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“सिसौली बना ‘नेचुरल फार्मिंग हब’: पालेकर मॉडल से बदलेगी खेती की तस्वीर

“सिसौली बना ‘नेचुरल फार्मिंग हब’: पालेकर मॉडल से बदलेगी खेती की तस्वीर

डॉ. सुभाष पालेकर के मार्गदर्शन में 4 दिवसीय प्रशिक्षण शिविर सम्पन्न किसानों का ऐतिहासिक उत्साह

पूरी खबर (TargetTvLive Exclusive Digital Report)

बिजनौर/सिसौली | TargetTvLive:
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सिसौली में आयोजित पालेकर प्राकृतिक खेती प्रशिक्षण शिविर ने किसानों के बीच नई कृषि क्रांति की नींव रख दी है। TargetTvLive की ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, किसान अब रासायनिक खेती से दूरी बनाकर प्राकृतिक खेती को अपनाने के लिए तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।

चार दिनों तक चले इस विशेष प्रशिक्षण शिविर का समापन बेहद भव्य और उत्साहपूर्ण माहौल में हुआ। शिविर का मार्गदर्शन प्राकृतिक खेती के जनक माने जाने वाले डॉ. सुभाष पालेकर ने किया, जिन्होंने किसानों को “जीरो बजट नेचुरल फार्मिंग” के सिद्धांतों और उसके व्यावहारिक प्रयोगों की गहराई से जानकारी दी।

TargetTvLive ग्राउंड रिपोर्ट: किसानों में दिखा बदलाव का जज़्बा

TargetTvLive टीम ने मौके पर मौजूद किसानों से बातचीत की, जिसमें सामने आया कि:

  • ✔️ किसान अब रासायनिक खाद और कीटनाशकों से होने वाले नुकसान को समझने लगे हैं
  • ✔️ प्राकृतिक खेती को कम लागत और अधिक लाभ का विकल्प मान रहे हैं
  • ✔️ कई किसानों ने तुरंत अपने खेतों में इस मॉडल को लागू करने का निर्णय लिया

एक किसान ने कहा— “अब खेती सिर्फ उत्पादन नहीं, सेहत और पर्यावरण का सवाल भी है।”

सम्मान समारोह: किसानों के प्रेरणास्रोत बने स्थानीय नेता

समापन समारोह में जिला बिजनौर के जिला अध्यक्ष सुनील प्रधान को भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत, ओमपाल सिंह मलिक और राजवीर सिंह चौहान द्वारा प्रशस्ति पत्र एवं प्रशिक्षण प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया।

यह सम्मान समारोह किसानों के बीच नेतृत्व और समर्पण का प्रतीक बनकर उभरा, जिसकी झलक TargetTvLive की रिपोर्टिंग में भी स्पष्ट दिखी।

विश्लेषण: क्या पालेकर मॉडल बनेगा खेती का भविष्य?

TargetTvLive के कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, पालेकर प्राकृतिक खेती मॉडल भारत में खेती के संकट का एक प्रभावी समाधान बन सकता है।

👉 क्यों खास है यह मॉडल?

  •  लागत लगभग शून्य (Zero Budget Concept)
  •  मिट्टी की उर्वरता में प्राकृतिक वृद्धि
  • पर्यावरण संरक्षण और जैव विविधता को बढ़ावा
  •  किसान की आत्मनिर्भरता में वृद्धि

विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि सरकार और किसान मिलकर इस दिशा में काम करें, तो आने वाले वर्षों में भारत की कृषि व्यवस्था में बड़ा बदलाव संभव है।

 किसानों का संकल्प: “अब बदलेंगे खेती के तरीके”

शिविर में शामिल सैकड़ों किसानों ने सामूहिक रूप से प्राकृतिक खेती अपनाने का संकल्प लिया। यह संकेत है कि आने वाले समय में बिजनौर समेत पूरे पश्चिमी यूपी में खेती का ट्रेंड बदल सकता है।

निष्कर्ष (TargetTvLive Verdict)

TargetTvLive के अनुसार, सिसौली का यह प्रशिक्षण शिविर केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि “कृषि परिवर्तन आंदोलन” की शुरुआत है। यदि यह मॉडल जमीनी स्तर पर सफल होता है, तो यह किसानों की आय, स्वास्थ्य और पर्यावरण—तीनों के लिए गेमचेंजर साबित हो सकता है।

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