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कोर्ट से निकलकर सीधे स्कूलों में क्यों पहुंच रहे जज साहब? वजह जानकर हर माता-पिता कहेंगे- ‘वाह!’

जज साहब खुद पढ़ाएंगे कानून का पाठ! बिजनौर के स्कूलों में 25 सितंबर से ‘मिशन पोक्सो’, जानिए प्रार्थना सभा में क्या बदलेगा

डिजिटल न्यूज़ डेस्क | Target TV Live अवनीश त्यागी की एक्सक्लूसिव विश्लेषणात्मक रिपोर्ट

बिजनौर। क्या आपने कभी कल्पना की है कि सुबह की प्रार्थना सभा (Morning Assembly) में राष्ट्रगान और प्रार्थना के ठीक बाद अगर कोर्ट के जज साहब माइक संभाल लें और बच्चों को उनके अधिकारों और कानून का पाठ पढ़ाने लगें? बिजनौर जिले में 25 सितंबर से कुछ ऐसा ही ऐतिहासिक और क्रांतिकारी नजारा देखने को मिलने वाला है।

उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (SALSA) के निर्देश पर जिला प्रशासन और न्यायपालिका ने एक ऐसी मुहिम का आगाज़ किया है, जो सीधे तौर पर किशोरावस्था की दहलीज पर खड़े हमारे बच्चों की सुरक्षा, सजगता और भविष्य से जुड़ी है। 25 सितंबर से 1 अक्टूबर तक जिले के तमाम सरकारी व प्राइवेट स्कूलों में न्यायिक अधिकारी (Judges) खुद जाकर सुबह की प्रार्थना सभा के दौरान छात्रों को पोक्सो अधिनियम (POCSO Act), 2012 के प्रावधानों, सुरक्षात्मक अधिकारों और इसके कानूनी परिणामों के प्रति जागरूक करेंगे।

फाइलों से निकलकर ग्राउंड ज़ीरो पर न्यायपालिका: जानिए क्या है एक्शन प्लान

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) कार्यालय में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में इस अभियान का रोडमैप तैयार किया गया। बैठक की अध्यक्षता कर रहे अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश (ईसी) लोकेश नागर ने सीधे तौर पर प्रशासनिक अधिकारियों की जवाबदेही तय की:

  • तहसीलवार सूची तलब: जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि कक्षा 9 से 12 तक के यूपी बोर्ड, सीबीएसई व आईसीएसई समेत सभी सरकारी व निजी स्कूलों की तहसीलवार सूची तुरंत सौंपी जाए।
  • कस्तूरबा गांधी विद्यालयों पर पैनी नज़र: बेसिक शिक्षा विभाग को कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों की सूची प्राथमिकता पर देने को कहा गया है, ताकि दूर-दराज़ और संवेदनशील क्षेत्रों की छात्राओं को भी कानून का सुरक्षा कवच दिया जा सके।

“यह अभियान महज़ कागज़ों या रस्म अदायगी तक सीमित नहीं रहेगा। हमारा मकसद न्यायपालिका और बच्चों के बीच की दूरी को मिटाना है, ताकि वे बिना किसी डर के अपने अधिकारों को समझें और किसी भी अप्रिय घटना से खुद को बचा सकें।” — लोकेश नागर, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (ईसी)

अप्रिय घटनाओं पर कड़ा प्रहार: 2 अक्टूबर को रंग लाएगा अभियान

बैठक में मौजूद जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव स्वाती चंद्रा ने बताया कि 25 सितंबर से 1 अक्टूबर तक चलने वाले इस ‘विधिक जागरूकता सप्ताह’ के दौरान न्यायिक अधिकारी प्रार्थना सभाओं में बच्चों को यह सिखाएंगे कि किसी भी गलत आचरण या अपराध के खिलाफ आवाज़ कैसे उठानी है।

अभियान का पूरा शेड्यूल और मुख्य आकर्षण:

  1. सीधा संवाद: जज और बच्चों के बीच सीधा संवाद, जिसमें ‘गुड टच-बैड टच’, रिपोर्टिंग प्रक्रिया और कानूनी मदद पाने के आसान तरीकों पर चर्चा होगी।
  2. गांधी जयंती (2 अक्टूबर) पर बड़ा आयोजन: अभियान के समापन के दिन जिले भर में विशाल प्रभात फेरी, चित्रकला, निबंध और पोस्टर प्रतियोगिताओं का भव्य आयोजन किया जाएगा, ताकि जागरूकता का यह संदेश जन-जन तक पहुँचे।

इस अवसर पर प्रधान न्यायाधीश (किशोर न्याय बोर्ड), बाल कल्याण समिति (CWC) के प्रतिनिधि सहित कई प्रमुख विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।

Target TV Live एनालिसिस: ‘डर से ढाल तक’ का सफर

अवनीश त्यागी का नज़रिया: आमतौर पर अदालत, पुलिस और कानून का नाम सुनते ही आम नागरिक और बच्चे सहम जाते हैं। लेकिन जब एक जज खुद स्कूल के प्रांगण में खड़े होकर एक मार्गदर्शक के रूप में बच्चों से बात करेगा, तो कानून का ‘डर’ खत्म होगा और वह एक ‘ढाल’ के रूप में उभरेगा।

पोक्सो कानून की सही और सटीक जानकारी न केवल किशोरों को जागरूक बनाएगी, बल्कि संभावित अपराधियों में भी सख्त संदेश भेजेगी। बिजनौर न्यायपालिका की यह पहल पूरे प्रदेश के लिए एक मिसाल बन सकती है।

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