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बिजनौर में ओवरलोड वाहनों का तांडव ! राजस्व को करोड़ों की चपत, कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल

बिजनौर में ओवरलोड वाहनों का बेकाबू आतंक ! करोड़ों के राजस्व पर डाका, प्रशासनिक लापरवाही उजागर

किसान यूनियन का डीएम को सख्त ज्ञापन, अवैध गन्ना व खनन वाहनों पर कार्रवाई की मांग तेज

विशेष विश्लेषणात्मक समाचार। अवनीश त्यागी 
बिजनौर की सड़कों पर नियम नहीं, ओवरलोड का राज ! यातायात माह भी बेअसर ?

जनपद बिजनौर में ओवरलोड गन्ना ट्रैक्टर-ट्रॉली, भारी गन्ना ट्रक, खनन में प्रयुक्त वाहन, अपंजीकृत ट्रैक्टर-ट्रॉली एवं डग्गामार/कमर्शियल वाहन खुलेआम फर्राटा भर रहे हैं। परिवहन नियमों को ताक पर रखकर चल रहे ये वाहन न केवल सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचा रहे हैं, बल्कि आम नागरिकों की जान-माल के लिए भी गंभीर खतरा बन चुके हैं।

डीएम को सौंपा गया शिकायती ज्ञापन बना चर्चा का केंद्र

भारतीय किसान यूनियन (भानू) के प्रदेश उपाध्यक्ष गौतम शर्मा ने जिलाधिकारी बिजनौर को सौंपे गए ज्ञापन में जनपद में व्याप्त ओवरलोडिंग और अवैध वाहन संचालन पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि यह पूरा अवैध खेल प्रभावशाली लोगों के संरक्षण में वर्षों से चल रहा है।

बार-बार शिकायतें, फिर भी कार्रवाई शून्य

किसान यूनियन का कहना है कि—

  •  परिवहन विभाग के अधिकारियों को कई बार अवगत कराया गया
  •  जनसुनवाई पोर्टल पर लिखित शिकायतें दर्ज कराई गईं
  •  प्रशासनिक कार्यालयों में प्रार्थना पत्र सौंपे गए

इसके बावजूद आज तक कोई ठोस, स्थायी और प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई, जो प्रशासनिक कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है।

ओवरलोड गन्ना वाहनों से बढ़ रहा खतरा

  •  सड़क दुर्घटनाओं की आशंका कई गुना बढ़ी
  • सड़कों और पुलों को भारी नुकसान
  •  टैक्स चोरी से सरकारी राजस्व में भारी गिरावट
  • कानून व्यवस्था पर सीधा प्रभाव
  • आम नागरिकों की सुरक्षा खतरे में

संयुक्त जिम्मेदारी, लेकिन जवाबदेही गायब

नियमों के अनुसार ओवरलोडिंग रोकना परिवहन विभाग, यातायात पुलिस, स्थानीय पुलिस एवं तहसील प्रशासन की संयुक्त जिम्मेदारी है। बावजूद इसके बिजनौर में ओवरलोड वाहन दिन-रात बेखौफ दौड़ रहे हैं। यह स्थिति प्रशासनिक तंत्र की निष्क्रियता और मिलीभगत की ओर इशारा करती है।

संगठनों और मीडिया की चेतावनी भी बेअसर

कई किसान संगठन, सामाजिक संस्थाएं और स्थानीय समाचार पत्र लंबे समय से इस गंभीर समस्या को उजागर कर रहे हैं। इसके बावजूद प्रशासनिक स्तर पर कोई निर्णायक कदम न उठाया जाना जनहित के प्रति उदासीनता को दर्शाता है।

किसान यूनियन की स्पष्ट मांगें

ज्ञापन के माध्यम से किसान यूनियन ने मांग की है कि—

  •  पूरे मामले की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच कराई जाए
  • सभी ओवरलोड, अवैध व अपंजीकृत वाहनों पर सख्त कार्रवाई हो
  • सरकारी राजस्व की हो रही हानि रोकी जाए
  •  सड़कों पर नियमित चेकिंग अभियान चलाया जाए
  •  आम जनता की जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए

अब बड़ा सवाल—कब जागेगा प्रशासन?

क्या जिला प्रशासन अब इस गंभीर समस्या पर सख्त रुख अपनाएगा?
या फिर ओवरलोड वाहनों का यह अवैध कारोबार यूं ही जनता की जान से खिलवाड़ करता रहेगा?

जनता की नजरें प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकीं

बिजनौर की सड़कों पर चल रहा यह ओवरलोडिंग का खेल अब छिपा नहीं है। अब देखना यह है कि प्रशासन कब तक आंखें मूंदे रहता है या वास्तव में जनहित में ठोस कदम उठाता है।

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