बिजनौर कोडीन कफ सीरप कांड में नया धमाका
सूत्रों का दावा — “धाराएँ हल्की कराने के लिए 5 लाख की डील, निरीक्षण प्रणाली पर मंडराते बड़े सवाल”
अवनीश त्यागी की खोजपूर्ण विशेष रिपोर्ट
बिजनौर। कोडीनयुक्त कफ सीरप की तस्करी से जुड़े गाजियाबाद नेटवर्क की जांच जब बिजनौर पहुँची, तो शुरुआती खुलासों ने ही जिले की औषधि निरीक्षण व्यवस्था की परतें उधेड़नी शुरू कर दी थीं। लेकिन अब सूत्रों ने एक ऐसा दावा किया है जिसने पूरा मामला प्रशासनिक-व्यापारिक गठजोड़ की दिशा में मोड़ दिया है।
नया खुलासा: “धाराएँ हल्की कराने के नाम पर 5 लाख की वसूली” — सूत्र
विश्वसनीय सूत्रों ने दावा किया है कि:
- शिवशक्ति मेडिकोज के मालिक से
“अभियोग की धाराएं कम कराने” के नाम पर
मेडिकल यूनियन के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने लगभग पाँच लाख रुपये की मांग की।
सूत्र यह भी कहते हैं कि—
- यही पदाधिकारी अक्सर औषधि निरीक्षक उमेश कुमार भारती के आस-पास सक्रिय दिखाई देता है।
- स्थानीय मेडिकल जगत में लंबे समय से चर्चा है कि यह व्यक्ति कुछ मेडिकल स्टोर संचालकों का स्वयंभू ‘हितरक्षक’ बनकर,
निरीक्षण टीम के साथ अत्यधिक निकटता रखता है। - उसके बारे में यह आरोप भी लगाए जाते हैं कि वह
“दुकानों में कमियाँ दिखाकर”,
“औषधि निरीक्षक का भय दिखाते हुए”
कथित रूप से अवैध उगाही में शामिल रहता है।
⚠️ महत्वपूर्ण: यह पूरा हिस्सा केवल सूत्रों के दावों पर आधारित है। इन आरोपों की पुष्टि केवल जांच एजेंसियां ही कर सकती हैं।
पृष्ठभूमि: दो साल से बंद दुकान पर 10,950 बोतलें — प्रणाली की चुप्पी क्यों?
शिवशक्ति मेडिकोज, जो कि दुकानदारों के अनुसार दो वर्ष से बंद थी, उसके नाम पर:
- अप्रैल–जून 2025:
10,950 बोतलें कोडीनयुक्त Lycrarest-T की बिलिंग हुई।
निरीक्षण टीम के现场 निरीक्षण में दुकान पूरी तरह बंद मिली — न स्टॉक, न रजिस्टर, न संचालन।
बड़े सवाल:
- जब दुकान लंबे समय से बंद थी,
तो हजारों बोतलों की सप्लाई कौन ले रहा था? - क्या निरीक्षण रिकॉर्ड इतने वर्षों तक मूक क्यों रहे?
- क्या प्रशासनिक ढिलाई थी या किसी स्तर पर सक्रिय चुप्पी?
दूसरी दुकान S V मेडिकल: 24,998 बोतलें — लेकिन बिक्री रिकॉर्ड गायब
स्टेशन चौराहा स्थित S V मेडिकल स्टोर पर:
- अप्रैल–जून: 9,000 बोतलें
- सितंबर: 14,998 बोतलें
की बिलिंग दिखाई दी, लेकिन दुकानदार नियमित बिक्री रिकॉर्ड प्रदान नहीं कर पाए।
औषधि विभाग ने दोनों दुकानों को नोटिस जारी कर दिया है।
सूत्रों के गंभीर आरोप: “तीन साल में एक भी औपचारिक निरीक्षण नहीं…”
स्थानिय व्यापार जगत से जुड़े कुछ लोगों ने दावा किया—
- निरीक्षक उमेश कुमार भारती के कार्यकाल में
तीन वर्षों तक शिवशक्ति मेडिकोज का कोई नियमित निरीक्षण नहीं हुआ। - इसी दौरान यूनियन के दो पदाधिकारियों और निरीक्षक की नज़दीकी को लेकर
बाज़ार में लंबे समय से चर्चा रही है।
इन दावों का सत्यापन केवल जांच एजेंसियों द्वारा ही संभव है, लेकिन इन आरोपों ने व्यवस्था की विश्वसनीयता पर तीखे सवाल खड़े कर दिए हैं।
क्या कार्रवाई “रीएक्शन मोड” में हुई?—बाज़ार में उठ रही चर्चाएँ
कुछ व्यापारियों का मानना है कि:
- जैसे ही गाजियाबाद नेटवर्क के तार बिजनौर तक पहुंचे,
स्थानीय प्रशासन अचानक सक्रिय हो गया। - कई लोग इस तेज़ कार्रवाई को
“जिम्मेदारी तय होने से पहले बचाव की कोशिश”
भी मान रहे हैं।
औषधि विभाग ने इन सभी बातों को सिर्फ अफवाह बताया है।
📌 औषधि निरीक्षक का आधिकारिक पक्ष
निरीक्षक उमेश कुमार भारती के अनुसार:
- दोनों मेडिकल स्टोर्स को तीन दिन का समय दिया गया है।
- कोडीनयुक्त दवाओं का कड़ा रिकॉर्ड रखना अनिवार्य है।
- रिकॉर्ड न देने पर
एनडीपीएस एक्ट सहित अन्य धाराओं में मामला दर्ज किया जाएगा। - कार्रवाई “लखनऊ से प्राप्त इनपुट” के आधार पर की जा रही है।
🛑 राज्य स्तर पर अब रेड अलर्ट
गाजियाबाद के इंटरस्टेट तस्करी नेटवर्क के खुलासे के बाद शासन ऐसे मामलों पर अत्यधिक संवेदनशील है।
बिजनौर केस अब इन पर गंभीर सवाल खड़ा कर चुका है—
- फर्जी बिलिंग
- डमी मेडिकल स्टोरों का उपयोग
- रिकॉर्डलेस सप्लाई चेन
- नियमित निरीक्षण का अभाव
- व्यापारिक-प्रशासनिक रिश्तों पर शक
निष्कर्ष: मामला अब “दवा तस्करी” से आगे बढ़कर “सिस्टम एक्सपोज़र” बन चुका है
बिजनौर में सामने आया यह प्रकरण केवल
कोडीन कफ सीरप की अवैध सप्लाई भर नहीं है।
यह अब:
- प्रशासनिक चूक,
- निरीक्षण में वर्षों की ढिलाई,
- मेडिकल यूनियन की भूमिका,
- और संभावित मिलीभगत
जैसे कई स्तरों को उजागर करता दिखाई दे रहा है।
सूत्रों के ताज़ा दावों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यह मामला
जांच आगे बढ़ने पर जिले की अब तक की सबसे बड़ी दवा तस्करी + प्रशासनिक विफलता + संभावित उद्यमिक–अधिकारी गठजोड़ की कहानी बन सकता है।












