महा-अभ्यास: बिजनौर की सभी 5 तहसीलों में गूंजे इमरजेंसी सायरन; भूकंप, आग और केमिकल लीक से निपटने की ‘वार-फुटिंग’ तैयारी

विशेष रिपोर्ट: अवनीश त्यागी
डिजिटल कवरेज: targetTvLive स्थान: बिजनौर (उत्तर प्रदेश)
डिजिटल हाइलाइट्स
- एक साथ 5 मोर्चे: बिजनौर, धामपुर, चांदपुर, नगीना और नजीबाबाद में प्रातः 10:00 बजे एक साथ शुरू हुआ राहत एवं बचाव अभियान।
- मल्टी-डिजास्टर सिमुलेशन: भूकंप के झटकों, रिफाइनरी में रासायनिक रिसाव और भीषण अग्निकांड जैसी आपात स्थितियों पर परखा गया ‘रिस्पॉन्स टाइम’।
- कमांड सेंटर एक्शन: SDRF, PAC, फायर ब्रिगेड, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग और ‘आपदा मित्रों’ की संयुक्त रेस्क्यू टीम ने दिखाया ज़मीनी पराक्रम।
- जन-जागरूकता: स्कूल, कॉलेज, जिला अस्पताल और इंडस्ट्रियल डिपो में हजारों नागरिकों और छात्रों को सिखाए गए ‘लाइफ-सेविंग’ टिप्स।
सायरन की गूंज और ग्राउंड एक्शन: बिजनौर में आपदा प्रबंधन का अब तक का सबसे बड़ा शक्ति प्रदर्शन

बिजनौर (targetTvLive): किसी भी कुदरती आफत या औद्योगिक हादसे के दौरान केवल योजनाएं काम नहीं आतीं, बल्कि काम आता है मिनटों-सेकंडों में लिया गया सही फैसला और प्रशासनिक तत्परता। इसी ग्राउंड रेडिनेस (Ground Readiness) को परखने के लिए शुक्रवार को बिजनौर जिले में आपदा प्रबंधन का अब तक का सबसे बड़ा और हाइटेक ‘मॉक ड्रिल’ आयोजित किया गया। जिलाधिकारी जसजीत कौर के सीधे मार्गदर्शन में ठीक सुबह 10:00 बजे पूरे जिले की पांचों तहसीलों में एक साथ आपातकालीन सायरन गूंज उठे, जिसके तुरंत बाद SDRF, पुलिस, फायर ब्रिगेड और मेडिकल टीमों ने मोर्चेबंदी संभाल ली।
इस बहु-स्तरीय मेगा अभ्यास का मुख्य ध्येय आपातकालीन एजेंसियों के ‘गोल्डन आवर रिस्पॉन्स टाइम’ को सटीक रूप से मापना और आम नागरिकों में पैनिक (घबराहट) के बजाय त्वरित सूझबूझ का संचार करना रहा।
ग्राउंड जीरो रिपोर्ट: जानिए किस तहसील में किस आफत से निपटने का हुआ अभ्यास
प्रशासन ने जिले के पांच सबसे संवेदनशील और सार्वजनिक केंद्रों को चुनकर वास्तविक आपदा जैसा माहौल तैयार किया, ताकि तैयारियों में कोई गुंजाइश न रह जाए।
1. बिजनौर तहसील (विवेक विश्वविद्यालय): नूरपुर रोड स्थित विवेक विश्वविद्यालय में जैसे ही भूकंप के झटकों का सायरन बजा, छात्रों और प्रोफेसरों ने ‘डॉक, कवर एंड होल्ड’ तकनीक अपनाते हुए टेबल व सुरक्षित कोनों में शरण ली। इसके तुरंत बाद SDRF की टीम ने मलबे में फंसे लोगों को निकालने और ऊंची इमारतों से सुरक्षित रेस्क्यू करने का लाइव डिमॉन्स्ट्रेशन दिया।
2. धामपुर तहसील (100 शैया युक्त संयुक्त चिकित्सालय): धामपुर के जिला अस्पताल में आपातकालीन स्थिति में मरीजों की सुरक्षित निकासी (Evacuation) का परीक्षण हुआ। मेडिकल टीम ने सेकंडों के हिसाब से एम्बुलेंस के लिए ‘ग्रीन कॉरिडोर’ बनाकर मरीजों को ट्राइएज वार्ड (Triage Ward) में शिफ्ट करने और ऑक्सीजन सप्लाई बनाए रखने की आपात प्रक्रिया का सफल पूर्वाभ्यास किया।
3. चांदपुर तहसील (गुलाब सिंह हिंदू स्नातकोत्तर महाविद्यालय): कॉलेज परिसर में भीषण अग्निकांड का सिमुलेशन किया गया। अग्निशमन विभाग की गाड़ियों ने कुछ ही मिनटों में पहुंचकर हाई-प्रेशर वॉटर कैनन के ज़रिए आग पर काबू पाया। साथ ही विद्यार्थियों को फायर एक्सटिंग्विशर (अग्निशामक यंत्र) चलाने और झुलसे लोगों को तत्काल प्राथमिक उपचार (First Aid) देने की ट्रेनिंग दी।
4. नगीना तहसील (एम. एम. इंटर कॉलेज): नगीना में स्कूली बच्चों को किसी भी आपदा के समय फैलने वाली भगदड़ (Stampede) से बचने की रणनीतियां सिखाई गईं। छात्रों को बताया गया कि आपात स्थिति में बिना घबराए कतारबद्ध होकर कैसे बाहर निकलें और 112 या 108 जैसे इमरजेंसी नंबरों का इस्तेमाल किस तरह करें।
5. नजीबाबाद तहसील (इंडियन ऑयल डिपो, आदर्श नगर): जिले के सबसे संवेदनशील प्रतिष्ठानों में शुमार इंडियन ऑयल डिपो में घातक रासायनिक रिसाव (Hazmat Hazard) और ऑयल टैंक में आग का सिमुलेशन हुआ। विशेष सुरक्षा किट पहने जवानों ने केमिकल लीकेज को बंद करने, गैस के प्रभाव को निष्क्रिय करने और पूरे इलाके को सील करने का मॉक-ऑपरेशन सफलता के साथ पूरा किया।
SDRF से ‘आपदा मित्र’ तक: कमांड और कंट्रोल का शानदार प्रदर्शन
इस मॉक ड्रिल की सबसे बड़ी खासियत एजेंसियों के बीच दिखा जबर्दस्त तालमेल (Inter-Departmental Coordination) रहा। राज्य आपदा मोचन बल (SDRF), पीएसी (PAC), होमगार्ड, एनसीसी और फायर ब्रिगेड की टीमों ने ग्राउंड पर मुख्य मोर्चा संभाला। वहीं बैकएंड पर स्वास्थ्य विभाग, पुलिस प्रशासन, राजस्व विभाग की फील्ड टीमें और सूचना विभाग पूरी मुस्तैदी के साथ एक्टिव रहे।
स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षित ‘आपदा मित्र’ और कॉलेज व अस्पताल के वॉलिंटियर्स ने नागरिक सुरक्षा बल के रूप में कंधे से कंधा मिलाकर काम किया। घटनास्थल पर मौजूद अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने प्रत्येक टीम के मूवमेंट, घायलों तक पहुंचने के समय और रेस्क्यू गियर के उपयोग को स्टॉपवॉच पर आंका।
targetTvLive नज़रिया: कागजी दावों से आगे बढ़कर ग्राउंड ज़ीरो पर सुरक्षा की गारंटी
भौगोलिक रूप से गंगा के मैदानी इलाकों में बसे होने और नजीबाबाद जैसे बड़े इंडस्ट्रियल व ऑयल डिपो जोन के कारण बिजनौर जिला आपदा संवेदनशीलता की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है। शुक्रवार का यह महा-अभ्यास यह साबित करता है कि जिला प्रशासन केवल आपदा आने का इंतजार करने के बजाय अपनी पूर्व-तैयारियों को धार दे रहा है।
समय-समय पर होने वाले ऐसे लाइव ट्रायल न केवल सरकारी तंत्र के उपकरणों और उनकी कार्यप्रणाली का ‘सिस्टम ऑडिट’ कर देते हैं, बल्कि जब आम नागरिक स्वयं बचाव के तरीके देखते हैं, तो उनका डर दूर होता है। आपदा से मुकाबला करने की असली ताकत घबराहट में नहीं, बल्कि सही प्रशिक्षण में है—और बिजनौर प्रशासन ने इस मॉक ड्रिल के ज़रिए इसी सुरक्षा चक्र को मजबूत करने का काम किया है।












