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ज़हर बनता पानी ! गजरौला में भूजल प्रदूषण पर 15 दिन से किसानों का हल्लाबोल

ज़हर बनता पानी! गजरौला में भूजल प्रदूषण पर 15 दिन से किसानों का हल्लाबोल, पर्यावरण आयोग ने मांगी जांच रिपोर्ट सार्वजनिक

कड़ाके की ठंड में धरना जारी, कैमिकल अपशिष्ट से फसल-पानी-सेहत पर संकट; आयोग सदस्य ने डीएम को दी सख्त चेतावनी
गजरौला भूजल प्रदूषण: जब पानी ही बन गया जहर

गजरौला (अमरोहा), 04 जनवरी 2026।
जिस पानी से जीवन चलता है, वही पानी जब ज़हर बन जाए तो आंदोलन लाजिमी हो जाता है। अमरोहा जिले के औद्योगिक क्षेत्र गजरौला में यही हकीकत सामने आई है। शहबाजपुर डोर गांव के किसान कैमिकल युक्त औद्योगिक अपशिष्ट जल से भूजल प्रदूषण के खिलाफ पिछले 15 दिनों से अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं। हाड़ कंपा देने वाली ठंड भी किसानों के इरादों को डिगा नहीं सकी है।

भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) संयुक्त मोर्चा के बैनर तले चल रहा यह आंदोलन अब केवल स्थानीय विरोध नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य और पर्यावरण सुरक्षा की लड़ाई बन चुका है।

पर्यावरण आयोग की सख्त एंट्री, प्रशासन पर बढ़ा दबाव

रविवार को धरनास्थल पर पहुंचे उत्तर प्रदेश पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन आयोग के सदस्य कारी फतेहउद्दीन खान कादरी ने किसानों की पीड़ा को गंभीरता से सुना और मौके पर ही प्रशासन को स्पष्ट संदेश दे दिया।

उन्होंने जिलाधिकारी निधि गुप्ता वत्स को निर्देश दिए कि—

  • भूजल, मृदा और वायु प्रदूषण से जुड़ी सभी जांच रिपोर्ट तत्काल सार्वजनिक की जाएं
  • प्रदूषण फैलाने वाली औद्योगिक इकाइयों पर कठोर और पारदर्शी कार्रवाई हो
  • दूषित पानी से प्रभावित लोगों, फसलों और मवेशियों की विशेषज्ञ जांच व इलाज सुनिश्चित किया जाए

कादरी ने साफ कहा कि पर्यावरण और जनस्वास्थ्य से खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

राष्ट्रीय स्तर पर संवेदनशील बना मामला

हाल ही में देश के विभिन्न हिस्सों, विशेषकर इंदौर में दूषित पेयजल से हुई त्रासदी, के बाद गजरौला प्रकरण पर आयोग ने स्वतः संज्ञान लिया है। आयोग सदस्य ने इसे राष्ट्रीय स्तर का उभरता गंभीर पर्यावरणीय संकट करार दिया।

धरनास्थल से ही कारी फतेहउद्दीन खान कादरी ने उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य को फोन कर पूरे मामले से अवगत कराया। उपमुख्यमंत्री ने शीघ्र जांच और समाधान का भरोसा दिलाया, जिससे किसानों में नई उम्मीद जगी है।

किसानों की पीड़ा: फसल बर्बाद, सेहत खराब, पशु बीमार

धरनारत किसानों का आरोप है कि औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाला कैमिकल युक्त अपशिष्ट जल—

  • हैंडपंपों और ट्यूबवेल तक पहुंच चुका है
  • खेतों में सिंचाई से फसलें चौपट हो रही हैं
  • गांवों में त्वचा, पेट और सांस से जुड़ी बीमारियां बढ़ रही हैं
  • मवेशियों में गंभीर रोग फैल रहे हैं

किसानों ने दो टूक कहा कि जांच रिपोर्ट सार्वजनिक होने और दोषियों पर कार्रवाई तक आंदोलन जारी रहेगा।

  • विकास बनाम विनाश: गजरौला फिर सवालों में
  • गजरौला लंबे समय से औद्योगिक प्रदूषण की मार झेल रहा है। यह मामला एक बार फिर सवाल खड़ा करता है—
    क्या औद्योगिक विकास पर्यावरण और ग्रामीण जीवन की कीमत पर होना चाहिए?
     क्या नियम सिर्फ कागज़ों तक सीमित हैं?
आंदोलन में कौन-कौन रहा मौजूद

धरनास्थल पर भाकियू संयुक्त मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश चौधरी, प्रमुख सचिव अरुण सिद्धू, पूर्व जिला पंचायत सदस्य एवं शिक्षाविद डॉ. जयपाल सिंह, प्रदेशाध्यक्ष रामकृष्ण चौहान के साथ रिंकू सागर, आजम खान, तेजपाल सिंह, असलम चौधरी, चौधरी चरण सिंह, आसिफ चौधरी, एडवोकेट जर्रार अहमद, अमरजीत देवल, दानिश चौधरी, हैदर चौधरी, विनीत तोमर, अंकित त्यागी सहित बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे।

जांच रिपोर्ट बनेगी निर्णायक कड़ी

पर्यावरण आयोग की सक्रियता ने उम्मीद की किरण जरूर दिखाई है, लेकिन असली परीक्षा अब प्रशासन की पारदर्शिता और कार्रवाई की होगी।
गजरौला का यह आंदोलन आने वाले समय में यह तय करेगा कि पानी बचेगा या मुनाफे की भेंट चढ़ेगा

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