भारत-अमेरिका ट्रेड डील के खिलाफ सड़कों पर उतरी भाकियू लोकशक्ति, राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन सौंपा — “किसानों के भविष्य से समझौता मंजूर नहीं”

बिजनौर | 13 जून 2026 रिपोर्ट अवनीश त्यागी
हाल ही में हुए भारत-अमेरिका ट्रेड डील (व्यापार अनुबंध समझौता) के विरोध में भारतीय किसान यूनियन लोकशक्ति ने बिजनौर में जोरदार प्रदर्शन किया। संगठन के जिलाध्यक्ष चौ. वीर सिंह सहरावत के नेतृत्व में बड़ी संख्या में पदाधिकारी और कार्यकर्ता कलेक्ट्रेट पहुंचे और महामहिम राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन जसजीत कौर को सौंपा।
किसानों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि यह समझौता वापस नहीं लिया गया तो प्रदेश और देश स्तर पर बड़ा जनआंदोलन खड़ा किया जाएगा।
क्या है विवाद की जड़?
भाकियू लोकशक्ति का आरोप है कि प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौता भारतीय कृषि, डेयरी उद्योग, न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) कानून व्यवस्था और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर खतरा साबित होगा।
जिलाध्यक्ष चौ. वीर सिंह सहरावत ने कहा—
“यह ट्रेड डील भारतीय किसानों के हितों के विपरीत है। इससे विदेशी कृषि उत्पादों का दबाव बढ़ेगा और देश के छोटे व मझोले किसानों को भारी नुकसान झेलना पड़ेगा।”
उनका दावा है कि निकट भविष्य में इस समझौते के दुरगामी परिणाम सामने आएंगे, जिससे खेती-किसानी की मौजूदा संरचना प्रभावित होगी।
शुगर मिलों पर घटतौली का आरोप
प्रदर्शन के दौरान किसानों ने स्थानीय स्तर पर एक और गंभीर मुद्दा उठाया।
संगठन का आरोप है कि शुगर मिल गेट और क्रय केंद्रों पर घटतौली कर किसानों की फसल का शोषण किया जा रहा है।
नेताओं का कहना है कि प्रशासन इस मुद्दे पर गंभीरता नहीं दिखा रहा, जिससे किसानों में आक्रोश बढ़ रहा है।
आंदोलन की चेतावनी
भाकियू लोकशक्ति ने साफ किया कि यदि सरकार ने किसानों की मांगों पर ध्यान नहीं दिया तो संगठन बड़े जनआंदोलन की रणनीति तैयार करेगा।
जिलाध्यक्ष ने कहा कि इसकी “पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।”
प्रदर्शन में कौन-कौन रहे शामिल?
इस विरोध प्रदर्शन में राष्ट्रीय महासचिव चौ. पदम सिंह, जग्गन अली, चौ. शेर सिंह, देवेंद्र प्रधान, सरदार जसवीर सिंह धारीवाल, सरदार गुरपेज सिंह, सुखवीर सिंह, अजयपाल सिंह, योगेंद्र सिंह काकरान, मूला सिंह, नरेश कुमार, अंकित दहिया, मुव्वशीर वेग, अकरम अली, गजेंद्र सिंह, ओमप्रकाश सिंह, अमित कुमार, जयप्रकाश सिंह, रामअवतार सिंह, घसीटा सिंह, भूपेंद्र सिंह, फुरकान अली, सामत रजा सहित बड़ी संख्या में पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे।
विश्लेषण: क्या बढ़ेगा राष्ट्रीय स्तर पर विरोध?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसान संगठनों की यह नाराजगी अन्य राज्यों में भी फैलती है तो यह मुद्दा राष्ट्रीय राजनीतिक विमर्श का केंद्र बन सकता है।
भारत-अमेरिका व्यापार समझौता पहले से ही कई किसान संगठनों के निशाने पर है। ऐसे में उत्तर प्रदेश के बिजनौर से उठी यह आवाज आगे चलकर बड़े आंदोलन का रूप ले सकती है।
किसानों की प्रमुख मांगें
- भारत-अमेरिका ट्रेड डील को तत्काल रद्द किया जाए
- MSP को कानूनी गारंटी मिले
- डेयरी एवं कृषि उत्पादों की सुरक्षा सुनिश्चित हो
- शुगर मिलों में घटतौली पर सख्त कार्रवाई हो
बिजनौर में हुआ यह प्रदर्शन संकेत देता है कि कृषि और व्यापार से जुड़े राष्ट्रीय समझौते अब केवल कूटनीतिक मुद्दे नहीं रहे, बल्कि जमीनी स्तर पर किसानों के जीवन और आजीविका से जुड़े संवेदनशील विषय बन चुके हैं।
अब निगाहें सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं—क्या संवाद होगा या संघर्ष?
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