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जेल की दीवारों के भीतर दिखी इंसानियत की बड़ी तस्वीर, बंदियों से लेकर जेलकर्मियों तक का हुआ मेगा हेल्थ चेकअप

जेल की दीवारों के भीतर दिखी इंसानियत की बड़ी तस्वीर, बंदियों से लेकर जेलकर्मियों तक का हुआ मेगा हेल्थ चेकअप

अवनीश त्यागी | TargetTvLive

बिजनौर। जिला कारागार की ऊंची दीवारों के भीतर रविवार को इंसानियत, स्वास्थ्य सेवा और सामाजिक सरोकार की ऐसी तस्वीर सामने आई, जिसने आयोजन को सामान्य चिकित्सा शिविर से कहीं आगे खड़ा कर दिया। लायन्स क्लब बिजनौर और लायनेस क्लब बिजनौर के संयुक्त प्रयास से जिला कारागार में विशाल चिकित्सा शिविर लगाया गया। इसमें विभिन्न रोगों के विशेषज्ञ चिकित्सकों ने बंदियों और कारागार कर्मियों की जांच कर उन्हें उपचार संबंधी सलाह दी और आवश्यक दवाएं भी उपलब्ध कराईं।

एक परिसर में जुटे कई रोगों के विशेषज्ञ

शिविर में नाक-कान-गला, आंख, त्वचा, हृदय, हड्डी, दंत रोग और सामान्य चिकित्सा समेत विभिन्न विशेषज्ञों ने अपनी सेवाएं दीं। इसके अलावा क्लीनिकल पैथोलॉजी का स्टॉल भी लगाया गया, जिससे जरूरत के अनुसार जांच की सुविधा मिल सकी।

बंदियों और जेल कर्मचारियों की स्वास्थ्य समस्याओं को चिकित्सकों ने गंभीरता से सुना। जांच के बाद रोग के अनुरूप उपचार, सावधानियों और आगे की चिकित्सा को लेकर आवश्यक परामर्श दिया गया। जरूरतमंदों को दवाओं का वितरण भी किया गया।

स्वास्थ्य सेवा के साथ संवेदना का संदेश

इस शिविर की खास बात केवल विशेषज्ञ चिकित्सकों की मौजूदगी नहीं रही। आयोजन में महिला बंदियों और उनके साथ रह रहे बच्चों का भी विशेष ध्यान रखा गया। लायनेस क्लब की ओर से महिला बंदियों को साड़ियां तथा बच्चों को ब्रांडेड कपड़े वितरित किए गए।

यह पहल इस बात का संदेश देती नजर आई कि सामाजिक सेवा का दायरा समाज की मुख्यधारा तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि जरूरतमंद हर व्यक्ति तक मानवीय सहयोग पहुंचना चाहिए।

डीएम और एसपी ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया शुभारंभ

विशाल चिकित्सा शिविर का शुभारंभ जिलाधिकारी जसजीत कौर और पुलिस अधीक्षक के.के. विश्नोई ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। उनके साथ लायन्स क्लब बिजनौर के अध्यक्ष पीयूष कुमार, लायनेस क्लब बिजनौर की अध्यक्षा प्रतिभा सिंह तथा क्लब के अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।

अधिकारियों ने शिविर में उपलब्ध कराई जा रही स्वास्थ्य सेवाओं का अवलोकन किया। इस दौरान आयोजन से जुड़े पदाधिकारियों और चिकित्सकों ने बंदियों एवं कारागार कर्मियों को दी जा रही सुविधाओं की जानकारी भी दी।

जेल के भीतर स्वास्थ्य को लेकर बड़ी पहल

जिला कारागार जैसे संस्थान में इस प्रकार के बहु-विशेषज्ञ चिकित्सा शिविर का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि यहां बड़ी संख्या में लोग एक ही परिसर में रहते हैं। ऐसे में नियमित स्वास्थ्य जांच, बीमारी की पहचान और समय पर चिकित्सकीय सलाह न केवल संबंधित व्यक्ति के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि सामूहिक स्वास्थ्य व्यवस्था की दृष्टि से भी अहम है।

इस लिहाज से यह शिविर इलाज के साथ बीमारी की पहचान और स्वास्थ्य जागरूकता की दिशा में भी उपयोगी पहल के रूप में सामने आया।

गणतंत्र दिवस पर फिर लगेगा महा चिकित्सा शिविर

कार्यक्रम के दौरान लायन्स क्लब और लायनेस क्लब की ओर से एक महत्वपूर्ण घोषणा भी की गई। संस्थाओं ने बताया कि अगले वर्ष 26 जनवरी गणतंत्र दिवस के अवसर पर जिला कारागार में इसी तरह का भव्य महा चिकित्सा शिविर दोबारा आयोजित किया जाएगा।

इस घोषणा से साफ है कि सामाजिक संस्थाएं इस सेवा गतिविधि को केवल एक आयोजन तक सीमित रखने के बजाय इसे निरंतरता देने की दिशा में आगे बढ़ना चाहती हैं।

जेल अधीक्षक ने संस्थाओं का जताया आभार

कार्यक्रम के समापन पर जेल अधीक्षक राजेश कुमार सिंह ने चिकित्सा शिविर के आयोजन के लिए लायन्स क्लब और लायनेस क्लब के पदाधिकारियों का अभिनंदन किया। उन्होंने संस्थाओं के प्रति आभार व्यक्त करते हुए इस पहल को बंदियों और कारागार कर्मियों के लिए उपयोगी बताया।

क्यों खास रहा यह शिविर?

  • बंदियों और कारागार कर्मियों की स्वास्थ्य जांच
  • कई विशेषज्ञ चिकित्सकों ने दी सेवाएं
  • क्लीनिकल पैथोलॉजी जांच की सुविधा
  • जरूरतमंदों को आवश्यक दवाओं का वितरण
  • महिला बंदियों को साड़ियां और बच्चों को कपड़े
  • अगले वर्ष 26 जनवरी को फिर महा चिकित्सा शिविर लगाने की घोषणा

TargetTvLive की विशेष रिपोर्ट

जिला कारागार में आयोजित यह चिकित्सा शिविर एक अहम संदेश छोड़ गया—स्वास्थ्य सेवा का अधिकार समाज के हर वर्ग तक पहुंचना चाहिए। बंदियों के लिए चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के साथ महिला बंदियों और बच्चों के प्रति संवेदनशीलता दिखाना इस आयोजन को और मानवीय बनाता है।

ऐसे प्रयास जेल की चारदीवारी के भीतर रहने वाले लोगों को यह भरोसा देते हैं कि समाज उनसे पूरी तरह विमुख नहीं हुआ है। चिकित्सा सेवा, दवा और मानवीय सहयोग का यह संगम सामाजिक जिम्मेदारी की एक सकारात्मक मिसाल बनकर सामने आय

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