बिजनौर में ₹101 करोड़ की ‘सोई हुई पूंजी’ का बड़ा खुलासा — “आपकी पूंजी, आपका अधिकार” शिविर में प्रशासन ने खोली अनकही वित्तीय हकीकत

569,781 खातों में जमा भारी-भरकम राशि वर्षों से बिना दावे के पड़ी • नागरिकों को उनकी ‘भूली–बिसरी’ वित्तीय संपत्ति वापस दिलाने का सबसे बड़ा अभियान शुरू
📌 बिजनौर से अवनीश त्यागी की ग्राउंड रिपोर्ट
बिजनौर। बिजनौर में शुक्रवार दोपहर आयोजित “आपकी पूंजी, आपका अधिकार” शिविर ने वित्तीय जागरूकता का ऐसा माहौल बनाया, जैसा पहले कभी देखने को नहीं मिला।
शिविर की अध्यक्षता करते हुए जिलाधिकारी जसजीत कौर ने जब यह चौंकाने वाला आँकड़ा साझा किया कि जनपद में 569,781 खातों में ₹101.42 करोड़ की धनराशि बिना दावे के पड़ी है, तो सभागार में मौजूद हर व्यक्ति स्तब्ध रह गया।
यह कोई साधारण आंकड़ा नहीं—
यह लाखों परिवारों की वह छिपी हुई कमाई है, जो वर्षों से सिस्टम की फाइलों में दबी रह गई।
आंकड़ों की अंदरूनी कहानी — कितना पैसा किस नाम पर अटका?
- कुल बिना दावा खाते: 5,69,781
- कुल अटकी धनराशि: ₹101.42 करोड़
- अब तक निपटाए गए खाते: 530
- निपटाई गई राशि: ₹1.91 करोड़
यानी पूरा डेटा का केवल 0.09% हिस्सा ही सक्रिय हुआ है, और अभी 99.91% बिना दावा धन सिस्टम में अटका हुआ है।
इससे बड़ा सवाल यह उठता है—
“क्यों इतने बड़े पैमाने पर लोग अपनी ही धनराशि से अनजान हैं?”
राष्ट्रव्यापी अभियान की पृष्ठभूमि — क्यों उठाना पड़ा यह कदम?
भारत में अनुमानित रूप से ₹35,000 करोड़ से ज्यादा की धनराशि बैंक खातों, बीमा कंपनियों, म्यूचुअल फंडों, शेयरों और अन्य वित्तीय संस्थानों में वर्षों से पड़ी है, जिनका कोई दावा नहीं कर रहा।
इसी को देखते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 4 अक्टूबर 2025 को गुजरात के गांधीनगर से
भारत का सबसे बड़ा वित्तीय जागरूकता मिशन लॉन्च किया — “आपकी पूंजी, आपका अधिकार”
अभियान में पहली बार देश के प्रमुख वित्तीय संस्थान एक साथ आए हैं—
- भारतीय रिजर्व बैंक (RBI)
- भारतीय बीमा विनियामक एवं विकास प्राधिकरण (IRDAI)
- भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI)
- IEPFA (कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय)
- वित्तीय सेवाएँ विभाग (DAFS)
यह अभियान सिर्फ जागरूकता तक सीमित नहीं—
यह एक वित्तीय सुधार आंदोलन है।
क्यों बढ़ी बिना दावा संपत्तियों की समस्या? गहराई से समझें
विश्लेषण के अनुसार इसके 5 बड़े कारण सामने आते हैं—
1. नागरिकों में वित्तीय शिक्षा की कमी
अधिकांश लोग यह ही नहीं जानते कि डिविडेंड, बीमा मैच्योरिटी, या निष्क्रिय FD भी ‘Unclaimed’ गिनी जाती है।
2. परिवारों में नामांकन अपडेट न होना
मृतक व्यक्तियों के कई खाते अधूरे रिकॉर्ड के कारण वर्षों से लॉक पड़े रहते हैं।
3. पुराने दस्तावेज गायब हो जाना
पीढ़ियाँ बदलने के साथ पुरानी पासबुक, पॉलिसी पेपर और शेयर सर्टिफिकेट गायब हो जाते हैं।
4. डिजिटल बदलाव के कारण पुराने खाते अनट्रेस्ड
डिजिटल बैंकिंग से पहले खोले गए लाखों खातों का अब कोई रिकॉर्ड लोगों के पास नहीं।
5. प्रक्रियाओं की जटिलता का डर
लोग सोचते हैं कि दावा प्रक्रिया मुश्किल है, जबकि अब इसे बेहद सरल कर दिया गया है।
आखिर Unclaimed Assets में शामिल क्या-क्या होता है?
यह सूची पढ़कर आप भी चौंक सकते हैं—
- निष्क्रिय बैंक खाते
- पुरानी फिक्स्ड डिपॉजिट
- बीमा पॉलिसियों का बकाया दावा
- पब्लिक/प्राइवेट कंपनियों के डिविडेंड
- पुराने शेयर
- म्यूचुअल फंड यूनिट्स
- पोस्ट ऑफिस डिपॉजिट
- बंद हो चुके बैंक/बीमा संस्थानों के क्रेडिट
यानी आपके दादा-दादी, माता-पिता या स्वयं के नाम की पुरानी पासबुक में पड़ा छोटा-सा बैलेंस भी आज हजारों में बदल सकता है।
अब डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म दिलाएगा आपकी ‘छूटी हुई कमाई’
शिविर में अधिकारियों ने बताया कि सिस्टम अब पूरी तरह डिजिटल हो चुका है।
नागरिक अब—
- आधार/KYC से खोज कर
- पुराने रिकॉर्ड मिलाकर
- नामांकन अपडेट कर
- उत्तराधिकार प्रमाण लगाकर
अपनी बिना दावा संपत्ति का हक आसानी से पा सकते हैं।
यह प्रक्रिया अब 80% तक सरल और समयबद्ध कर दी गई है।
🎖️ जिलाधिकारी के सख्त निर्देश — “हर गांव, हर घर तक जाए सूचना”
कार्यक्रम में जिलाधिकारी जसजीत कौर ने सभी विभागों, बैंकों और वित्तीय संस्थानों को
अधिकतम प्रचार–प्रसार
करने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा—
“किसी भी नागरिक की वैध कमाई छूटनी नहीं चाहिए। हमारा उद्देश्य है कि हर व्यक्ति अपनी पूंजी का हकदार बने।”
उनकी पहल पर शिविर में लाभार्थियों को प्रमाण पत्र भी वितरित किए गए।
कौन-कौन रहा मौजूद?
- DDO बिजनौर
- LDO, RBI
- LDM बिजनौर
- DDM नाबार्ड
- विभिन्न बैंक शाखाओं के अधिकारी
- सम्मानित लाभार्थी
📌 निष्कर्ष: बिजनौर में जागी ‘सोई हुई पूंजी’ — अब शुरू हुआ बड़ा परिवर्तन
बिजनौर में आयोजित यह शिविर सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं था—
यह वित्तीय चेतना जगाने वाला आंदोलन है।
जहाँ एक ओर बड़ी मात्रा में धन वर्षों से निष्क्रिय पड़ा है, वहीं दूसरी ओर सरकार अब नागरिकों के अधिकार को उनके हाथों में वापस देने के लिए सक्रिय है।
यह अभियान आने वाले महीनों में
- हजारों परिवारों के आर्थिक हालात बदल सकता है,
- नागरिकों को नई वित्तीय समझ दे सकता है,
- और भारत को वित्तीय पारदर्शिता की दिशा में एक नई पहचान दे सकता है।










