फर्जी पत्रकारों ने किया मीडिया पर कब्जा! कौन बचाएगा लोकतंत्र
विशेष लेख: अवनीश त्यागी
भारतीय लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत उसका चौथा स्तंभ—मीडिया—माना जाता है। यह वही स्तंभ है जो जनता की आवाज को सत्ता तक पहुंचाता है और सत्ता की सच्चाई को जनता के सामने लाता है।
लेकिन आज यही चौथा स्तंभ सबसे बड़े संकट से गुजर रहा है।
पत्रकारिता, जिसे कभी ईमानदारी, साहस और सच्चाई का प्रतीक माना जाता था, आज उसके एक हिस्से में लालच, चाटुकारिता और दलाली ने जगह बना ली है।
स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि अब सवाल उठने लगा है—क्या पत्रकारिता बिक रही है?
PRESS का डर या PRESS का दुरुपयोग?
आज सड़कों पर PRESS लिखी गाड़ियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है।
लेकिन क्या सभी लोग पत्रकार हैं?
सच्चाई यह है कि इनमें से कुछ लोग पत्रकारिता का उपयोग—
- अधिकारियों पर दबाव बनाने
- अवैध वसूली करने
- और अपना रौब जमाने
के लिए कर रहे हैं।
इससे न केवल पत्रकारिता बदनाम हो रही है, बल्कि सच्चे पत्रकारों की साख भी खतरे में पड़ गई है।
लोकतंत्र के लिए क्यों खतरनाक है यह स्थिति?
लोकतंत्र चार स्तंभों पर टिका है।
लेकिन यदि मीडिया ही—
- भ्रष्ट
- पक्षपाती
- और अविश्वसनीय
हो जाए, तो पूरी व्यवस्था कमजोर हो जाती है।
क्योंकि मीडिया ही वह माध्यम है, जो बाकी तीन स्तंभों की निगरानी करता है।
सबसे बड़ा खतरा: अपराधियों का मीडिया में प्रवेश
अब कुछ आपराधिक मानसिकता के लोग भी पत्रकार बनकर अपने अवैध कारोबार को बचाने में लगे हैं।
इससे—
- भ्रष्टाचार बढ़ रहा है
- सच्चाई दब रही है
- और जनता का भरोसा टूट रहा है
यह लोकतंत्र के लिए एक खतरनाक संकेत है।
क्या खत्म हो गई ईमानदार पत्रकारिता?
नहीं।
आज भी कई पत्रकार ऐसे हैं जो बिना किसी डर और लालच के सच्चाई दिखा रहे हैं।
लेकिन उनकी संख्या कम होती जा रही है।
अंतिम चेतावनी
यदि समय रहते पत्रकारिता में घुसी इस दीमक को नहीं रोका गया, तो लोकतंत्र की पूरी इमारत खतरे में पड़ सकती है।
क्योंकि—
जब चौथा स्तंभ गिरता है, तो लोकतंत्र ज्यादा दिन खड़ा नहीं रह सकता।












