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“बिजनौर में गूंजा श्री अन्न का जयघोष — ‘मिलेट्स महोत्सव 2025’ में किसानों ने रचा नया इतिहास”

“बिजनौर में गूंजा श्री अन्न का जयघोष — ‘मिलेट्स महोत्सव 2025’ में किसानों ने रचा नया इतिहास”

“नगीना कृषि विज्ञान केंद्र में उमड़ा किसानों का जनसैलाब — मुख्य अतिथि अशोक कटारिया बोले, ‘मिलेट्स खेती से खुशहाल होगा किसान, स्वस्थ होगा भारत’”

Special Report by Avnish Tyagi 

दिनांक: 01 नवम्बर 2025
📍 स्थान: कृषि विज्ञान केंद्र, नगीना, जनपद बिजनौर

कृषि की नई सुबह — श्री अन्न के नाम बिजनौर का भव्य महोत्सव

आज बिजनौर का कृषि विज्ञान केंद्र नगीना किसी उत्सव स्थल से कम नहीं दिख रहा था। चारों ओर मोटे अनाज (मिलेट्स) के रंग, खुशबू और किसानों का जोश नजर आ रहा था।
हर स्टॉल पर चर्चा थी — “अब लौटेगा मोटे अनाज का जमाना, अब फिर जगेगा देसी स्वाद और सेहत का सपना।”

‘जनपद स्तरीय मिलेट्स महोत्सव-2025’ का उद्देश्य केवल एक मेला भर नहीं, बल्कि किसानों के जीवन में ‘श्री अन्न क्रांति’ की ज्योति जलाना था।
इस आयोजन ने किसानों में नई सोच और उत्साह का संचार किया — परंपरा, तकनीक और नवाचार का ऐसा संगम जहाँ कृषि के भविष्य की झलक साफ दिखी।

मुख्य अतिथि अशोक कटारिया ने दिया स्वावलंबन का संदेश

मुख्य अतिथि अशोक कटारिया, विधान परिषद सदस्य एवं पूर्व परिवहन मंत्री, उत्तर प्रदेश सरकार ने जब मंच संभाला तो तालियों की गड़गड़ाहट से पूरा परिसर गूंज उठा।
उन्होंने अपने प्रेरणादायी संबोधन में कहा —

“मिलेट्स की खेती हमारे पूर्वजों की परंपरा और हमारे भविष्य की जरूरत है।
यह खेती किसानों की आमदनी बढ़ाएगी, शरीर को स्वस्थ रखेगी और पर्यावरण को भी बचाएगी।
अब समय आ गया है कि हर खेत में श्री अन्न की बयार बहे।” 

कटारिया जी ने युवाओं से विशेष अपील की कि वे कृषि को स्टार्टअप और रोजगार के अवसर के रूप में अपनाएँ। उन्होंने कहा, “जो युवा आज खेती में तकनीक और नवाचार लाएगा, वही कल का असली उद्यमी होगा।”

कृषि विभाग के स्टॉल बने आकर्षण का केंद्र

मेले में कृषि, उद्यान, पशुपालन, मत्स्य, महिला एवं बाल विकास सहित कई विभागों ने सूचनाप्रद एवं आकर्षक प्रदर्शनी स्टॉल लगाए।
हर स्टॉल पर किसानों की भीड़ उमड़ी रही —

  • कुछ किसान बाजरा और कोदो मिलेट्स के बीज पैकेट्स देख रहे थे,
  • तो कुछ मिलेट्स आधारित बेकरी उत्पादों का स्वाद ले रहे थे,
  • महिलाएं फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स और घरेलू उत्पाद निर्माण तकनीक के बारे में सीख रही थीं।

यहां तक कि छोटे छात्र भी मिलेट्स से बनी एनर्जी बार, लड्डू और कुकीज़ को चखकर बोले — “अब तो ये श्री अन्न वाला लड्डू ही चाहिए!” 

जिला कृषि अधिकारी जसवीर सिंह तेवतिया ने दी राहत की खुशखबरी

इस अवसर पर जिला कृषि अधिकारी जसवीर सिंह तेवतिया ने किसानों को भरोसा दिलाया कि
जनपद के सभी विकास खंडों में सरसों एवं गेहूं की उन्नत किस्मों के बीज पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं।

उन्होंने कहा —

“कृषक भाई अपने आधार कार्ड से POS मशीन पर अंगूठा लगाकर इन बीजों को आधे मूल्य पर क्रय कर सकते हैं।
शासन की मंशा है कि हर किसान तक उन्नत बीज और तकनीक आसानी से पहुँचे।”

इस घोषणा से किसानों के चेहरों पर मुस्कान छा गई — मेले में “जय किसान” के नारे गूंज उठे।

मिलेट्स: खेती ही नहीं, जीवनशैली भी

महोत्सव में विशेषज्ञों ने बताया कि मिलेट्स केवल फसल नहीं बल्कि ‘स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों की सुरक्षा कवच’ हैं।
इनमें प्रोटीन, फाइबर, आयरन और कैल्शियम की प्रचुर मात्रा होती है।
कम पानी और कम उर्वरक में तैयार होने वाली ये फसलें मिट्टी की गुणवत्ता और जैव विविधता को भी संरक्षित रखती हैं।

“मिलेट्स है स्मार्ट फूड — किसान के लिए फायदेमंद, उपभोक्ता के लिए पौष्टिक और धरती के लिए सुरक्षित।” 

किसानों को सम्मान और प्रेरणा का मंच मिला

मेले में उत्कृष्ट कार्य करने वाले किसान भाइयों, महिला स्वयं सहायता समूहों और युवा कृषक नवप्रवर्तकों को सम्मानित किया गया।
इनमें से कई किसान ऐसे थे जिन्होंने पहले ही बाजरा, ज्वार, रागी, कोदो और कुटकी जैसी फसलों से अपनी आमदनी दुगनी कर ली है।

उनके अनुभव सुनकर अन्य किसानों में भी नई उमंग दिखी —
“अब हम भी मिलेट्स अपनाएँगे, अपनी खेती को नई दिशा देंगे,” कई किसानों ने मंच से यह संकल्प लिया।

रंग, रौनक और राग से सजा कृषि विज्ञान केंद्र परिसर

कृषि विज्ञान केंद्र नगीना का परिसर आज पारंपरिक लोक संस्कृति और आधुनिक तकनीक के संगम से जीवंत था।
एक ओर लोकगीतों की मधुर धुनें गूंज रहीं थीं, तो दूसरी ओर ड्रोन तकनीक, सोलर पंप और नई फसल किस्मों का प्रदर्शन किसानों को नई प्रेरणा दे रहा था।
बच्चे “श्री अन्न” पर आयोजित पेंटिंग प्रतियोगिता में जुटे थे, जबकि महिलाएं “मिलेट्स व्यंजन प्रतियोगिता” में स्वाद और नवाचार का संगम पेश कर रही थीं।

निष्कर्ष: बिजनौर से उठी श्री अन्न क्रांति की लहर

‘जनपद स्तरीय मिलेट्स महोत्सव – 2025’ ने साबित किया कि बिजनौर केवल खेती में ही नहीं, बल्कि ‘स्मार्ट एग्रीकल्चर मूवमेंट’ की दिशा में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है।
यह आयोजन किसानों के लिए ज्ञान, नवाचार, प्रेरणा और आत्मनिर्भरता का संगम साबित हुआ।

बिजनौर का यह संदेश पूरे प्रदेश में गूंजा —
“मिलेट्स अपनाओ, सेहत बढ़ाओ, किसान बचाओ।”

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