DM जसजीत कौर सख्त: अधूरी परियोजनाओं पर अल्टीमेटम, पूरी योजनाओं के तुरंत हैंडओवर के आदेश
(बिजनौर विकास समीक्षा बैठक की अंदरूनी तस्वीर | CMIS–NHAI कार्यों पर बड़ा फोकस)
बिजनौर, 22 जनवरी 2026 | डिजिटल डेस्क
जिले में वर्षों से अधूरी पड़ी विकास परियोजनाओं, हैंडओवर में हो रही देरी और निर्माण कार्यों की सुस्त रफ्तार पर अब प्रशासन ने साफ संदेश दे दिया है— अब देरी नहीं, सिर्फ डेडलाइन।
कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित सीएमआईएस एवं एनएचएआई कार्यों की समीक्षा बैठक में जिलाधिकारी जसजीत कौर ने जिस तरह सख्त तेवर दिखाए, उससे साफ है कि जिले में विकास कार्यों को लेकर अब “ज़ीरो टॉलरेंस” की नीति अपनाई जा रही है।
क्या है बैठक का असली एजेंडा? (विश्लेषण)
यह बैठक केवल एक औपचारिक समीक्षा नहीं थी, बल्कि इसके पीछे तीन बड़े प्रशासनिक संदेश छिपे थे—
- पूर्ण परियोजनाओं का तत्काल उपयोग शुरू हो
- निर्माणाधीन कार्य तय समय में पूरे हों
- जनप्रतिनिधियों के माध्यम से पारदर्शिता दिखाई जाए
जिलाधिकारी ने साफ कहा कि जो परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं, उन्हें “फाइलों में कैद” रखने की बजाय तुरंत संबंधित विभागों को हैंडओवर किया जाए, ताकि जनता को उनका लाभ मिल सके।
NHAI और निर्माण एजेंसियों पर सख्ती
बैठक में एनएचएआई व अन्य निर्माणदायी संस्थाओं को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि—
- निर्माणाधीन परियोजनाओं में अपेक्षित प्रगति नहीं दिखी तो जवाबदेही तय होगी
- समयसीमा के उल्लंघन को अब रूटीन देरी नहीं माना जाएगा
यह संकेत है कि आने वाले दिनों में लापरवाह एजेंसियों पर प्रशासनिक कार्रवाई भी देखने को मिल सकती है।
सड़क–पुल से लेकर कृषि व सिंचाई तक फुल रिव्यू
जिलाधिकारी ने सड़क निर्माण, पुल निर्माण, कृषि, सिंचाई, लोक निर्माण विभाग (PWD) सहित सभी प्रमुख विभागों की योजनाओं की बिंदुवार समीक्षा की।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि—
“बिजनौर को प्रदेश में अग्रणी बनाए रखने के लिए योजनाएं सिर्फ कागज़ों पर नहीं, ज़मीन पर दिखनी चाहिए।”
लोकार्पण पर जोर: पॉलिटिकल नहीं, पब्लिक अकाउंटेबिलिटी
एक अहम निर्देश यह भी रहा कि पूर्ण परियोजनाओं का लोकार्पण जनप्रतिनिधियों के माध्यम से कराया जाए।
विश्लेषकों के अनुसार, इसका उद्देश्य केवल राजनीतिक सहभागिता नहीं, बल्कि—
- जनता के सामने कार्य की गुणवत्ता लाना
- पारदर्शिता बढ़ाना
- अफसर–एजेंसी–जनप्रतिनिधि के बीच जवाबदेही तय करना
डेटा और लिस्टिंग में पारदर्शिता
जिलाधिकारी ने परियोजनाओं की सूची की सत्यता और अद्यतन स्थिति पर विशेष जोर दिया।
यह निर्देश इस ओर इशारा करता है कि—
- फर्जी प्रगति रिपोर्ट
- अधूरी योजनाओं को “पूर्ण” दिखाने की प्रवृत्ति
अब स्वीकार्य नहीं होगी।
क्यों अहम है यह बैठक? (निष्कर्ष)
यह बैठक बिजनौर प्रशासन की कार्यशैली में टर्निंग पॉइंट मानी जा रही है।
जहां पहले योजनाएं सालों तक अधर में लटकी रहती थीं, वहीं अब—
✔ टाइमलाइन
✔ हैंडओवर
✔ लोकार्पण
✔ जवाबदेही
चारों पर एक साथ फोकस दिखाई दे रहा है।
यदि ये निर्देश ज़मीन पर उतरते हैं, तो आने वाले महीनों में बिजनौर में विकास की रफ्तार साफ तौर पर तेज होती नजर आ सकती है।
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