हरेला पर्व पर हरियाली का संकल्प: देवभूमि पहल समिति ने लगाए फलदार और औषधीय पौधे, दिया प्रकृति संरक्षण का संदेश
TargetTvLive | कोटद्वार (उत्तराखंड) | अवनीश त्यागी
उत्तराखंड की संस्कृति और प्रकृति का अद्भुत संगम हरेला पर्व एक बार फिर पर्यावरण संरक्षण का सशक्त संदेश लेकर सामने आया है। हरेला पर्व सप्ताह के अवसर पर देवभूमि पहल समिति उत्तराखंड ने हरिसिंहपुर और बालसोड में व्यापक पौधारोपण अभियान चलाकर ‘हरित उत्तराखंड’ के संकल्प को नई ऊर्जा प्रदान की।
इस अभियान की सबसे खास बात यह रही कि समिति ने केवल पौधे लगाने तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि उनके संरक्षण और संवर्धन का भी संकल्प लिया। कार्यक्रम के दौरान आम, लीची, अमरूद, आंवला, हरड़, बहेड़ा, कंचनार, नीम और गुलमोहर सहित कई फलदार एवं औषधीय पौधों का रोपण किया गया। ये पौधे आने वाले वर्षों में न केवल पर्यावरण को शुद्ध करेंगे, बल्कि मानव स्वास्थ्य और जैव विविधता के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
हरेला पर्व नहीं, प्रकृति के प्रति हमारी जिम्मेदारी है
देवभूमि पहल समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि हरेला केवल एक पारंपरिक पर्व नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति हमारी जिम्मेदारी का प्रतीक है। पौधे लगाना एक अच्छी शुरुआत है, लेकिन उनकी नियमित देखभाल और संरक्षण ही इस अभियान की वास्तविक सफलता होगी। जब तक लगाया गया पौधा एक विशाल वृक्ष का रूप नहीं ले लेता, तब तक हमारी जिम्मेदारी समाप्त नहीं होती।
युवाओं ने दिया हरित उत्तराखंड का संदेश
इस अवसर पर समिति के अध्यक्ष शिवम नेगी, महासचिव उत्कर्ष नेगी, कार्यकारिणी सदस्य नैन्सी रावत और अभय जुयाल सहित स्वयंसेवक दीपक मैंदोला, याशिका जाखवाल, रोहित कुमार और हर्षित ने पूरे उत्साह के साथ पौधारोपण किया। युवाओं की सक्रिय भागीदारी यह संदेश देती है कि पर्यावरण संरक्षण के इस अभियान को समाज का व्यापक समर्थन मिल रहा है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह पहल?
आज दुनिया जलवायु परिवर्तन, बढ़ते प्रदूषण और घटते हरित क्षेत्र जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है। ऐसे समय में हरेला पर्व जैसे अभियान केवल सांस्कृतिक परंपरा को जीवित नहीं रखते, बल्कि प्रकृति और मानव जीवन के बीच संतुलन बनाए रखने की प्रेरणा भी देते हैं। यदि प्रत्येक व्यक्ति वर्ष में केवल एक पौधा लगाकर उसके संरक्षण का संकल्प ले ले, तो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा बदलाव संभव है।
TargetTvLive विशेष
उत्तराखंड को देवभूमि कहा जाता है और इसकी पहचान यहां के जंगलों, नदियों और प्राकृतिक संपदा से है। यदि हम प्रकृति को संरक्षित नहीं रख पाए, तो आने वाली पीढ़ियों को इसका बड़ा मूल्य चुकाना पड़ सकता है। देवभूमि पहल समिति का यह प्रयास केवल पौधारोपण कार्यक्रम नहीं, बल्कि समाज को प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का अहसास कराने वाला एक प्रेरणादायी अभियान है। आज आवश्यकता इस बात की है कि हर व्यक्ति ‘एक पौधा–एक जीवन’ के इस संदेश को अपने जीवन का हिस्सा बनाए।
एक पौधा – एक जीवन, एक संकल्प – हरित उत्तराखंड
हरेला पर्व हमें यही सिखाता है कि प्रकृति से हमारा रिश्ता केवल लेने का नहीं, बल्कि उसे सहेजने और संवारने का भी है। आइए, हम सभी मिलकर एक पौधा लगाएं, उसका संरक्षण करें और हरित उत्तराखंड के निर्माण में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें।
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