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बिजनौर ITI कांड: जब विभागीय मंत्री के अपने जिले में प्रिंसिपल फुर्र और क्लास खाली, तो बाकी UP का क्या हाल?

विभागीय मंत्री के अपने ही क्षेत्र में ITI की यह दुर्दशा: जब ‘अपनों’ के जिले में तालेबंदी जैसी नौबत, तो बाकी UP का क्या होगा?

बिजनौर | अवनीश त्यागी | targetTvLive

तकनीकी शिक्षा को हाईटेक बनाने और युवाओं को रोजगार के अवसर देने का दम भरने वाले व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता विभाग (उत्तर प्रदेश) की हकीकत बिजनौर जिले में पूरी तरह बेनकाब हो चुकी है। 18 सितंबर 2026 को बिजनौर के 4 राजकीय ITI संस्थानों में हुई औचक छापेमारी ने न सिर्फ प्रशासनिक तंत्र की पोल खोली है, बल्कि सीधे-सीधे विभागीय व्यवस्था और राजनीतिक इच्छाशक्ति पर बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है।

सबसे विचारणीय और गंभीर पहलू यह है कि कपिल देव अग्रवाल खुद व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता विभाग के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) हैं। इतना ही नहीं, वे बिजनौर जिले के प्रभारी मंत्री की भूमिका में भी हैं। इसके बावजूद जब उनके ही विभाग और उनके ही प्रभार वाले जिले में सरकारी ITI संस्थानों का यह हाल है—जहाँ नगीना में प्रिंसिपल गायब मिले, धामपुर में 91 में से सिर्फ 13 छात्र उपस्थित रहे, और बिजनौर में 103 छात्र अघोषित रूप से क्लास से गायब पाए गए—तो यह व्यवस्था पर सीधा कुठाराघात है।

सवाल व्यवस्था से: जब ‘प्रभारी मंत्री’ का डर खत्म, तो अनुशासन कहाँ?

बिजनौर की यह घटना महज शिक्षकों की गैरहाजिरी या छात्रों की कम उपस्थिति का सामान्य मामला नहीं है, बल्कि यह विभागीय मॉनिटरिंग की जमींदोज हो चुकी स्थिति को दर्शाता है:

  • विभाग भी उनका, जिला भी उनका: उत्तर प्रदेश की योगी सरकार में कौशल विकास और ITI का पूरा जिम्मा मंत्री कपिल देव अग्रवाल के कंधों पर है। जब विभागीय मंत्री के प्रभार वाले जिले में ही संस्थानों के मुखिया (प्रिंसिपल) बिना सूचना गायब रह सकते हैं, तो प्रदेश के बाकी 74 जिलों में क्या स्थिति होगी?
  • सरकारी बजट पर सवाल: राजकीय ITI में हर साल करोड़ों रुपये की ग्रांट, इंस्ट्रक्टर्स के वेतन और इंफ्रास्ट्रक्चर पर पानी की तरह पैसा बहाया जाता है। लेकिन धामपुर जैसे संस्थान में 91 में से महज 13 छात्रों का मिलना यह साबित करता है कि क्लासरूम सिर्फ कागजों पर चल रहे हैं।
  • केवल 1 दिन के वेतन कटौती से सुधरेगा ढर्रा?: कार्रवाई के नाम पर अनुपस्थित स्टाफ का 01 दिन का वेतन काटना और शो-कॉज नोटिस थमाना क्या काफी है? क्या ऐसी छोटी कार्यवाहियों से वर्षों से जमा सिस्टम का घुन खत्म हो पाएगा?

targetTvLive का बड़ा सवाल: क्या अन्य जनपदों में भगवान भरोसे है ITI?

बिजनौर में हुए इस औचक निरीक्षण ने पूरे उत्तर प्रदेश के तकनीकी शिक्षा ढांचे पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है। अगर प्रभारी मंत्री और खुद विभागीय मंत्री के गृह-क्षेत्र के पड़ोस और प्रभार वाले जिले में सरकारी तंत्र का यह बेपरवाह ढर्रा है, तो पूर्वांचल या बुंदेलखंड के सुदूर जिलों के ITI की हकीकत क्या होगी, इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।

अब देखना यह होगा कि इस खुलासे के बाद शासन-प्रशासन सिर्फ खानापूर्ति की विभागीय जांच तक सीमित रहता है या फिर कौशल विकास के नाम पर चल रहे इस ढर्रे में कोई ठोस और स्थायी सुधार का कदम उठाया जाता है।

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