बिजनौर में मुकदमे को बनाया दबाव का हथियार? पुलिस ने कथित नेटवर्क की खोली परत, 5 गिरफ्तार
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TargetTvLive | स्पेशल इन्वेस्टिगेशन रिपोर्ट
रिपोर्ट: अवनीश त्यागी
बिजनौर | 7 सितंबर 2026
शिकायत से खुली ऐसी कहानी, जिसमें विवादों की जानकारी से लेकर गंभीर मुकदमों तक का कथित खेल सामने आया; मुख्य आरोपी समेत पांच गिरफ्तार
बिजनौर। किसी विवाद को सुलझाने के लिए कानून का सहारा लेना सामान्य बात है, लेकिन जब मुकदमा ही कथित तौर पर दबाव बनाने और आर्थिक लाभ हासिल करने का जरिया बन जाए, तो सवाल सिर्फ अपराध का नहीं, बल्कि कानून की प्रक्रिया के दुरुपयोग का भी खड़ा होता है।
बिजनौर पुलिस की ताजा कार्रवाई ने इसी तरह के एक कथित नेटवर्क की ओर इशारा किया है। थाना कोतवाली शहर पुलिस और स्वाट/सर्विलांस टीम की संयुक्त कार्रवाई में पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस की विवेचना में दावा किया गया है कि मुख्य आरोपी जुल्फेकार उर्फ बब्बू लांगड़ा कथित तौर पर एक संगठित गिरोह संचालित करता था, जो लोगों के आपसी विवाद, पुरानी रंजिश और अन्य मामलों की जानकारी जुटाकर उनके ऊपर दबाव बनाता था।
6 सितंबर की शिकायत बनी कार्रवाई की शुरुआत
पुलिस के मुताबिक घटनाक्रम की शुरुआत 6 सितंबर 2026 को हुई। मोहम्मद अहसान ने थाना कोतवाली शहर में तहरीर देकर आरोप लगाया कि कुछ लोगों द्वारा उसे झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी दी जा रही थी और मुकदमा वापस लेने के लिए रुपये की मांग की गई।
शिकायत के आधार पर थाना कोतवाली शहर में मु0अ0सं0 706/2026, धारा 61(2)/308(5) बीएनएस के तहत मुकदमा दर्ज किया गया। इसी प्रकरण से संबंधित एक अन्य मुकदमा थाना नूरपुर में भी दर्ज होने की बात पुलिस ने कही है।
इसके बाद 7 सितंबर 2026 को पुलिस ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपियों में जुल्फेकार उर्फ बब्बू लांगड़ा, अफजाल, गुड्डी, कुंती और प्रीति शामिल हैं। पुलिस के अनुसार विवेचना अभी जारी है।
पुलिस के अनुसार विवाद से लेकर मुकदमे तक बनती थी रणनीति
पुलिस की विवेचना में सामने आए कथित तौर-तरीके इस मामले को गंभीर बनाते हैं।
पुलिस के अनुसार गिरोह पहले अलग-अलग लोगों के आपसी विवाद, पुरानी रंजिश और अन्य मामलों की जानकारी हासिल करता था। इसके बाद संबंधित व्यक्ति पर प्रभाव और दबाव बनाने की कोशिश की जाती थी।
आरोप है कि मुकदमे में समझौता कराने के नाम पर धनराशि और अन्य अनुचित लाभ मांगा जाता था। मांग पूरी न होने पर महिलाओं और अन्य सहयोगियों के माध्यम से विभिन्न थानों और जनपदों में गंभीर प्रकृति के मुकदमे दर्ज कराने तथा न्यायालयों में परिवाद प्रस्तुत करने का दबाव बनाया जाता था।
यहीं से उठता है सबसे बड़ा सवाल
अगर पुलिस की विवेचना में लगाए गए आरोप आगे प्रमाणित होते हैं, तो मामला केवल पांच लोगों की गिरफ्तारी का नहीं रहेगा।
सबसे बड़ा सवाल यह होगा कि क्या मुकदमे दर्ज कराने की प्रक्रिया को कथित तौर पर आर्थिक दबाव का माध्यम बनाया जा रहा था?
और दूसरा सवाल—क्या अलग-अलग थानों और जनपदों में दर्ज मामलों के पीछे कोई आपसी समन्वय था?
इन सवालों का जवाब आगे की विवेचना और उपलब्ध साक्ष्यों से ही स्पष्ट होगा।
गंभीर धाराओं वाले मुकदमों का भी सामने आया जिक्र
पुलिस प्रेस नोट में गिरफ्तार आरोपियों से संबंधित कई पुराने मुकदमों और न्यायालयों में लंबित परिवादों का उल्लेख किया गया है। इनमें भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के साथ बलात्कार, सामूहिक दुष्कर्म, पॉक्सो एक्ट और एससी/एसटी एक्ट जैसी गंभीर धाराओं का उल्लेख भी है।
यहां एक महत्वपूर्ण कानूनी पहलू भी समझना जरूरी है—किसी व्यक्ति के खिलाफ मुकदमा दर्ज होना या किसी मामले में आरोपी होना अपने आप में अपराध सिद्ध नहीं करता। मामलों की वास्तविक स्थिति और आरोपों की सत्यता का अंतिम निर्धारण न्यायालय की प्रक्रिया में होता है।
कहानी का दूसरा सिरा: मुख्य आरोपी का आपराधिक इतिहास
पुलिस ने मुख्य आरोपी जुल्फेकार उर्फ बब्बू लांगड़ा का आपराधिक इतिहास भी जारी किया है।
प्रेस नोट के अनुसार उसके विरुद्ध बिजनौर के थाना कोतवाली शहर में वर्ष 2023 का एक मुकदमा धारा 120-B/323/386/420/447/467/468/471 आईपीसी के तहत दर्ज रहा है। इसके अतिरिक्त वर्ष 2006 में धारा 13 जी एक्ट तथा किरतपुर थाने में वर्ष 2003, 2004 और 2007 के मामलों का भी पुलिस ने उल्लेख किया है।
पांच गिरफ्तारियां… लेकिन जांच अभी बाकी
पुलिस ने पांच लोगों को गिरफ्तार कर कार्रवाई की शुरुआत जरूर कर दी है, लेकिन प्रेस नोट के अनुसार विवेचना अभी जारी है।
पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान यदि अन्य व्यक्तियों की भूमिका सामने आती है तो उनके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
यही बिंदु इस कार्रवाई को महत्वपूर्ण बनाता है। क्योंकि यदि पुलिस के दावों की पुष्टि साक्ष्यों से होती है, तो आगे की जांच में यह सामने आ सकता है कि कथित नेटवर्क में कौन-कौन लोग शामिल थे, किसकी क्या भूमिका थी और विभिन्न मुकदमों के बीच वास्तव में कोई संगठित कड़ी थी या नहीं।
पुलिस टीम ने की संयुक्त कार्रवाई
कार्रवाई में स्वाट टीम प्रभारी निरीक्षक सचिन मलिक, थाना कोतवाली शहर प्रभारी अवनीत मान, सर्विलांस सेल के उपनिरीक्षक शौकत अली, उपनिरीक्षक विपिन डेढ़ सहित स्वाट, सर्विलांस और थाना कोतवाली शहर की टीम शामिल रही।
TargetTvLive का विश्लेषण
यह मामला एक अहम सवाल छोड़ता है—कानून का इस्तेमाल न्याय पाने के लिए हो या किसी पर दबाव बनाने के लिए?
पुलिस की मौजूदा कार्रवाई में आरोपों की जांच अभी जारी है। इसलिए अंतिम निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। लेकिन पुलिस द्वारा सामने रखे गए तथ्य इतने गंभीर जरूर हैं कि आने वाले दिनों में इस मामले की विवेचना पर निगाह रहेगी।
अगर जांच में आरोप पुष्ट होते हैं, तो यह कार्रवाई उन लोगों के लिए भी बड़ा संदेश होगी जो कथित तौर पर मुकदमे, समझौते और कानूनी प्रक्रिया के बीच दबाव और आर्थिक लाभ का रास्ता तलाशते हैं।
TargetTvLive के लिए अवनीश त्यागी की रिपोर्ट।
डिस्क्लेमर: समाचार पुलिस द्वारा जारी प्रेस नोट में दर्ज आरोपों, विवेचना और उपलब्ध आधिकारिक विवरण पर आधारित है। आरोपों की अंतिम सत्यता एवं दोषसिद्धि का निर्णय सक्षम न्यायालय द्वारा किया जाना है।












