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“किसानों की कमाई बढ़ाने का नया फॉर्मूला! बिजनौर में मक्का और प्राकृतिक खेती पर बड़ा जोर”

गन्ने की जगह मक्का? बिजनौर के कृषि मेले से किसानों को मिला बड़ा संदेश, प्राकृतिक खेती पर सरकार का खास फोकस

950 किसानों की मौजूदगी में कृषि मेले का आयोजन, प्रगतिशील किसानों का सम्मान, नई तकनीकों और कम लागत वाली खेती पर जोर
रिपोर्ट: अवनीश त्यागी | TargetTvLive

बिजनौर। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गन्ना बेल्ट में अब मक्का की चर्चा तेज होने लगी है। बिजनौर में आयोजित जनपद स्तरीय खरीफ उत्पादकता गोष्ठी-2026, त्वरित मक्का विकास कार्यक्रम और प्राकृतिक खेती कार्यशाला में सरकार ने किसानों को साफ संदेश दिया कि बदलते समय के साथ खेती के तौर-तरीकों में बदलाव जरूरी है। मक्का उत्पादन बढ़ाने, प्राकृतिक खेती अपनाने और आधुनिक तकनीकों के उपयोग पर विशेष जोर दिया गया।

इंदिरा बाल भवन में आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में लगभग 950 किसानों ने भाग लिया। कार्यक्रम का उद्घाटन उत्तर प्रदेश सरकार के स्वतंत्र प्रभार राज्य मंत्री एवं जनपद प्रभारी मंत्री कपिल देव अग्रवाल ने किया। उनके साथ जिला पंचायत अध्यक्ष साकेंद्र प्रताप सिंह, भाजपा जिलाध्यक्ष भूपेंद्र चौहान (बॉबी) और वरिष्ठ भाजपा नेता ऐश्वर्य मौसम चौधरी भी मौजूद रहे।

मंत्री बोले- मक्का बन सकता है किसानों की कमाई का नया जरिया

अपने संबोधन में प्रभारी मंत्री कपिल देव अग्रवाल ने कहा कि आज का किसान पहले से अधिक जागरूक और तकनीकी रूप से सक्षम हो रहा है। उन्होंने किसानों से मक्का उत्पादन और मक्का बीज उत्पादन बढ़ाने का आह्वान करते हुए कहा कि आने वाले समय में मक्का किसानों की आय बढ़ाने का मजबूत माध्यम बन सकता है।

उन्होंने कहा कि लगातार बढ़ती खेती की लागत और बदलते मौसम को देखते हुए किसानों को ऐसी फसलों की ओर भी ध्यान देना चाहिए जो कम समय में बेहतर लाभ दे सकें। मक्का ऐसी ही संभावनाओं वाली फसल है।

प्राकृतिक खेती पर सरकार का बढ़ता भरोसा

कार्यक्रम में प्राकृतिक खेती सबसे प्रमुख विषयों में रही। जिलाधिकारी जसजीत कौर ने किसानों से रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने और प्राकृतिक खेती को अपनाने की अपील की।

उन्होंने कहा कि गन्ने के साथ दलहन और तिलहन की सहफसली खेती किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने में भी मददगार साबित हो सकती है। उन्होंने कृषि अधिकारियों को निर्देश दिए कि सफल किसानों के अनुभव गांव-गांव तक पहुंचाए जाएं ताकि अन्य किसान भी उनसे प्रेरणा लेकर नई तकनीक अपना सकें।

किसानों को मिली नई तकनीकों की जानकारी

कृषि विज्ञान केंद्र की वैज्ञानिक डॉ. शिवांगी और डॉ. प्रतिमा गुप्ता ने किसानों को ड्रैगन फ्रूट, मशरूम उत्पादन, बागवानी, रोग एवं कीट प्रबंधन तथा आधुनिक कृषि तकनीकों की विस्तृत जानकारी दी।

विशेषज्ञों ने बताया कि पारंपरिक खेती के साथ-साथ बागवानी और वैकल्पिक कृषि गतिविधियां किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

कृषि मेले में योजनाओं और तकनीकों का प्रदर्शन

कार्यक्रम के दौरान कृषि, उद्यान, पशुपालन, मत्स्य विभाग, कृषि विज्ञान केंद्र तथा निजी कंपनियों द्वारा लगाए गए स्टॉल किसानों के आकर्षण का केंद्र रहे। किसानों ने विभिन्न योजनाओं, कृषि यंत्रों और आधुनिक तकनीकों की जानकारी प्राप्त की।

इस अवसर पर कृषि क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले कई प्रगतिशील किसानों को प्रशस्ति-पत्र देकर सम्मानित भी किया गया। इससे किसानों में नई तकनीकों को अपनाने और बेहतर प्रदर्शन करने की प्रेरणा देखने को मिली।

TargetTvLive Analysis: क्या बदलने वाली है बिजनौर की खेती?

बिजनौर की पहचान वर्षों से गन्ना उत्पादक जिले के रूप में रही है। लेकिन अब सरकारी मंचों पर मक्का, प्राकृतिक खेती और फसल विविधीकरण की बढ़ती चर्चा यह संकेत दे रही है कि कृषि क्षेत्र में बदलाव की नई तैयारी चल रही है।

विशेषज्ञ मानते हैं कि बढ़ती लागत, जल संकट और बाजार की चुनौतियों के बीच किसानों को एक ही फसल पर निर्भर रहने के बजाय कई विकल्प अपनाने होंगे। यदि किसानों को प्रशिक्षण, बाजार और सरकारी योजनाओं का लाभ सही समय पर मिलता रहा तो मक्का और प्राकृतिक खेती आने वाले वर्षों में कृषि की तस्वीर बदल सकती है।

बिजनौर का यह कृषि मेला केवल एक सरकारी आयोजन नहीं बल्कि किसानों को भविष्य की खेती के लिए तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ है।

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