“जहर की फैक्ट्री LIVE पकड़ी गई!” 5 करोड़ की ड्रग से बन रही थीं नकली दवाएं, मास्टरमाइंड गिरफ्तार — देशभर में सप्लाई का खुलासा

नई दिल्ली | डिजिटल डेस्क।
देश की स्वास्थ्य सुरक्षा को खतरे में डालने वाले एक खतरनाक ड्रग और नकली दवा सिंडिकेट का सनसनीखेज खुलासा हुआ है। दिल्ली पुलिस की एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) ने एक ऐसे गिरोह को बेनकाब किया है, जो 5 करोड़ रुपये की अंतरराष्ट्रीय ड्रग से नकली दवाएं बनाकर पूरे देश में बेच रहा था।
इस हाई-प्रोफाइल ऑपरेशन में पुलिस ने गिरोह के मास्टर कोऑर्डिनेटर अरुण (59) को गिरफ्तार किया है। इस केस में अब तक 9 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि नेटवर्क के कई बड़े चेहरे अभी भी फरार बताए जा रहे हैं।
बिहार में चल रही थी ‘मौत की फैक्ट्री’, बिना लाइसेंस बन रही थीं दवाएं

पुलिस जांच में सामने आया कि यह अवैध फैक्ट्री बिहार के गया में चुपचाप संचालित हो रही थी।
छापेमारी में जो सामने आया, उसने अधिकारियों के भी होश उड़ा दिए:
- 1,19,800 नकली जिंक टैबलेट
- 42,480 एजीथ्रोमाइसिन गोलियां
- 27 किलो पैरासिटामोल पाउडर
- 444 इंजेक्शन एम्प्यूल
- भारी मात्रा में मशीनरी और फर्जी पैकिंग सामग्री
सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि:
⚠️ फैक्ट्री पूरी तरह बिना लाइसेंस चल रही थी
⚠️ कोई योग्य केमिस्ट या मेडिकल एक्सपर्ट मौजूद नहीं था
यानी यहां सीधे-सीधे लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ हो रहा था।
5 करोड़ की ट्रामाडोल ड्रग से बन रही थीं ‘नशे की गोलियां’
पुलिस के मुताबिक आरोपी अरुण अंतरराष्ट्रीय तस्करी से लाए गए 5 किलो ट्रामाडोल पाउडर से टैबलेट तैयार करता था।
👉 अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत: 5 करोड़ रुपये से ज्यादा
इन गोलियों को:
- फर्जी मेडिकल चैनलों के जरिए सप्लाई किया जाता था
- नशेड़ियों को बेचा जाता था
- और हेरोइन के सस्ते विकल्प के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था
यह नेटवर्क न सिर्फ अवैध कमाई का जरिया था, बल्कि एक साइलेंट हेल्थ टेरर बन चुका था।
पटना से गया तक जुड़ी साजिश की कड़ियां
इस खतरनाक नेटवर्क का खुलासा तब हुआ जब पुलिस ने पहले पटना में एक फर्जी फार्मा यूनिट पकड़ी।
वहां गिरफ्तार आरोपी से पूछताछ में अरुण का नाम सामने आया, जिसके बाद गया में छापा मारकर इस ‘जहर फैक्ट्री’ का पर्दाफाश किया गया।
पुलिस का बड़ा बयान: “जनता की जिंदगी से खिलवाड़ करने वालों को नहीं बख्शेंगे”
पुलिस अधिकारियों ने साफ कहा:
“जन स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस है। इस नेटवर्क को तोड़ दिया गया है, लेकिन जांच जारी है।”
अब पुलिस इस नेटवर्क से जुड़े:
- सप्लायर
- फाइनेंसर
- और मेडिकल चैन के अन्य लोगों
की तलाश में जुटी है।
एक्सपर्ट अलर्ट: नकली दवा माफिया बन रहे हैं ‘साइलेंट किलर’
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, नकली दवाएं:
- इलाज को बेकार बना देती हैं
- गंभीर साइड इफेक्ट पैदा कर सकती हैं
- और कई मामलों में मौत का कारण भी बनती हैं
भारत में नकली दवा कारोबार हर साल हजारों करोड़ का अवैध उद्योग बन चुका है।
निष्कर्ष: एक्शन से टूटा नेटवर्क, लेकिन खतरा अभी जिंदा
दिल्ली पुलिस की इस कार्रवाई ने देश के सबसे खतरनाक ड्रग और नकली दवा नेटवर्क में से एक को बेनकाब किया है
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