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खनन माफिया बनाम प्रशासन ! परमिशन निरस्त होने के बाद भी चलता रहा अवैध खनन

खनन माफिया बनाम कानून ! यूपी खनन नियमों की धज्जियां उड़ाकर परमिशन रद्द होने के बाद भी चलता रहा मिट्टी खनन

सरकारी तालाब पाटने की शिकायत, एडीएम के आदेश की अनदेखी और खनन अधिकारियों की भूमिका पर गहराते सवाल
विश्लेषणात्मक विशेष रिपोर्ट | अवनीश त्यागी 

उत्तर प्रदेश में अवैध खनन पर सख्त कानून और स्पष्ट नियम होने के बावजूद, जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट दिखाई दे रही है। सरकारी तालाब को पाटने की शिकायत पर एडीएम वान्या सिंह द्वारा मिट्टी खनन की परमिशन निरस्त किए जाने के एक सप्ताह बाद तक भी उसी परमिशन की आड़ में लगातार मिट्टी खनन किया जाता रहा। यह मामला न केवल प्रशासनिक लापरवाही, बल्कि खनन माफिया को मिले संरक्षण की ओर भी इशारा करता है।

पूरा मामला संक्षेप में

  • सरकारी तालाब पाटे जाने की शिकायत पर सतेंद्र सिंह ग्राम हकूमतपुर केशो उर्फ गांवड़ी की मिट्टी खनन की अनुमति निरस्त
  • निरस्तीकरण आदेश एक सप्ताह तक तहसील प्रशासन तक नहीं पहुंचा
  • खनन माफिया ने उसी परमिशन का हवाला देकर अवैध खनन जारी रखा
  • जिला खनन अधिकारी व तहसील अधिकारियों की भूमिका संदेह के घेरे में

उत्तर प्रदेश खनन नियम क्या कहते हैं?

उत्तर प्रदेश में खनन गतिविधियां उत्तर प्रदेश खनिज (अवैध खनन, परिवहन एवं भंडारण का निवारण) नियमावली, 2021 तथा यू.पी. माइनर मिनरल कन्सेशन रूल्स के अंतर्गत संचालित होती हैं। इन नियमों के अनुसार—

मुख्य प्रावधान

  • ✔️ सरकारी भूमि, तालाब, नदी, नाला व जलस्रोत से खनन पूर्णतः प्रतिबंधित
  • ✔️ अनुमति निरस्त होते ही खनन कार्य तत्काल बंद होना अनिवार्य
  • ✔️ अवैध खनन पर वाहन, मशीन और खनिज जब्ती का प्रावधान
  • ✔️ दोषी पर भारी जुर्माना और आपराधिक मुकदमा दर्ज किया जा सकता है
  • ✔️ जिम्मेदार अधिकारियों की विभागीय कार्रवाई का स्पष्ट प्रावधान

इन नियमों के होते हुए भी यदि खनन जारी रहता है, तो यह कानून का सीधा उल्लंघन है।

नियमों की खुलेआम अवहेलना

इस प्रकरण में न केवल सरकारी तालाब जैसे संरक्षित जलस्रोत को नुकसान पहुंचाया गया, बल्कि एडीएम स्तर के आदेश को भी जानबूझकर नजरअंदाज किया गया। आदेश संप्रेषण में देरी ने खनन माफिया को अवैध गतिविधि जारी रखने का खुला मौका दे दिया।

खनन विभाग और तहसील प्रशासन पर सवाल

  • आदेश समय पर क्यों नहीं भेजा गया?
  • तहसील प्रशासन ने मौके पर जांच क्यों नहीं की?
  • क्या जिला खनन अधिकारी ने जानबूझकर आंखें मूंदे रखीं?
  • क्या अवैध खनन से राजस्व नुकसान की भरपाई होगी?

इन सवालों के जवाब अब भी अधूरे हैं।

पर्यावरण और सरकारी संपत्ति को भारी नुकसान

सरकारी तालाबों का पाटना भू-जल स्तर, सिंचाई व्यवस्था और पर्यावरण संतुलन के लिए गंभीर खतरा है। मिट्टी खनन से न केवल प्राकृतिक संसाधन नष्ट होते हैं, बल्कि सरकार को लाखों रुपये के राजस्व नुकसान का भी सामना करना पड़ता है।

जनता और सामाजिक संगठनों की मांग

  • पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच
  • खनन माफिया के साथ-साथ संरक्षण देने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई
  • अवैध खनन में प्रयुक्त मशीनों व वाहनों की तत्काल जब्ती
  • भविष्य में ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए कड़ी निगरानी

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