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जब SIR में दिखावा नहीं, ज़मीनी काम हुआ—डीएम जसजीत कौर को राष्ट्रीय पुरस्कार

जब ज़मीन पर काम बोलता है: SIR में बिजनौर मॉडल की धमक, डीएम जसजीत कौर को राष्ट्रपति से राष्ट्रीय पुरस्कार

BLO से सिस्टम तक बदलाव: बिजनौर मॉडल को राष्ट्रपति की मुहर
विशेष,विश्लेषणात्मक रिपोर्ट। अवनीश त्यागी 

बिजनौर | 23 जनवरी 2026

चुनावी प्रक्रिया को अक्सर कागज़ी औपचारिकताओं, खानापूर्ति और ढीली निगरानी से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन बिजनौर ने इस सोच को पूरी तरह पलट दिया हैSpecial Intensive Revision (SIR) के अंतर्गत किए गए ठोस, ज़मीनी और परिणामोन्मुखी कार्यों के लिए जिलाधिकारी जसजीत कौर को 25 जनवरी 2026, नेशनल वोटर्स डे पर महामहिम राष्ट्रपति द्वारा राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। यह सम्मान न केवल एक अधिकारी की उपलब्धि है, बल्कि काम बनाम दिखावे की लड़ाई में काम की निर्णायक जीत है।

SIR को फाइलों से निकालकर फील्ड तक ले गईं डीएम

भारत निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देश देशभर में सभी जिलों को समान रूप से मिलते हैं, लेकिन सवाल यह है कि कितने जिले उन्हें वास्तव में लागू करते हैं?
बिजनौर में डीएम जसजीत कौर ने SIR को महज़ औपचारिक अभियान न मानते हुए उसे माइक्रो प्लानिंग, फील्ड-लेवल एक्शन और रोज़ाना जवाबदेही से जोड़ा।
यही कारण है कि आयोग ने उनके कार्य को ट्रेनिंग कैपेसिटी बिल्डिंग कैटेगरी में राष्ट्रीय स्तर पर चुना।

BLO को ‘नाम मात्र का कर्मचारी’ नहीं, सिस्टम की रीढ़ बनाया

जहां अधिकांश जिलों में BLO सिर्फ आदेश पालन की कड़ी बनकर रह जाते हैं, वहीं बिजनौर में उन्हें

  • बहु-स्तरीय प्रशिक्षण,
  • निरंतर मार्गदर्शन,
  • और दैनिक मॉनिटरिंग के ज़रिये
    एक जिम्मेदार और सशक्त चुनावी इकाई के रूप में विकसित किया गया।
    यह मॉडल स्पष्ट करता है कि अगर BLO मजबूत हों, तो मतदाता सूची स्वतः मजबूत हो जाती है।

माइक्रो प्लानिंग नहीं, माइक्रो एक्शन

कई जगह माइक्रो प्लानिंग सिर्फ मीटिंग के मिनट्स तक सीमित रहती है, लेकिन बिजनौर में यह
डेटा, फील्ड रिपोर्ट, फीडबैक और करेक्शन के साथ आगे बढ़ी।
यही वजह है कि निर्वाचन आयोग को यह साफ संदेश मिला कि यहां सुधार काग़ज़ पर नहीं, जमीन पर हुआ है

राजनीतिक दलों को जोड़ा, टकराव नहीं—समन्वय चुना

चुनाव सुधार की सबसे बड़ी चुनौती राजनीतिक अविश्वास होता है। डीएम जसजीत कौर ने इस चुनौती को अवसर में बदला और
राजनीतिक दलों व विभिन्न विभागों को प्रशिक्षण प्रक्रिया में शामिल कर
एक ऐसा वातावरण बनाया, जहां आरोप नहीं, सहभागिता रही।
नतीजा—SIR को लेकर विवाद नहीं, विश्वास बना।

यह पुरस्कार क्यों अलग है?

क्योंकि यह सम्मान

  • किसी एक दिन की रिपोर्ट का नहीं,
  • किसी फोटो-ऑप कार्यक्रम का नहीं,
  • बल्कि लगातार, मापा गया और मॉनिटर किया गया प्रशासनिक प्रदर्शन का है।

यह पुरस्कार उन जिलों के लिए भी सीधा सवाल है, जहां SIR आज भी सिर्फ लक्ष्यपूर्ति की एक्सेल शीट तक सिमटा है।

राष्ट्रीय मंच से स्पष्ट संदेश

राष्ट्रपति द्वारा दिया जाने वाला यह पुरस्कार यह साफ करता है कि

अब चुनाव सुधार में ढिलाई नहीं, गुणवत्ता देखी जाएगी।

बिजनौर ने यह साबित कर दिया है कि यदि जिला स्तर पर नेतृत्व स्पष्ट हो, तो लोकतंत्र की नींव को मजबूत करना कोई असंभव काम नहीं।

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