गन्ना किसानों के हक़ पर डाका? नांगल बी क्रय केंद्र पर तौल में 40 किलो की घटतौली उजागर
बरकातपुर शुगर मिल के इलेक्ट्रॉनिक कांटे पर सवाल, जांच में खुली पोल
बिजनौर | डिजिटल डेस्क
गन्ना किसानों के हितों की रक्षा के तमाम दावों के बीच ज़मीनी हकीकत एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। उत्तम शुगर मिल बरकातपुर के अंतर्गत आने वाले नांगल बी गन्ना क्रय केंद्र पर तौल में 40 किलो की भारी घटतौली का मामला सामने आया है। यह खुलासा तब हुआ जब गन्ना विभाग की टीम ने शिकायत के आधार पर मौके पर पहुंचकर औचक निरीक्षण किया।
शिकायत से जांच तक: कैसे खुला घटतौली का खेल?
भारतीय किसान यूनियन (लोक शक्ति) के जिला अध्यक्ष चौधरी वीर सिंह सहारावत ने नांगल बी क्रय केंद्र पर किसानों से गन्ना खरीद में घटतौली की गंभीर शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत को संज्ञान में लेते हुए शुक्रवार शाम गन्ना समिति नजीबाबाद के सचिव विजय शुक्ला और ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक बरकातपुर संदीप चौधरी के नेतृत्व में एक संयुक्त टीम ने क्रय केंद्र का निरीक्षण किया।
इलेक्ट्रॉनिक कांटे की पोल खुली
निरीक्षण के दौरान टीम ने पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए बोलेरो वाहन को इलेक्ट्रॉनिक कांटे पर खड़ा कर वजन किया। परीक्षण के परिणाम चौंकाने वाले थे—वजन में सीधे 40 किलो का अंतर पाया गया। यह अंतर न केवल तकनीकी खामी की ओर इशारा करता है, बल्कि किसानों के आर्थिक शोषण की आशंका को भी मजबूत करता है।
किसानों की जेब पर सीधा असर
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्रति ट्रॉली 40 किलो की घटतौली की जा रही है, तो इसका सीधा नुकसान किसानों को होता है।
एक दिन में सैकड़ों ट्रॉलियां आने पर
हजारों किलो गन्ना कम तौला जाना
और लाखों रुपये का संभावित नुकसान
यह मामला सिर्फ एक क्रय केंद्र तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे गन्ना खरीद तंत्र की निगरानी और जवाबदेही पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।
मिल प्रबंधन की भूमिका सवालों के घेरे में
अब बड़ा सवाल यह है कि—
क्या यह तकनीकी गड़बड़ी थी या जानबूझकर की गई घटतौली?
क्या मिल प्रबंधन को इसकी जानकारी थी?
और क्या पूर्व में भी किसानों के साथ ऐसा होता रहा है?
इन सवालों के जवाब जांच रिपोर्ट के बाद ही सामने आ पाएंगे, लेकिन फिलहाल मिल प्रबंधन और क्रय केंद्र की कार्यप्रणाली संदेह के घेरे में है।
किसान संगठनों का सख्त रुख
किसान संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई नहीं हुई, तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने से पीछे नहीं हटेंगे। साथ ही मांग की जा रही है कि—
सभी क्रय केंद्रों के कांटों की दोबारा जांच हो
तौल प्रक्रिया की लाइव निगरानी व्यवस्था लागू की जाए
और किसानों को तौल पर्ची की पारदर्शी जानकारी दी जाए
✍️ विश्लेषण: सिस्टम की खामी या सुनियोजित लूट?
नांगल बी क्रय केंद्र का यह मामला एक चेतावनी है कि डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक व्यवस्था होने के बावजूद निगरानी ढीली है। जब तक नियमित जांच, स्वतंत्र ऑडिट और किसानों की भागीदारी सुनिश्चित नहीं होगी, तब तक ऐसे मामले सामने आते रहेंगे।
नांगल बी क्रय केंद्र पर सामने आई 40 किलो की घटतौली सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि किसानों के भरोसे पर चोट है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में कितनी तेजी और सख्ती से कार्रवाई करता है—क्योंकि दांव पर सिर्फ गन्ने का वजन नहीं, किसानों का भविष्य है।












