अमरोहा में जहरीला पानी बना ‘साइलेंट किलर’: नाईपुरा में 56 दिन से उबाल पर किसान, कैंसर जैसे लक्षणों से दहशत

Published: 14 February 2026 | Location: Amroha, Uttar Pradesh | Author: M P Singh,Digital Desk
अमरोहा। उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले का नाईपुरा-गजरौला क्षेत्र इस समय एक गंभीर भूजल प्रदूषण संकट से जूझ रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि क्षेत्र में संचालित रासायनिक कारखानों से निकलने वाले जहरीले अपशिष्ट ने भूमिगत जल को इतना दूषित कर दिया है कि पीने का पानी अब जहर में बदल चुका है।
इस मुद्दे को लेकर भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) संयुक्त मोर्चा के नेतृत्व में किसानों का आंदोलन लगातार तेज हो रहा है। शहबाजपुर डोर में किसानों का बेमियादी धरना 56वें दिन भी जारी है।
पीला, बदबूदार और जहरीला पानी बना बीमारी की वजह
ग्रामीणों के अनुसार नाईपुरा और आसपास के गांवों में हैंडपंप और बोरिंग से निकलने वाला पानी पीला, बदबूदार और संदिग्ध है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस पानी के सेवन से ग्रामीणों में कई गंभीर लक्षण सामने आ रहे हैं, जैसे:
- लगातार बुखार और कमजोरी
- शरीर में गांठें
- सिरदर्द और उल्टी
- आंखों में असामान्य बदलाव
- तेजी से वजन घटना
- रात में अत्यधिक पसीना
ग्रामीणों का दावा है कि ये लक्षण कैंसर जैसी गंभीर बीमारी की ओर संकेत कर रहे हैं।
फसलें बर्बाद, खेती पर मंडराया संकट
किसानों ने आरोप लगाया कि दूषित पानी का असर अब खेती पर भी साफ दिखाई दे रहा है।
खेतों की उर्वरता घट रही है और फसल उत्पादन प्रभावित हो रहा है, जिससे किसानों की आजीविका पर संकट खड़ा हो गया है।
56 दिन से जारी धरना, प्रशासन पर गंभीर आरोप
भाकियू संयुक्त मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश चौधरी ने कहा:
किसानों का आरोप है कि प्रशासन द्वारा लिए गए पानी के नमूनों की रिपोर्ट अब तक सार्वजनिक नहीं की गई है।
किसानों की प्रमुख मांगें
- भूजल जांच रिपोर्ट तुरंत सार्वजनिक की जाए
- दूषित जल की रियल-टाइम मॉनिटरिंग शुरू की जाए
- दोषी कारखानों पर सख्त कार्रवाई हो
- प्रभावित गांवों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराया जाए
- दीर्घकालिक समाधान लागू किया जाए
आने वाली पीढ़ियों का सवाल बना जल संकट
किसानों का कहना है कि यह केवल आज का संकट नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के अस्तित्व का सवाल है।
उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
विश्लेषण: क्या औद्योगिक विकास ग्रामीणों की सेहत पर भारी?
नाईपुरा का यह मामला औद्योगिक विकास और पर्यावरण सुरक्षा के बीच संतुलन पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते पारदर्शी जांच और सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो यह मामला बड़े सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट में बदल सकता है।
Disclaimer: यह समाचार किसानों और स्थानीय लोगों द्वारा लगाए गए आरोपों पर आधारित है। प्रशासनिक पक्ष उपलब्ध होने पर समाचार अपडेट किया जाएगा।
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