“जांच पूरी… रिपोर्ट तैयार… फिर भी कार्रवाई शून्य!” — DDO विवाद पर भड़के कर्मचारी, DM से लगाई गुहार, आंदोलन की उलटी गिनती शुरू
📍 बिजनौर से बड़ी खबर | प्रशासन बनाम कर्मचारी टकराव तेज
बिजनौर में जिला विकास अधिकारी (DDO) से जुड़ा विवाद अब एक साधारण प्रशासनिक मामला नहीं रहा, बल्कि पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल बन गया है। एक तरफ जहां जांच पूरी होकर रिपोर्ट शासन तक पहुंच चुकी है, वहीं दूसरी ओर कार्रवाई न होने से कर्मचारियों का गुस्सा फूट पड़ा है।
इसी कड़ी में अब राज्य संयुक्त कर्मचारी संघ के पदाधिकारियों ने जिलाधिकारी से मुलाकात कर उत्पीड़नात्मक कार्रवाई की शिकायत करते हुए तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
EXCLUSIVE: जांच हुई, रिपोर्ट गई… फिर क्यों अटका फैसला?
इस पूरे प्रकरण में सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि—
✔️ जिलाधिकारी द्वारा गठित 3 सदस्यीय जांच समिति अपनी रिपोर्ट शासन को सौंप चुकी है
✔️ मंडलायुक्त के निर्देश पर CDO बिजनौर द्वारा अलग से जांच भी पूरी हो चुकी है
✔️ दोनों रिपोर्टें शासन स्तर पर लंबित हैं
👉 सबसे बड़ा सवाल:
जब जांच पूरी हो चुकी है, तो कार्रवाई क्यों नहीं?
कर्मचारियों के गंभीर आरोप: ‘द्वेषपूर्ण कार्रवाई’
कर्मचारी संगठनों का आरोप है कि—
- नीतू चौधरी को बिना ठोस कारण निलंबित किया गया
- राजीव त्यागी को प्रतिकूल प्रविष्टि दी गई
- मृतक कर्मचारी अनुराग की पत्नी की पेंशन अब तक लंबित
👉 इन सभी मामलों को कर्मचारी संगठन द्वेष भावना से प्रेरित कार्रवाई बता रहा है।
👉 इससे विभागीय माहौल में तनाव और असंतोष चरम पर पहुंच गया है।
CDO से लेकर DM तक गुहार, लेकिन समाधान गायब
पहले कर्मचारी नेताओं राकेश शर्मा और धीरज सिंह के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने
मुख्य विकास अधिकारी रणविजय सिंह से मुलाकात की।
➡️ CDO ने जल्द निस्तारण का आश्वासन दिया
➡️ लेकिन जमीनी हकीकत: अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं
अब इसी मुद्दे को लेकर कर्मचारी संघ ने जिलाधिकारी से सीधे शिकायत की है और उत्पीड़नात्मक कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की है।
टाइमलाइन: कैसे बढ़ा विवाद?
- 12 मार्च 2026 – पहली बार कर्मचारियों ने मुद्दा उठाया
- जांच समितियों का गठन – DM और मंडलायुक्त स्तर पर
- जांच पूरी, रिपोर्ट शासन को भेजी गई
- लंबा इंतजार – कोई निर्णय नहीं
- अब – कर्मचारी आंदोलन की चेतावनी
“अब बर्दाश्त नहीं” — आंदोलन की चेतावनी
कर्मचारी महासंघ ने साफ कहा—
“जब जांच पूरी हो चुकी है और रिपोर्ट शासन के पास है, तो कार्रवाई में देरी अस्वीकार्य है।”
👉 सूत्रों के मुताबिक:
धरना-प्रदर्शन से लेकर बड़े स्तर के आंदोलन की रणनीति तैयार की जा रही है।
❗ बड़े सवाल: देरी या दबाव?
यह मामला कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है—
- ❓ क्या शासन स्तर पर फाइलें जानबूझकर रोकी जा रही हैं?
- ❓ क्या जांच रिपोर्टों पर कार्रवाई टालने का दबाव है?
- ❓ क्या मामला प्रशासनिक या राजनीतिक हस्तक्षेप का शिकार है?
👉 इन सवालों के जवाब अब तक सामने नहीं आए हैं।
ग्राउंड इम्पैक्ट: जनता पर भी पड़ेगा असर
यदि विवाद बढ़ता है, तो—
- विकास कार्य प्रभावित होंगे
- सरकारी योजनाओं की रफ्तार धीमी पड़ेगी
- कर्मचारी-प्रशासन टकराव बढ़ेगा
👉 यानी इसका सीधा असर आम जनता पर भी पड़ेगा।
विश्लेषण: ‘जांच बनाम न्याय’ की जंग
बिजनौर का यह मामला अब एक उदाहरण बनता जा रहा है कि—
👉 जांच पूरी होने के बावजूद न्याय में देरी कैसे होती है
कर्मचारियों का बढ़ता आक्रोश और शासन की चुप्पी साफ संकेत दे रही है—
⚠️ यदि जल्द फैसला नहीं हुआ, तो यह विवाद बड़ा आंदोलन बन सकता है।
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