“अब शिक्षा में जवाबदेही तय होगी!” — डीएम जसजीत कौर का बड़ा एक्शन, लापरवाह अफसरों पर गिरेगी गाज
ऑपरेशन कायाकल्प की समीक्षा बैठक में जिलाधिकारी ने दिखाई सख्ती, कहा— “निरीक्षण रिपोर्ट फाइलों में नहीं, स्कूलों में दिखनी चाहिए”
रिपोर्ट अवनीश त्यागी
बिजनौर, 30 अक्टूबर, 2025।
बिजनौर की जिलाधिकारी श्रीमती जसजीत कौर एक बार फिर अपने सख्त और परिणामपरक कार्यशैली के लिए सुर्खियों में हैं। गुरुवार को कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित जिला स्तरीय टास्क फोर्स एवं ऑपरेशन कायाकल्प की समीक्षा बैठक में उन्होंने शिक्षा विभाग के अधिकारियों को तीखे शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि अब स्कूलों के निरीक्षण में कोई भी लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
बैठक के दौरान डीएम ने विभागीय अधिकारियों से नाराजगी जताते हुए कहा कि कई अधिकारियों ने अब तक अपने-अपने क्षेत्रों में स्कूलों का निरीक्षण नहीं किया है, जो कार्य संस्कृति में ढिलाई का परिचायक है। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि ऐसे सभी अधिकारियों से जवाब-तलब किया जाए और रिपोर्ट तत्काल प्रस्तुत की जाए।
“ऑपरेशन कायाकल्प” में नई ऊर्जा का संचार
बैठक में जिलाधिकारी ने कहा कि ऑपरेशन कायाकल्प केवल भवनों की मरम्मत तक सीमित योजना नहीं है, बल्कि यह शिक्षा व्यवस्था में गुणात्मक सुधार का अभियान है। उन्होंने कहा —
“हर अधिकारी यह याद रखे कि यह बच्चों के भविष्य से जुड़ा विषय है। स्कूल निरीक्षण एक औपचारिकता नहीं, बल्कि जिम्मेदारी है। इसे गंभीरता से लेना ही होगा।”
उन्होंने बेसिक शिक्षा विभाग को आदेश दिया कि निर्धारित निरीक्षण रोस्टर का शत-प्रतिशत पालन किया जाए और किसी भी स्तर पर लापरवाही पाए जाने पर तत्काल कार्यवाही की जाए।
कस्तूरबा गांधी विद्यालयों पर विशेष ध्यान
डीएम ने विशेष रूप से कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों के निरीक्षण की बात उठाई। उन्होंने कहा कि इन विद्यालयों में छात्राओं की सुरक्षा, स्वच्छता और शिक्षा की गुणवत्ता सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
उन्होंने उप जिलाधिकारी एवं जिला स्तरीय अधिकारियों को संयुक्त रूप से निरीक्षण करने के निर्देश दिए ताकि हर स्तर पर पारदर्शिता और सुधार सुनिश्चित हो सके।
जर्जर स्कूलों में पोलिंग केंद्रों पर भी सख्त निर्देश
निर्वाचन की तैयारियों को ध्यान में रखते हुए डीएम ने आदेश दिया कि जिन विद्यालयों की इमारतें जर्जर हैं और वहां पोलिंग केंद्र प्रस्तावित हैं, उनके स्थान पर आस-पास के शासकीय या अर्द्धशासकीय भवनों को चिन्हित किया जाए। उन्होंने कहा कि एसडीएम स्वयं निरीक्षण कर सुरक्षित विकल्प तैयार करें, ताकि आगामी चुनाव प्रक्रिया में किसी प्रकार की बाधा न आए।
कंप्यूटर रखरखाव और डिजिटल निगरानी पर जोर
डीएम ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में अब डिजिटल सशक्तिकरण की आवश्यकता है। उन्होंने हर स्कूल में कंप्यूटरों की नियमित मेंटेनेंस सुनिश्चित करने के लिए एक-एक नोडल अधिकारी नामित करने का आदेश दिया।
“तकनीक के बिना शिक्षा अधूरी है। यदि कोई सिस्टम खराब है, तो उसकी मरम्मत तुरंत होनी चाहिए। हर माह रिपोर्ट ली जाएगी।”
बच्चों के स्वेटर और रसोइयों के मानदेय पर भी फोकस
डीएम ने कहा कि बच्चों को ठंड से बचाने के लिए शासन द्वारा अभिभावकों के खातों में स्वेटर खरीद के लिए धनराशि पहले ही भेजी जा चुकी है। ऐसे में अभिभावकों की बैठक बुलाकर सुनिश्चित किया जाए कि प्रत्येक बच्चे को दो-दो स्वेटर समय से मिलें।
इसके साथ ही उन्होंने मिड डे मील की रसोइयों को उनका मानदेय समय पर दिलाने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मजदूर वर्ग की मेहनत का उचित मूल्य समय पर मिले, यह शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
बच्चों के आधार कार्ड के लिए विशेष कैंप लगेंगे
जिलाधिकारी ने शिक्षा विभाग को आदेश दिया कि जिन बच्चों के आधार कार्ड अभी तक नहीं बने हैं, उनके लिए विशेष शिविर आयोजित किए जाएं ताकि किसी भी योजना का लाभ किसी बच्चे से छूट न जाए।
“शिथिलता नहीं, जवाबदेही चाहिए” — डीएम का सख्त संदेश
डीएम जसजीत कौर ने बैठक में साफ कहा —
“अब निरीक्षण रिपोर्ट केवल फाइलों में नहीं, स्कूलों में नजर आनी चाहिए। शिक्षा बच्चों का अधिकार है, और अफसरों की जवाबदेही भी।”
उनके इस सख्त रुख से साफ संकेत है कि अब जिले में शिक्षा व्यवस्था की अनदेखी पर कोई रियायत नहीं मिलेगी।
बैठक में शामिल रहे वरिष्ठ अधिकारी
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी रणविजय सिंह, जिला विकास अधिकारी रचना गुप्ता, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी सचिन कासना, सहायक बीईओ समेत विभिन्न विभागों के अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे।
विश्लेषण: शिक्षा सुधार की दिशा में निर्णायक कदम
डीएम जसजीत कौर का यह रुख बताता है कि बिजनौर में अब शिक्षा सुधार फाइलों से निकलकर जमीनी हकीकत बन रहा है।
ऑपरेशन कायाकल्प के तहत स्कूलों में सफाई, सुरक्षा, डिजिटल शिक्षा और पारदर्शिता को नया आयाम देने की दिशा में यह कदम प्रशासनिक ईमानदारी और नेतृत्व क्षमता का उदाहरण है।
यदि इसी गति से निरीक्षण और सुधार कार्य चलते रहे, तो निकट भविष्य में बिजनौर जिले के सरकारी स्कूल राज्य स्तरीय मॉडल के रूप में उभर सकते हैं।
निष्कर्ष:
डीएम जसजीत कौर की यह सख्ती सिर्फ चेतावनी नहीं, बल्कि एक संकेत है बदलाव का।
बिजनौर के स्कूलों में अब “कागजी विकास” नहीं, बल्कि वास्तविक कायाकल्प दिखने की उम्मीद है — जहां प्रशासन, शिक्षक और अभिभावक तीनों मिलकर बच्चों का भविष्य संवारेंगे।










