“गुरु सेवा या गुनाह?” महाकुंभ-माघ मेले से जुड़ा संत पर POCSO केस, नाबालिगों के शोषण के आरोप से मचा भूचाल
यह मामला सिर्फ एक FIR नहीं, बल्कि आस्था, विश्वास और कानून की सबसे बड़ी परीक्षा बनता जा रहा है।
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📍 प्रयागराज / लखनऊ | विशेष रिपोर्ट | Google Discover Viral Desk
धार्मिक आस्था के केंद्र और करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े संत जगत से एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने पूरे देश को चौंका दिया है। प्रयागराज की POCSO अदालत के आदेश पर प्रसिद्ध संत स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके करीबी सहयोगी मुकुंदानंद गिरी के खिलाफ नाबालिगों के कथित यौन शोषण के आरोप में FIR दर्ज की गई है।
सबसे सनसनीखेज बात यह है कि शिकायत में महाकुंभ 2025 और माघ मेला 2026 के दौरान भी कथित शोषण होने का दावा किया गया है।
नाबालिगों ने खोला राज: “इसे गुरु सेवा बताया जाता था”
शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज के अनुसार:
- दो नाबालिग लड़के (14 और 17 वर्ष)
- एक साल से अधिक समय तक कथित शोषण
- “गुरु सेवा” बताकर चुप रहने का दबाव
- विरोध करने पर धमकी
FIR में दावा है कि माघ मेले के दौरान:
- कार के अंदर
- अस्थायी कैंप में
भी कथित यौन शोषण हुआ।
सीधे कोर्ट के आदेश पर FIR — बढ़ी गंभीरता
यह मामला सीधे POCSO कोर्ट के आदेश पर दर्ज हुआ है, जिसमें:
- POCSO एक्ट की गंभीर धाराएं
- BNS-2023 की धारा 351(3)
- और 6 अन्य लैंगिक अपराध धाराएं शामिल हैं
यह दर्शाता है कि अदालत ने प्रथम दृष्टया आरोपों को गंभीर माना।
जब पीड़ित भागकर पहुंचे दूसरे आश्रम
मामले का खुलासा तब हुआ जब:
- पीड़ित माघ मेले के दौरान आश्रम से भागे
- दूसरे संत के पास पहुंचे
- पूरी आपबीती सुनाई
- और पुलिस सुरक्षा मांगी
इसके बाद मामला पुलिस और कोर्ट तक पहुंचा।
स्वामी का पलटवार: “यह मेरे खिलाफ साजिश”
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा:
“यह मेरे खिलाफ सोची-समझी साजिश है, सच्चाई कोर्ट में सामने आएगी।”
क्यों हिल गया पूरा संत समाज?
यह मामला इसलिए बेहद बड़ा और संवेदनशील माना जा रहा है क्योंकि:
- आरोप एक बड़े संत पर लगे हैं
- मामला महाकुंभ और माघ मेले से जुड़ा है
- पीड़ित नाबालिग हैं
- कोर्ट ने सीधे FIR का आदेश दिया
सबसे बड़ा सवाल: आस्था बनाम कानून?
अब पूरा मामला तीन सवालों पर टिका है:
-
क्या आरोप सच हैं?
-
क्या यह साजिश है?
-
क्या धार्मिक संस्थानों की निगरानी पर्याप्त है?
आगे क्या हो सकता है?
संभावित कार्रवाई:
- पुलिस जांच तेज होगी
- गिरफ्तारी संभव
- कोर्ट में ट्रायल
- बड़े खुलासे हो सकते हैं
यह मामला सिर्फ एक FIR नहीं, बल्कि आस्था, विश्वास और कानून की सबसे बड़ी परीक्षा बनता जा रहा है।
देश अब इंतजार कर रहा है—
👉 सच सामने आएगा या साजिश बेनकाब होगी?
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