सरकारी तालाब और बंजर भूमि पर दबंगों का कब्ज़ा! सरकारी ज़मीन बनी अवैध कमाई का अड्डा — प्रशासन मौन
नगीना, बिजनौर से विशेष रिपोर्ट — तालाब की जगह पक्की दुकानें, वसूली का खुला खेल, ग्रामीण बोले: “अब न्याय कौन देगा?”
बिजनौर | विशेष संवाददाता रिपोर्ट
उत्तर प्रदेश के जनपद बिजनौर के तहसील नगीना क्षेत्र में सरकारी ज़मीन पर कब्ज़े का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। ग्राम कोतवाली क्षेत्र में स्थित खसरा संख्या 115 (तालाब) और खसरा संख्या 116 (बंजर भूमि), जो राजस्व अभिलेखों में साफ़ तौर पर सरकारी संपत्ति के रूप में दर्ज हैं, अब दबंगों की अवैध कमाई का ज़रिया बन चुके हैं।
जहां कभी तालाब में बरसाती पानी लहराया करता था, आज वहां कंक्रीट की दुकानें खड़ी हैं। बताया जा रहा है कि इन दुकानों को किराए पर देकर हर महीने मोटी रकम वसूली जा रही है — मानो सरकारी ज़मीन उनकी निजी जागीर हो।
अवैध कब्ज़े की पूरी कहानी
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, यह भूमि नगीना-बिजनौर मार्ग पर स्थित है, जो पहले गांव के जलस्रोत के रूप में जानी जाती थी। समय के साथ कुछ प्रभावशाली लोगों ने इस पर धीरे-धीरे कब्ज़ा जमाना शुरू किया, और अब यहां पक्की दुकानें और व्यावसायिक प्रतिष्ठान बन चुके हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, संबंधित पटवारी और स्थानीय राजस्व कर्मचारी लंबे समय से इस प्रकरण पर आंख मूंदे हुए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि अधिकारी और कब्ज़ाधारी आपस में मिले हुए हैं, और यही कारण है कि सरकारी भूमि पर अवैध निर्माण जारी है।
📍 गांव वालों का आरोप: “तालाब को दुकान में बदल दिया गया”
ग्रामीणों का कहना है कि तालाब कभी गांव की पहचान था — बरसात के पानी का मुख्य स्रोत, मवेशियों की प्यास बुझाने की जगह, और आसपास की ज़मीन के लिए नमी का आधार।
लेकिन अब तालाब की जगह पक्की दुकानों की कतार है।
“यहां पहले मछलियां तैरती थीं, अब लोग किराया वसूलते हैं। प्रशासन जानता है, पर करता कुछ नहीं,”
— एक स्थानीय वृद्ध किसान ने व्यथा जताई।
भूमि माफिया का बढ़ता हौसला
- सरकारी रिकॉर्ड में भूमि अब भी तालाब और बंजर के रूप में दर्ज है।
- दबंगों ने पक्के निर्माण कर दुकानें बना ली हैं।
- दुकानों को किराए पर देकर हर महीने वसूली हो रही है।
- शिकायतें कई बार ऊपर तक भेजी गईं, लेकिन कार्रवाई का कोई अता-पता नहीं।
- स्थानीय कर्मचारी व अधिकारियों पर मिलीभगत के आरोप।
जनता का सवाल — “कब होगी अवैध कब्ज़ाधारियों पर कार्रवाई?”
गांव के लोगों ने प्रशासन से गुहार लगाई है कि इन सरकारी ज़मीनों को मुक्त कराकर पुनः तालाब और हरित क्षेत्र के रूप में बहाल किया जाए। ग्रामीणों का कहना है कि यदि अब भी कार्रवाई नहीं हुई, तो आने वाले समय में गांव जल संकट से जूझेगा और पारिस्थितिक संतुलन बिगड़ जाएगा।
प्रदेश सरकार जहां एक ओर “अवैध कब्ज़ा मुक्त अभियान” चला रही है, वहीं ज़मीनी स्तर पर अधिकारियों की निष्क्रियता और भ्रष्टाचार इस मुहिम को पस्त कर रहे हैं।
प्रशासन पर उठ रहे सवाल
राजस्व विभाग से जुड़े सूत्र बताते हैं कि अगर तालाब और बंजर भूमि पर निर्माण को तत्काल ध्वस्त नहीं किया गया, तो यह अन्य ग्रामीण इलाकों के लिए खतरनाक उदाहरण बन सकता है।
राज्य सरकार की कई योजनाएं — जैसे जल संरक्षण मिशन और तालाब पुनरुद्धार अभियान — इन अवैध कब्ज़ों के कारण प्रभावित हो रही हैं।
जनहित में उठी मांग
- तत्काल सर्वे कर खसरा संख्या 115 और 116 को सरकारी अभिलेखों के अनुरूप बहाल किया जाए।
- सभी अवैध दुकानों को ध्वस्त कर भूमि को खाली कराया जाए।
- राजस्व अधिकारियों की भूमिका की जांच कर कार्रवाई की जाए।
- गांव के हित में तालाब का पुनर्निर्माण कराया जाए।
विश्लेषणात्मक टिप्पणी
यह प्रकरण केवल एक गांव की कहानी नहीं, बल्कि एक चेतावनी है —
अगर सरकारी भूमि पर कब्ज़े इसी तरह बढ़ते रहे तो आने वाले वर्षों में तालाबों और बंजर भूमि का नामोनिशान मिट जाएगा। सवाल यह नहीं कि अवैध कब्ज़ा किसने किया, बल्कि यह है कि प्रशासन अब तक क्या कर रहा था?
📌 स्थान: ग्राम कोतवाली, तहसील नगीना, जनपद बिजनौर
मामला: सरकारी तालाब और बंजर भूमि पर अवैध कब्ज़ा व निर्माण
स्थिति: शिकायत दर्ज, कार्रवाई की प्रतीक्षा
“तालाब सूखते हैं तो सिर्फ़ पानी नहीं, सभ्यता की जड़ें भी सूख जाती हैं।”
— ग्रामीण चेतना मंच की टिप्पणी










