ईंट-भट्टा संचालन के लिए अब जरूरी होगा विनियमन शुल्क जमा करना — 30 नवंबर तक बिना ब्याज, उसके बाद लगेगा ब्याज
📍बिजनौर, 14 अक्टूबर 2025 | संवाददाता रिपोर्ट
जिलाधिकारी जसजीत कौर ने जनपद के समस्त ईंट-भट्टा स्वामियों को निर्देशित किया है कि वे आगामी ईंट-भट्टा सत्र 2025-26 के लिए निर्धारित विनियमन शुल्क (Regulating Fees) समय से जमा करें। शासन स्तर से जारी आदेश के अनुसार, बिना विनियमन शुल्क जमा किए कोई भी ईंट-भट्टा संचालित नहीं किया जा सकेगा।
🔹 शासन के नए निर्देश
विशेष सचिव, भूतत्व एवं खनिकर्म अनुभाग, उत्तर प्रदेश शासन द्वारा जारी पत्र के मुताबिक, उ.प्र. उपखनिज (परिहार) नियमावली, 2021 के नियम 21(2) के तहत अब ईंट-भट्टों से “पायों की संख्या” के आधार पर विनियमन शुल्क लिया जाएगा।
- यह शुल्क ईंट-भट्टा सत्र 01 अक्टूबर 2025 से 30 सितम्बर 2026 तक मान्य रहेगा।
- शुल्क का निर्धारण गत सत्र (2024-25) में देय विनियमन शुल्क के अनुसार ही किया जाएगा।
🔹 आवेदन प्रक्रिया ऑनलाइन
ईंट-भट्टा स्वामियों को अब पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन पोर्टल
👉 http://upmines-upsdc-gov-in
पर पूरी करनी होगी। आवेदन के साथ निम्नलिखित दस्तावेज एवं विवरण अनिवार्य होंगे:
- ₹2000 का आवेदन शुल्क
- भट्टा स्वामी का विवरण एवं Geo-coordinate सहित स्थल की जानकारी
- भट्टा का प्रकार (सामान्य/जिग-जैग)
- पायों की संख्या एवं मिट्टी खनन क्षेत्र का विवरण
- बकाया न होने का शपथपत्र
🔹 शुल्क जमा करने की प्रक्रिया
- पोर्टल पर भरे गए विवरण के अनुसार पायों की संख्या के आधार पर विनियमन शुल्क एवं पलोथन राशि निर्धारित होगी।
- यह धनराशि ऑनलाइन “0853-अलौह खनन तथा धातुकर्म उद्योग, 107-लघु खनिज रियायत शुल्क” शीर्षक के अंतर्गत जमा करनी होगी।
- भुगतान के बाद पोर्टल से “विनियमन शुल्क जमा प्रमाण पत्र” जनरेट किया जा सकेगा।
🔹 30 नवंबर तक बिना ब्याज
जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि
30 नवंबर 2025 तक जमा की गई राशि पर कोई ब्याज नहीं लगेगा।
इसके बाद की जमा राशि पर नियम अनुसार ब्याज देय होगा।
🔹 नियम उल्लंघन पर कार्रवाई
- बिना शुल्क जमा किए संचालित भट्टों पर कड़ी कार्यवाही की जाएगी।
- यदि किसी भट्टे में घोषित पायों से अधिक पाए जाते हैं, तो राजस्व क्षति की वसूली की जाएगी।
- पायों की संख्या या स्थल परिवर्तन होने पर, 30 दिन के भीतर सूचना देना अनिवार्य होगा। सूचना न देने पर संबंधित भट्टा स्वामी पर भी कार्रवाई की जाएगी।
🔹 प्रशासन की मंशा
यह कदम ईंट-भट्टा उद्योग को पारदर्शी, पर्यावरण-संवेदी और राजस्व-अनुशासित बनाने की दिशा में अहम माना जा रहा है। जिलाधिकारी ने सभी भट्टा स्वामियों से समयबद्ध अनुपालन की अपील करते हुए कहा कि “सरकारी नियमों का पालन ही सुचारु संचालन की कुंजी है।”
निष्कर्ष:
विनियमन शुल्क प्रणाली से न केवल भट्टा संचालन की निगरानी मजबूत होगी, बल्कि पर्यावरणीय मानकों और राजस्व पारदर्शिता को भी बल मिलेगा। समय पर शुल्क जमा करने वाले भट्टा स्वामियों को शासन की ओर से भविष्य में मिलने वाली सुविधाओं और अनुमतियों में प्राथमिकता दी जाएगी।










