बिजनौर में महिला सशक्तीकरण पर बड़ा फोकस: सुरक्षा से स्वरोजगार तक विजया रहाटकर ने तय की प्राथमिकताएं

बाल विवाह पर 2030 का लक्ष्य, कार्यस्थलों पर आंतरिक शिकायत समिति और योजनाओं के नियमित ऑडिट के निर्देश; स्वयं सहायता समूहों को ‘लखपति’ से ‘महा लखपति’ बनाने पर जोर

अवनीश त्यागी | TargetTvLive
बिजनौर। महिला सशक्तीकरण को सरकारी योजनाओं के आंकड़ों से निकालकर सुरक्षा, सम्मान और आर्थिक आत्मनिर्भरता से जोड़ने का संदेश बिजनौर में राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष श्रीमती विजया रहाटकर के दौरे में साफ दिखाई दिया। अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक में जहां महिला सुरक्षा और बाल विवाह जैसे मुद्दे केंद्र में रहे, वहीं स्वयं सहायता समूह की महिलाओं से संवाद में आर्थिक आत्मनिर्भरता को आगे बढ़ाने का रोडमैप सामने रखा गया।
कलेक्ट्रेट के महात्मा विदुर सभागार में पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ बैठक में आयोग की अध्यक्ष ने महिलाओं के स्वास्थ्य, पोषण, रोजगार और स्वरोजगार से जुड़ी योजनाओं की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के साथ नियमित समीक्षा और ऑडिट कराने के निर्देश दिए।

10 से अधिक कर्मचारियों वाले संस्थानों पर विशेष जोर
महिला सुरक्षा के मुद्दे पर अध्यक्ष ने स्कूल, विद्यालय, होटल और ऐसे संस्थानों में जहां 10 से अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं, संबंधित कानून के तहत आंतरिक शिकायत समिति गठित कराने के निर्देश दिए।
यह निर्देश इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि कार्यस्थल पर महिला सुरक्षा की व्यवस्था तभी प्रभावी हो सकती है जब शिकायतों के निस्तारण के लिए संस्थागत व्यवस्था भी मौजूद हो।
2030 तक बाल विवाह मुक्त भारत का लक्ष्य
विजया रहाटकर ने वर्ष 2030 तक भारत को बाल विवाह मुक्त बनाने के लक्ष्य का उल्लेख करते हुए इस दिशा में निर्धारित कार्य को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने के निर्देश दिए। साथ ही जिलाधिकारी की अध्यक्षता में प्रत्येक तिमाही जेंडर इक्विलिटी और महिला संबंधी विषयों की समीक्षा बैठक आयोजित करने को कहा।
महिला कल्याण योजनाओं की नियमित समीक्षा और ऑडिट पर जोर देकर उन्होंने योजनाओं के क्रियान्वयन की निगरानी मजबूत करने का संदेश दिया।
योजनाओं की सूची लंबी, अब नजर जमीनी असर पर
बैठक में प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना, सुकन्या समृद्धि योजना, वृद्धावस्था एवं विधवा पेंशन, मनरेगा, विभिन्न आवास योजनाएं, कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न से संरक्षण अधिनियम, घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम-2005 और वन स्टॉप सेंटर समेत विभिन्न योजनाओं एवं कार्यक्रमों की अद्यतन स्थिति प्रस्तुत की गई।
पुलिस और प्रशासन की ओर से पावरप्वाइंट प्रस्तुति के माध्यम से योजनाओं की जानकारी दी गई। अध्यक्ष ने संबंधित अधिकारियों को विभिन्न बिंदुओं पर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
‘लखपति दीदी’ से ‘महा लखपति दीदी’ का संदेश
इसके बाद चक्कर बायपास रोड स्थित जेवीएस रिजॉर्ट में स्वयं सहायता समूह की महिलाओं के साथ संवाद हुआ। यहां महिला सशक्तीकरण का आर्थिक पक्ष प्रमुखता से सामने आया।
आयोग की अध्यक्ष ने महिलाओं को ‘लखपति दीदी’ से ‘महा लखपति दीदी’ बनने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने स्वयं सहायता समूहों के रोजगार एवं कार्यों का विस्तार करने और दूसरी महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनाने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि यदि एक पुरुष शिक्षित होता है तो एक व्यक्ति शिक्षित होता है, लेकिन महिला शिक्षित होती है तो पूरी पीढ़ी शिक्षित होती है। महिला के सशक्त होने से पूरा परिवार सशक्त होता है।
‘विदुर ब्रांड’ ने खींचा ध्यान
विजया रहाटकर ने स्वयं सहायता समूहों के विदुर ब्रांड की सराहना की। उन्होंने महिलाओं से लगन और योजनाबद्ध तरीके से काम करने तथा अपने सपनों के साथ समझौता न करने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में विभिन्न स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं ने अपने अनुभव साझा किए। उत्कृष्ट कार्य करने वाली महिलाओं को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम से पहले अध्यक्ष ने परिसर में कैंटीन का उद्घाटन किया और स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों का अवलोकन किया।
TargetTvLive विश्लेषण: तीन मोर्चों पर महिला सशक्तीकरण की कसौटी
बिजनौर में आयोग की अध्यक्ष की बैठक और महिलाओं के साथ संवाद को एक साथ देखें तो महिला सशक्तीकरण का फोकस तीन स्तरों पर दिखाई देता है—सुरक्षा, सामाजिक बदलाव और आर्थिक मजबूती।
कार्यस्थल पर आंतरिक शिकायत समितियों की व्यवस्था महिला सुरक्षा से जुड़ी है। बाल विवाह के खिलाफ लक्ष्य सामाजिक बदलाव की दिशा में है, जबकि स्वयं सहायता समूहों को ‘लखपति’ से ‘महा लखपति’ बनाने की बात महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत करने की दिशा में है।
लेकिन इन लक्ष्यों की असली सफलता निर्देशों और बैठकों से आगे उनके धरातल पर क्रियान्वयन से तय होगी। नियमित समीक्षा और ऑडिट पर जोर इसी निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने की कोशिश के रूप में देखा जा सकता है।
यानी संदेश स्पष्ट है—महिला सशक्तीकरण सिर्फ योजना का लाभ देने तक सीमित नहीं, बल्कि महिला को सुरक्षित, आत्मनिर्भर और निर्णय लेने में सक्षम बनाने की प्रक्रिया है












