी और दूरदर्शी पहल के लिए बिजनौर पुलिस और प्रशिक्षक संस्था की सराहना करता है। उम्मीद है कि यह मॉडल जल्द ही पूरे उत्तर प्रदेश के थानों में लागू होगा।
रिपोर्टर: अवनीश त्यागी कवरेज व कॉपीराइट: targetTvLive डिजिटल मीडिया नेटवर्क लोकेशन: बिजनौर / लखनऊ डेस्क













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वाकई लाजवाब पहल