होली से पहले फूटा मनरेगा कर्मियों का गुस्सा: 6 माह से नहीं मिला मानदेय, मुख्यमंत्री से लगाई गुहार
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बिजनौर | अवनीश त्यागी की विशेष रिपोर्ट
होली जैसे बड़े त्योहार से ठीक पहले उत्तर प्रदेश के बिजनौर जनपद में मनरेगा कर्मियों का आक्रोश खुलकर सामने आ गया है। पिछले 6 महीनों से मानदेय न मिलने से आर्थिक संकट झेल रहे कर्मियों ने अब मुख्यमंत्री से सीधे हस्तक्षेप की मांग की है। मनरेगा इंजीनियर्स एसोसिएशन, बिजनौर ने इस संबंध में एक औपचारिक पत्र भेजकर होली से पहले हर हाल में भुगतान सुनिश्चित कराने की अपील की है।
स्थिति यह है कि दीपावली के बाद अब होली भी बिना वेतन के गुजरने का खतरा मंडरा रहा है, जिससे कर्मियों और उनके परिवारों के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
6 माह से वेतन बंद, त्योहार फीके पड़ने का खतरा
एसोसिएशन के अनुसार, जनपद के ग्राम रोजगार सेवक, अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी और तकनीकी सहायक सहित सभी मनरेगा कर्मियों का मानदेय पिछले छह महीनों से लंबित है।
त्योहारों के इस मौसम में वेतन न मिलने से कर्मियों की परेशानी कई गुना बढ़ गई है। दीपावली पर भी भुगतान नहीं हुआ था और अब होली पर भी वही स्थिति बनने की आशंका है।
विश्लेषण:
ग्रामीण विकास की रीढ़ माने जाने वाले मनरेगा तंत्र में काम करने वाले कर्मियों का वेतन रुकना, योजना के संचालन और गुणवत्ता दोनों पर सीधा असर डाल सकता है।
आर्थिक संकट का सीधा असर काम पर
पत्र में स्पष्ट कहा गया है कि लगातार वेतन न मिलने से कर्मियों की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर हो चुकी है। कई कर्मी पारिवारिक जिम्मेदारियां निभाने में असमर्थ हो रहे हैं।
विशेषज्ञ मानते हैं कि जब फील्ड स्तर के कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति खराब होती है, तो इसका असर योजना के क्रियान्वयन, मॉनिटरिंग और पारदर्शिता पर भी पड़ता है।
लक्ष्य से अधिक काम, फिर भी भुगतान नहीं
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि बिजनौर के मनरेगा कर्मियों ने लक्ष्य से अधिक मानव दिवस सृजित किए, जिसकी प्रशंसा खुद उपमुख्यमंत्री द्वारा की जा चुकी है।
यानी प्रदर्शन बेहतर, लेकिन भुगतान शून्य — यह प्रशासनिक विरोधाभास कई सवाल खड़े करता है।
एसोसिएशन की मुख्य मांगें
मनरेगा इंजीनियर्स एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री से तीन प्रमुख मांगें रखी हैं:
- ✅ होली से पहले हर हाल में लंबित मानदेय का भुगतान
- ✅ वित्तीय वर्ष 2025–26 समाप्त होने से पहले ईएफएमएस के माध्यम से भुगतान जारी करना
- ✅ लंबित भुगतान की समस्या का स्थायी समाधान
बड़ा सवाल: क्या होली से पहले मिलेगा भुगतान?
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या सरकार होली से पहले मनरेगा कर्मियों को राहत दे पाएगी या एक और त्योहार बिना वेतन के गुजर जाएगा।
अगर जल्द समाधान नहीं हुआ तो आने वाले समय में यह मुद्दा बड़े आंदोलन का रूप भी ले सकता है।
ग्राउंड रियलिटी: क्यों गंभीर है मामला
- मनरेगा ग्रामीण अर्थव्यवस्था की लाइफलाइन है
- फील्ड कर्मियों पर ही योजना की सफलता निर्भर
- लगातार भुगतान रुकना सिस्टम की बड़ी खामी का संकेत
- इससे योजना की गति प्रभावित होने का खतरा
निष्कर्ष
बिजनौर में मनरेगा कर्मियों का यह मामला सिर्फ वेतन का नहीं, बल्कि ग्रामीण विकास की सबसे महत्वपूर्ण योजना की जमीनी हकीकत को उजागर करता है।
होली जैसे त्योहार से पहले अगर भुगतान नहीं हुआ, तो यह न सिर्फ कर्मियों बल्कि सरकार की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े करेगा।












