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“बिजनौर के नए CDO रणविजय सिंह बोले — शासन की प्राथमिकताएं ही होंगी मेरी प्राथमिकता, पारदर्शी विकास होगा जनविश्वास की पहचान”

“बिजनौर के नए CDO रणविजय सिंह बोले — शासन की प्राथमिकताएं ही होंगी मेरी प्राथमिकता, पारदर्शी विकास होगा जनविश्वास की पहचान”

“रेशम विभाग से आईएएस तक का सफर — एम.एससी. (जूलॉजी) में गोल्ड मेडलिस्ट रणविजय सिंह अब बिजनौर में विकास की नई इबारत लिखने को तैयार”

📍बिजनौर, 31 अक्टूबर | संवाददाता रिपोर्ट:
जनपद बिजनौर में प्रशासनिक मशीनरी को नई दिशा देने के उद्देश्य से आईएएस रणविजय सिंह ने मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) का कार्यभार संभाल लिया है। परिचयात्मक भेंट वार्ता के दौरान उन्होंने आत्मीय और सधे हुए अंदाज़ में कहा —

“शासन की प्राथमिकताएं ही मेरी प्राथमिकता रहेंगी। जनपद के विकास कार्यों में पारदर्शिता, तेजी और जनभागीदारी मेरा मूल मंत्र होगा।”

उनके शब्दों में प्रशासनिक दृढ़ता के साथ-साथ संवेदनशीलता भी झलक रही थी।

शिक्षा में उत्कृष्टता — एक मेधावी अधिकारी की मिसाल

सीडीओ रणविजय सिंह ने अपनी शैक्षणिक यात्रा के बारे में बताते हुए कहा कि “मेहनत, अनुशासन और लक्ष्य की स्पष्टता ही सफलता की कुंजी है।”
उन्होंने दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय से एम.एससी. (जूलॉजी) में स्वर्ण पदक प्राप्त किया।

उनकी शिक्षा यात्रा क्रमशः —

  • हाईस्कूल (1991) — प्रथम श्रेणी
  • इंटरमीडिएट (1993) — प्रथम श्रेणी
  • बी.एससी. (1997) — प्रथम श्रेणी
  • एम.एससी. (1999) — प्रथम श्रेणी

संगठित सोच, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और योजनाबद्ध कार्यशैली उनके व्यक्तित्व की प्रमुख पहचान हैं।

सेवा की यात्रा — हर स्तर पर अनुभव की चमक

रणविजय सिंह ने वर्ष 2003 में रेशम विभाग (Sericulture) में अपने करियर की शुरुआत की। यह वह दौर था जब वे ग्रामीण अर्थव्यवस्था के ताने-बाने और आम जन के संघर्ष को नज़दीक से समझ रहे थे।

इसके बाद 2005 से 2008 तक उन्होंने रोजगार विभाग में कार्य किया, जहाँ युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने और रोजगार सृजन की दिशा में प्रभावी कदम उठाए।

वर्ष 2008 में पीसीएस अधिकारी के रूप में चयनित होकर उन्होंने बलरामपुर, भदोही, बस्ती, मऊ, महाराजगंज और बदायूं जैसे विविध जिलों में एसडीएम के रूप में उल्लेखनीय कार्य किया।

तत्पश्चात गाज़ीपुर, संत कबीर नगर, वाराणसी और गाज़ियाबाद में अपर जिलाधिकारी (ADM) के रूप में उन्होंने प्रशासनिक जिम्मेदारियों को नई ऊँचाइयों तक पहुंचाया।
जुलाई 2020 में उन्हें आईएएस पद पर पदोन्नत किया गया — और अब बिजनौर को मिला है उनका परिपक्व नेतृत्व।

‘विकास की गति’ और ‘जनविश्वास’ — रणविजय सिंह की प्राथमिकता

भेंट वार्ता के दौरान रणविजय सिंह ने कहा कि उनका ध्यान शासन की प्राथमिकताओं को धरातल पर उतारने पर रहेगा।
उन्होंने कहा —

“सरकार की योजनाओं का लाभ हर पात्र व्यक्ति तक पहुंचे, यह सुनिश्चित करना हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। मैं चाहता हूं कि जनता शासन को अपने द्वार पर महसूस करे।”

उन्होंने ग्रामीण विकास, महिला सशक्तिकरण, पोषण अभियान, स्वच्छ भारत मिशन, रोजगार सृजन और शिक्षा को अपनी प्राथमिक कार्यसूची बताया।

“विकास का अर्थ केवल निर्माण कार्य नहीं, बल्कि जनता में विश्वास और संतोष का निर्माण है,”
उन्होंने जोड़ा।

💬 नवाचार और तकनीक का संतुलन

रणविजय सिंह ने संकेत दिया कि वे बिजनौर में प्रशासनिक प्रक्रियाओं को डिजिटल, पारदर्शी और परिणामोन्मुख बनाएंगे।
वे चाहते हैं कि जनपद के अधिकारी और कर्मचारी टीम भावना से काम करें, और योजनाओं का प्रभाव मात्र आंकड़ों में नहीं, बल्कि जमीनी बदलाव में दिखे।

जनपद में नई ऊर्जा — उम्मीदों का संचार

सीडीओ रणविजय सिंह की सादगी और संवादशीलता ने पहले ही प्रशासनिक गलियारों में सकारात्मक माहौल बना दिया है। अधिकारियों और कर्मचारियों ने उन्हें एक निष्पक्ष, कर्मठ और व्यवहारिक अधिकारी के रूप में देखा है।
जनता भी यह उम्मीद कर रही है कि बिजनौर अब उनके नेतृत्व में तेजी से बदलता हुआ, पारदर्शी और नवाचारी जनपद बनेगा।

🔹 संक्षेप में:

क्षेत्र प्रमुख दृष्टिकोण
शासन की प्राथमिकता जनहित व विकास
प्रमुख फोकस ग्रामीण विकास, स्वच्छता, पोषण, महिला सशक्तिकरण
कार्यशैली पारदर्शिता, परिणामोन्मुखता, जनसंपर्क
लक्ष्य योजनाओं का धरातलीकरण और जनविश्वास की स्थापना

📌 निष्कर्ष:
आईएएस रणविजय सिंह की प्रशासनिक यात्रा सिर्फ अनुभवों का संग्रह नहीं, बल्कि उस दृष्टिकोण का प्रतीक है जो शासन को जनहित से जोड़ता है।
उनका यह कथन —

“शासन की प्राथमिकताएं ही मेरी प्राथमिकता हैं।”
सिर्फ एक वक्तव्य नहीं, बल्कि बिजनौर के विकास का रोडमैप बन सकता है।

 

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