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बिजनौर में अफसरों को डीएम का सख्त संदेश “शिकायतकर्ता संतुष्ट नहीं, तो निस्तारण नहीं!” — तहसील दिवस से शासन तक सख्त निगरानी

बिजनौर में अफसरों को डीएम का सख्त संदेश
“शिकायतकर्ता संतुष्ट नहीं, तो निस्तारण नहीं!” — तहसील दिवस से शासन तक सख्त निगरानी

📍 बिजनौर | प्रशासनिक जवाबदेही पर बड़ा संदेश
जनशिकायतों को लेकर लापरवाही अब भारी पड़ेगी। बिजनौर की जिलाधिकारी जसजीत कौर ने साफ कर दिया है कि शिकायत का निस्तारण तभी माना जाएगा, जब शिकायतकर्ता पूरी तरह संतुष्ट होगा। तहसील दिवस, संपूर्ण समाधान दिवस और आईजीआरएस पोर्टल पर दर्ज हर शिकायत पर अब गुणवत्ता, समयबद्धता और जमीनी सत्यापन अनिवार्य होगा।
यह सख्त संदेश डीएम ने तहसील धामपुर में आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस के दौरान जिला स्तरीय अधिकारियों को दिया, जो सीधे-सीधे प्रशासनिक कार्यशैली में बड़े बदलाव का संकेत माना जा रहा है।

क्यों अहम है डीएम का यह निर्देश?       

डीएम जसजीत कौर ने जिस बिंदु पर सबसे अधिक जोर दिया, वह है—
👉 शिकायत की पुनरावृत्ति
उनका स्पष्ट कहना था कि अगर कोई शिकायत दोबारा पोर्टल पर आती है, तो इसका सीधा अर्थ है कि या तो शिकायत को गंभीरता से नहीं सुना गया, या फिर उसका कागजी निस्तारण कर दिया गया।
यह टिप्पणी प्रशासनिक तंत्र की उस कमजोरी की ओर इशारा करती है, जहां कई बार रिपोर्ट तो ‘निस्तारित’ दिखा दी जाती है, लेकिन समस्या जमीनी स्तर पर जस की तस बनी रहती है।

IGRS से तहसील दिवस तक: अब हर शिकायत रडार पर

डीएम ने अधिकारियों को आगाह किया कि—
शिकायतों की मॉनिटरिंग शासन स्तर से हो रही है
निस्तारण की गुणवत्ता की सीधी समीक्षा की जाती है
लापरवाही पर जवाबदेही तय होगी
यानी अब शिकायत केवल फाइल में बंद नहीं होगी, बल्कि उसकी जमीनी सच्चाई की भी जांच होगी।

तहसील दिवस की स्थिति: आंकड़ों में सच
🔹 कुल दर्ज शिकायतें — 149
🔹 मौके पर निस्तारित — 06
🔹 शेष शिकायतें — गुणवत्तापरक व समयबद्ध निस्तारण हेतु निर्देशित
ये आंकड़े बताते हैं कि शिकायतों की संख्या बड़ी है, लेकिन तत्काल समाधान का प्रतिशत बेहद कम। ऐसे में डीएम का सख्त रुख सिस्टम सुधार की जरूरत को रेखांकित करता है।

अब ‘कारण बताओ’ भी जरूरी

डीएम ने यह भी स्पष्ट निर्देश दिए कि—
यदि किसी शिकायत का समाधान संभव नहीं है, तो
✔️ स्पष्ट कारण लिखा जाए
✔️ शिकायतकर्ता को औपचारिक रूप से अवगत कराया जाए
ताकि शिकायतकर्ता भ्रम में न रहे और बार-बार वही शिकायत दोहराने की स्थिति न बने।
 फील्ड में जाएं अफसर, सिर्फ टेबल वर्क नहीं
एक अहम निर्देश यह भी रहा कि अधिकारी—
मौके पर जाकर जांच करें
शिकायतकर्ता से सीधे संवाद करें
स्थानीय लोगों से भी वार्ता करें
यह निर्देश प्रशासनिक कार्यप्रणाली को ऑफिस-केंद्रित से फील्ड-केंद्रित बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

सरकार गंभीर, अफसर सतर्क रहें

डीएम ने दो टूक कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार जनशिकायतों को लेकर अत्यंत संवेदनशील है, और इसलिए किसी भी स्तर पर ढिलाई अब स्वीकार नहीं होगी।
यह संदेश स्पष्ट है—
👉 जनता की शिकायत = सरकार की प्राथमिकता
👥 कौन-कौन रहे मौजूद
संपूर्ण समाधान दिवस में
पुलिस अधीक्षक अभिषेक झा
उप जिलाधिकारी धामपुर स्मृति मिश्रा
मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. कौशलेंद्र सिंह
सहित सभी प्रमुख विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
📝 निष्कर्ष | Editorial Take
डीएम जसजीत कौर का यह सख्त रुख केवल एक प्रशासनिक निर्देश नहीं, बल्कि जनविश्वास बहाली की कोशिश है।
अगर ये निर्देश सही मायनों में जमीन पर उतरे, तो
✔️ शिकायतों की पुनरावृत्ति घटेगी
✔️ अफसरों की जवाबदेही बढ़ेगी
✔️ और जनता को वास्तविक राहत मिलेगी
अब देखना यह है कि यह सख्ती कागजों तक सीमित रहती है या वाकई सिस्टम को बदलती है।
👉 आपकी शिकायत पर क्या हुआ?
👉 क्या आपके इलाके में समाधान दिवस कारगर साबित हो रहा है?
अपनी राय हमें जरूर बताएं।

 

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