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“पुलिस केवल वर्दी नहीं, यह जनसेवा और बलिदान की प्रतीक है” — मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

    पुलिस स्मृति दिवस 2025

शहादत को सलाम, समर्पण को प्रण – मुख्यमंत्री ने दी वीर जवानों को श्रद्धांजलि

“पुलिस केवल वर्दी नहीं, यह जनसेवा और बलिदान की प्रतीक है” — मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

मुख्य आकर्षण

  • मुख्यमंत्री ने पुलिस स्मारक पर शहीदों को पुष्पांजलि अर्पित की

  • 3.5 करोड़ रुपये पुलिस कल्याण कोष के लिए, 8 करोड़ रुपये परिवार सहायता निधि हेतु घोषित

  • प्रदेशभर में पुलिस परेड, श्रद्धांजलि समारोह और स्मृति सभाएँ आयोजित

  • 1959 में लद्दाख में शहीद हुए 10 सीआरपीएफ जवानों की याद में हर वर्ष मनाया जाता है पुलिस स्मृति दिवस

  • मुख्यमंत्री बोले — “पुलिस के बिना समाज में सुरक्षा, शांति और विकास असंभव है”

समाचार विस्तार

लखनऊ, 21 अक्टूबर 2025।
पुलिस स्मृति दिवस के अवसर पर प्रदेश की राजधानी में आयोजित भव्य समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शहीद पुलिस कर्मियों को श्रद्धांजलि अर्पित की। पुलिस लाइंस में आयोजित इस कार्यक्रम में पुलिस बैंड की धुनों के बीच मौन रखकर वीर जवानों को नमन किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि —

“पुलिस बल ने न केवल अपराध से लड़ाई लड़ी है, बल्कि समाज के हर वर्ग के लिए सुरक्षा की एक दीवार खड़ी की है। इनका त्याग और बलिदान हम सबके लिए प्रेरणा है।”

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने पुलिस कर्मियों के कल्याण के लिए नए आर्थिक प्रावधानों की घोषणा की —

  • ₹3.5 करोड़ रुपये पुलिस कल्याण कोष में जोड़े जाएंगे।
  • ₹8 करोड़ रुपये शहीद परिवारों के पुनर्वास व सहायता हेतु आवंटित।
  • आगामी वित्तीय वर्ष में 5 नई पुलिस आवासीय कॉलोनियों के निर्माण का प्रस्ताव।

शहादत की गाथा — एक इतिहास, एक गर्व

पुलिस स्मृति दिवस की शुरुआत 1959 में लद्दाख के हॉट स्प्रिंग्स क्षेत्र में हुई थी, जब चीनी सेना के साथ मुठभेड़ में सीआरपीएफ के 10 जवान शहीद हो गए थे।
उनकी स्मृति में हर वर्ष 21 अक्टूबर को देशभर में यह दिवस मनाया जाता है।

प्रदेश के विभिन्न जिलों में आयोजित कार्यक्रमों में पुलिस अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और परिजनों ने शहीदों की तस्वीरों पर पुष्प अर्पित किए।
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भोपाल के लाल परेड मैदान में श्रद्धांजलि दी, जबकि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय रायपुर में आयोजित मुख्य कार्यक्रम में शामिल हुए।

मुख्यमंत्री का संदेश: “स्मार्ट पुलिसिंग ही नए भारत की रीढ़”

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि सरकार पुलिस बल को आधुनिक तकनीक, संचार प्रणाली और साइबर प्रशिक्षण से सशक्त कर रही है।
उन्होंने कहा —

“स्मार्ट पुलिसिंग के बिना स्मार्ट सिटी की परिकल्पना अधूरी है। अब अपराध की रोकथाम के साथ-साथ समाज में भरोसा बढ़ाना भी पुलिस की प्राथमिकता है।”

जनता से जुड़ाव: ‘पुलिस मित्र’ पहल को मिलेगा विस्तार

कार्यक्रम में “पुलिस मित्र” पहल को और सशक्त बनाने की घोषणा की गई। इसके तहत नागरिकों को अपराध नियंत्रण, महिला सुरक्षा और यातायात सुधार में सहयोग के लिए जोड़ा जाएगा।
साथ ही, प्रदेशभर में ‘जनपुलिस संवाद कार्यक्रम’ आयोजित किए जाएंगे ताकि जनता और पुलिस के बीच की दूरी घट सके।

कार्यक्रम की झलकियाँ

  • मुख्यमंत्री ने पुलिस स्मारक पर पुष्पचक्र अर्पित कर शहीदों को श्रद्धांजलि दी
  • पुलिस बैंड द्वारा शोक धुन प्रस्तुत की गई
  • शहीद परिवारों को सम्मान पत्र और आर्थिक सहायता प्रदान की गई
  • बच्चों ने “जय जवान – जय पुलिस” विषय पर देशभक्ति कविताएँ प्रस्तुत कीं

विश्लेषण: श्रद्धांजलि से आगे — कल्याण और विश्वास की दिशा में बड़ा कदम

पुलिस स्मृति दिवस केवल श्रद्धांजलि का दिन नहीं, बल्कि पुलिस-जन विश्वास को पुनः सुदृढ़ करने का अवसर भी है।
योगी सरकार की हालिया घोषणाएँ यह दर्शाती हैं कि राज्य अब पुलिस कल्याण, तकनीकी सशक्तिकरण और जनसंपर्क को प्राथमिकता दे रहा है।

यह प्रयास न केवल पुलिस कर्मियों के मनोबल को ऊँचा करेगा बल्कि समाज में सुरक्षा और सहयोग की भावना को भी मजबूत करेगा।

“वर्दी पहनना एक जिम्मेदारी है, और उस जिम्मेदारी को निभाते हुए जो शहीद हुए — वे हमारे अमर नायक हैं।”
पुलिस स्मृति दिवस का यह समारोह हमें याद दिलाता है कि शांति की हर सांस किसी पुलिस जवान के साहस से सुरक्षित है।


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