गंगा बैराज श्मशान घाट की बदलेगी तस्वीर! ₹40 लाख से कायाकल्प, अचानक पहुंचीं ADM तो खुली व्यवस्थाओं की परत

चार शेडों का जीर्णोद्धार, पेयजल और शौचालय भी होंगे दुरुस्त; अंशिका दीक्षित ने मौके पर परखी निर्माण की गुणवत्ता
रिपोर्ट: अवनीश त्यागी | TargetTvLive | बिजनौर
बिजनौर। गंगा बैराज का श्मशान घाट अब बदहाल व्यवस्थाओं की पहचान से बाहर निकलकर सुविधाओं से लैस नजर आएगा। नगर पालिका परिषद बिजनौर ने इसके कायाकल्प के लिए करीब ₹40 लाख की परियोजना तैयार की है। इसी काम की हकीकत जानने के लिए सोमवार सुबह अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) अंशिका दीक्षित अचानक गंगा बैराज स्थित श्मशान घाट पहुंच गईं।
एडीएम के औचक निरीक्षण से मौके पर मौजूद पालिका कर्मियों में हलचल मच गई। उन्होंने सिर्फ निर्माण की प्रगति ही नहीं देखी, बल्कि शेड, निर्माण सामग्री, शौचालय और पेयजल जैसी व्यवस्थाओं को भी मौके पर परखा।
चार शेडों पर सबसे ज्यादा फोकस
श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार के लिए बने चार शेडों के जीर्णोद्धार का कार्य परियोजना का प्रमुख हिस्सा है। निरीक्षण के दौरान एडीएम ने शेडों में किए जा रहे कार्य की स्थिति देखी और निर्माण सामग्री की गुणवत्ता तथा तकनीकी मानकों के संबंध में जानकारी ली।
उन्होंने संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि निर्माण कार्य केवल कागजों पर पूरा दिखना नहीं चाहिए, बल्कि उसकी गुणवत्ता जमीन पर भी दिखाई देनी चाहिए।
एडीएम का सख्त संदेश—गुणवत्ता से समझौता नहीं
निरीक्षण के दौरान अंशिका दीक्षित ने निर्माण कार्य में किसी भी तरह की लापरवाही को लेकर सख्त रुख अपनाया। उन्होंने साफ कहा कि गुणवत्ता में किसी भी स्तर पर कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
श्मशान घाट की संवेदनशीलता को देखते हुए उन्होंने यहां की व्यवस्थाओं को प्राथमिकता के साथ बेहतर करने के निर्देश दिए। खासतौर पर स्वच्छता और पेयजल व्यवस्था को दुरुस्त करने पर जोर दिया गया।
₹40 लाख में सिर्फ शेड नहीं, सुविधाओं का भी होगा विस्तार
नगर पालिका परिषद की अध्यक्ष इंदिरा सिंह के अनुसार करीब ₹40 लाख की लागत से श्मशान घाट में कई महत्वपूर्ण कार्य कराए जाएंगे।
प्रस्तावित प्रमुख कार्य—
- चार अंतिम संस्कार शेडों का जीर्णोद्धार/नए सिरे से निर्माण
- परिजनों के बैठने के लिए बेहतर व्यवस्था
- बारिश से बचाव के लिए मजबूत शेड
- स्वच्छ पेयजल की सुविधा
- आधुनिक शौचालय व्यवस्था
- घाट परिसर की सुविधाओं को अधिक व्यवस्थित करना
यानी परियोजना का मकसद केवल जर्जर ढांचे की मरम्मत करना नहीं, बल्कि अंतिम संस्कार के लिए आने वाले लोगों को सम्मानजनक और बुनियादी सुविधाओं वाला वातावरण उपलब्ध कराना है।
क्यों खास है गंगा बैराज का यह घाट?
गंगा बैराज बिजनौर का महत्वपूर्ण धार्मिक और सांस्कृतिक स्थल है। यहां बड़ी संख्या में लोग विभिन्न अवसरों पर पहुंचते हैं। अंतिम संस्कार के लिए भी इस क्षेत्र का इस्तेमाल होता है।
लंबे समय से घाट की सुविधाओं को लेकर सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में ₹40 लाख की परियोजना से स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि अब यहां बारिश, बैठने की जगह, पेयजल और शौचालय जैसी मूलभूत परेशानियां कम होंगी।
हालांकि, परियोजना की वास्तविक सफलता इस बात से तय होगी कि निर्माण पूरा होने के बाद सुविधाएं कितनी टिकाऊ और उपयोगी साबित होती हैं।
गंगा बैराज के सौंदर्यीकरण की दिशा में एक और कदम
नगर पालिका अध्यक्ष इंदिरा सिंह के मुताबिक गंगा बैराज क्षेत्र को बेहतर स्वरूप देने की दिशा में लगातार काम किया जा रहा है। क्षेत्र में स्थापित किया गया विशाल तिरंगा पहले ही लोगों के आकर्षण का केंद्र बना है।
अब श्मशान घाट के कायाकल्प को इसी व्यापक प्रयास की अगली कड़ी के तौर पर देखा जा रहा है।
औचक निरीक्षण ने बढ़ाई जवाबदेही
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे महत्वपूर्ण पहलू एडीएम प्रशासन का औचक निरीक्षण है। इससे निर्माण एजेंसी और संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही बढ़ी है।
सरकारी परियोजनाओं में अक्सर असली सवाल बजट से ज्यादा काम की गुणवत्ता और जमीन पर उसके असर का होता है। गंगा बैराज श्मशान घाट की परियोजना में भी यही कसौटी रहेगी—क्या ₹40 लाख का निवेश वास्तव में आम लोगों के लिए बेहतर सुविधाओं में बदल पाता है?
एडीएम के निर्देशों के बाद अब निगाहें निर्माण की गति और गुणवत्ता पर रहेंगी।
प्रशासन की निगरानी में बदलेगी तस्वीर?
गंगा बैराज श्मशान घाट के कायाकल्प की पहल ने उम्मीद जगाई है। चार शेडों से लेकर पेयजल और शौचालय तक सुविधाएं बेहतर होने की योजना है। अब चुनौती इसे समय पर, मानकों के अनुरूप और टिकाऊ तरीके से पूरा करने की है।
यदि परियोजना योजना के मुताबिक पूरी होती है तो यह केवल श्मशान घाट का जीर्णोद्धार नहीं होगा, बल्कि गंगा बैराज क्षेत्र में सार्वजनिक सुविधाओं के स्तर को बेहतर करने की दिशा में भी अहम कदम साबित हो सकता है।












