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जंगल में कटान, टाल तक पहुंची लकड़ी और फिर हुई कार्रवाई… साहुवाला रेंज में उठे बड़े सवाल

साहुवाला रेंज में यूकेलिप्टस कटान का मामला, टाल तक पहुंची लकड़ी; मुखबिर की सूचना पर वन विभाग ने की कार्रवाई

रिपोर्ट: अवनीश त्यागी TargetTvLive

बढ़ापुर/बिजनौर। नजीबाबाद वन प्रभाग की साहुवाला वन रेंज की खारी बीट में यूकेलिप्टस के पेड़ों के कटान का मामला सामने आया है। वन विभाग को मुखबिर से सूचना मिलने के बाद टीम ने कार्रवाई करते हुए अकबराबाद स्थित लकड़ी की टाल से लकड़ी को वापस कब्जे में लिया और उसे रेंज कार्यालय पहुंचाया। विभाग ने कटान स्थल की जांच भी की है।

मामले में यह तथ्य सामने आया है कि लकड़ी खारी बीट से काटे जाने के बाद अकबराबाद स्थित लकड़ी की टाल तक पहुंची थी। हालांकि, कटान में कितने पेड़ काटे गए, लकड़ी की वास्तविक कीमत कितनी है और इस पूरे मामले में कौन-कौन लोग शामिल हैं, इसकी अंतिम पुष्टि विभागीय जांच के बाद ही हो सकेगी।

पहले तथ्य समझिए: वन विभाग ने क्या पाया?

साहुवाला वन रेंज के रेंजर रामवृक्ष के अनुसार, खारी बीट से यूकेलिप्टस की लकड़ी काटे जाने की सूचना मुखबिर के माध्यम से मिली थी। सूचना के बाद वन विभाग की टीम सक्रिय हुई।

विभागीय कार्रवाई के दौरान लकड़ी को अकबराबाद स्थित लकड़ी की टाल से वापस लेकर रेंज कार्यालय लाया गया। इसके बाद वन विभाग की टीम ने उस स्थान की तलाश की, जहां से पेड़ों के कटान की बात सामने आई थी। रेंजर के अनुसार, जांच में खारी बीट के अंतर्गत कटान पाया गया।

रेंजर ने मुखबिर की सूचना के आधार पर आठ पेड़ों के कटान की जानकारी दिए जाने की बात कही है। हालांकि, वास्तविक कटान की संख्या और लकड़ी की मात्रा की आधिकारिक पुष्टि जांच एवं पैमाइश के बाद ही स्पष्ट होगी।

आरोप क्या हैं?

मामले में आरोप है कि आरक्षित वन क्षेत्र से यूकेलिप्टस के पेड़ों का अवैध रूप से कटान किया गया और उनकी लकड़ी को वन क्षेत्र से बाहर निकालकर अकबराबाद की लकड़ी की टाल तक पहुंचाया गया।

यह भी आरोप है कि लकड़ी को बिक्री के उद्देश्य से टाल पर पहुंचाया गया था। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही मानी जाएगी।

फिलहाल यह भी स्पष्ट किया जाना बाकी है कि लकड़ी काटने वाले कौन थे, लकड़ी किसके निर्देश पर टाल तक पहुंची और टाल संचालक की इस मामले में क्या भूमिका थी।

वन विभाग की निगरानी पर भी उठे सवाल

घटना के बाद वन विभाग की निगरानी व्यवस्था को लेकर सवाल जरूर खड़े हो रहे हैं। यदि आरक्षित वन क्षेत्र में पेड़ों का कटान हुआ और लकड़ी वहां से निकलकर वाहन के जरिए टाल तक पहुंच गई, तो विभागीय गश्त के दौरान इसकी जानकारी क्यों नहीं हो सकी?

हालांकि, इस सवाल का जवाब संबंधित अधिकारियों की जांच और विभागीय रिपोर्ट से ही सामने आ सकेगा।

रेंजर बोले—स्टाफ और संसाधनों की कमी

साहुवाला वन रेंज के रेंजर रामवृक्ष ने बताया कि वन क्षेत्र में स्टाफ और संसाधनों की कमी है। इसके बावजूद विभाग अपनी ओर से बेहतर कार्य करने का प्रयास कर रहा है।

रेंजर के अनुसार, मुखबिर की सूचना मिलने के बाद विभाग ने तत्काल कार्रवाई की और लकड़ी को कब्जे में लिया गया।

अब जांच में इन सवालों के जवाब जरूरी

इस पूरे मामले में विभागीय जांच के दौरान कई बिंदु महत्वपूर्ण होंगे—

• वास्तव में कितने पेड़ काटे गए?
• काटी गई लकड़ी की कुल मात्रा कितनी है?
• लकड़ी की अनुमानित/आधिकारिक कीमत कितनी है?
• कटान किस तारीख को किया गया?
• लकड़ी को जंगल से बाहर किस वाहन से निकाला गया?
• अकबराबाद की टाल तक लकड़ी किसके माध्यम से पहुंची?
• टाल संचालक के पास लकड़ी से संबंधित कोई वैध दस्तावेज था या नहीं?
• कटान और परिवहन में शामिल लोगों की पहचान हुई या नहीं?

आठ पेड़ों की सूचना, लेकिन पूरी तस्वीर जांच से होगी साफ

रेंजर द्वारा आठ पेड़ों के कटान की सूचना मिलने की बात कही गई है। ऐसे में अब विभाग के सामने सबसे महत्वपूर्ण कार्य कटान स्थल की विधिवत पैमाइश और बरामद लकड़ी का मिलान करना होगा।

यदि जांच में आठ से अधिक पेड़ों का कटान सामने आता है, तो कटान की वास्तविक मात्रा और नुकसान का आकलन भी उसी आधार पर करना होगा।

कार्रवाई के बाद भी निगाह जांच के नतीजे पर

साहुवाला वन रेंज में सामने आया यह मामला फिलहाल वन विभाग की कार्रवाई और जांच के स्तर पर है। लकड़ी की बरामदगी के बाद अगला महत्वपूर्ण कदम यह होगा कि विभाग कटान के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान करता है या नहीं और मामले में नियमानुसार क्या कार्रवाई की जाती है।

फिलहाल इतना स्पष्ट है कि मुखबिर की सूचना के बाद वन विभाग ने लकड़ी को कब्जे में लिया और कटान स्थल की जांच शुरू की। वहीं, अवैध कटान से जुड़े बाकी आरोपों और जिम्मेदार लोगों की भूमिका की पुष्टि आधिकारिक जांच के बाद ही हो सकेगी।

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