बिजनौर सदर तहसील में किसानों का गुस्सा फूटा
प्रशासनिक वादाखिलाफी से भाकियू की पंचायत अनिश्चितकालीन आंदोलन में बदली
बिजनौर, 15 अक्टूबर 2025 | रिपोर्ट: टार्गेट टीवी लाइव डिजिटल डेस्क
वादे अधूरे, भरोसा टूटा — किसान बोले “अब धरना नहीं, निर्णायक लड़ाई होगी”
बिजनौर जनपद की सदर तहसील पर मंगलवार को भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) की मासिक पंचायत अचानक अनिश्चितकालीन आंदोलन में तब्दील हो गई।
किसानों ने आरोप लगाया कि तहसील प्रशासन ने उनकी समस्याओं के समाधान के जो वादे पिछले महीनों में किए थे, वे आज तक पूरे नहीं हुए।
किसानों के अनुसार, बार-बार पत्राचार, धरना और पंचायतों के बावजूद प्रशासन ने केवल आश्वासन दिए, पर जमीनी स्तर पर कोई सुधार नहीं हुआ। इसी से नाराज होकर तहसील परिसर में किसानों ने धर्मा प्रदर्शन को अनिश्चितकालीन आंदोलन का रूप दे दिया।
नसीरेनैन गांव की चकरोड विवाद बना आंदोलन की चिंगारी
आंदोलन की जड़ में ग्राम नसीरेनैन का एक विवादित चकरोड (राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज सार्वजनिक मार्ग) है।
किसानों का कहना है कि यह चकरोड कई वर्षों से ग़लत दिशा में दर्ज है, जिससे ग्रामीणों की खेती वाली जमीन तक पहुँच बाधित हो रही है।
पिछली पंचायत में तहसील प्रशासन ने वादा किया था कि
“राजस्व अभिलेखों के अनुरूप चकरोड को सीधा कर दिया जाएगा।”
लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी राजस्व विभाग या लेखपाल स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
जब किसानों ने तहसीलदार से इस विषय पर फिर वार्ता की, तो चर्चा बिना किसी ठोस नतीजे के समाप्त हो गई।
यही विफल वार्ता आंदोलन की ट्रिगर पॉइंट साबित हुई।
भाकियू तहसील अध्यक्ष कोमन सिंह बोले — अब धरना तब तक जारी रहेगा जब तक समाधान नहीं होगा
वार्ता विफल होने के बाद भाकियू तहसील अध्यक्ष कोमन सिंह ने सभा को संबोधित करते हुए कहा:
“किसान अब छलावे में नहीं आएंगे। हमने तहसील प्रशासन को कई बार अवसर दिया, पर हर बार केवल वादा मिला। अब जब तक किसानों की समस्या का समाधान नहीं होगा, तब तक धरना तहसील परिसर में जारी रहेगा।”
उन्होंने प्रशासन को आगाह करते हुए कहा कि अगर इस बार भी किसानों की समस्याओं को नजरअंदाज किया गया, तो आंदोलन जनपद स्तर पर तेज़ किया जाएगा और जिलाधिकारी कार्यालय तक रैली निकाली जाएगी।
धरना स्थल पर जुटे सैकड़ों किसान, नेताओं की मौजूदगी से आंदोलन को मिला बल
धरना स्थल पर सुबह से ही किसानों का जमावड़ा शुरू हो गया था।
दोपहर तक तहसील परिसर में सैकड़ों किसानों की भीड़ उमड़ पड़ी।
भाकियू के झंडों और नारों से पूरा परिसर गूंज उठा —
“किसानों की एकता जिंदाबाद”, “भाकियू अमर रहे”, “वादाखिलाफी नहीं चलेगी” जैसे नारों से वातावरण जोशपूर्ण रहा।
धरना स्थल पर प्रमुख रूप से मौजूद रहे:
- डॉ. विजय चौधरी (ब्लॉक अध्यक्ष, मोहम्मदपुर देवमल)
- धर्मेन्द्र कुमार (ब्लॉक अध्यक्ष, हल्दौर)
- मास्टर मुनेन्द्र, टिकम सिंह, हर्षवर्धन सिंह
- जय सिंह, महेन्द्र सिंह, रघुनाथ सिंह, जगत सिंह
- डॉ. भूपेन्द्र सिंह, मुनेन्द्र काकरान, सोमपाल सिंह
- नोबहार सिंह, अशोक कुमार, अरुण कुमार
- विकार अहमद, तेजपाल सिंह, राकेश सिंह, धीरज सिंह
- दिनेश कुमार, हरि सिंह, विकुल कुमार आदि
इन सभी नेताओं ने एक स्वर में कहा कि किसानों के धैर्य की परीक्षा अब बंद होनी चाहिए और प्रशासन को जमीनी कार्यवाही करनी होगी।
किसानों की प्रमुख माँगें
- ग्राम नसीरेनैन की चकरोड को कागज़ी रिकार्ड के अनुरूप सीधा करवाया जाए।
- तहसील प्रशासन द्वारा किसानों को लिखित आश्वासन दिया जाए।
- भूमि विवादों के निस्तारण के लिए विशेष जांच टीम गठित की जाए।
- पुराने लंबित प्रकरणों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाने की समय सीमा तय की जाए।
- राजस्व विभाग में लेखपालों की जवाबदेही तय की जाए ताकि आगे ऐसे विवाद दोबारा न हों।
प्रशासनिक रुख – चुप्पी या तैयारी?
धरने की सूचना मिलते ही तहसील प्रशासन में हलचल मच गई।
सूत्रों के मुताबिक, तहसीलदार और नायब तहसीलदार ने किसानों के प्रतिनिधिमंडल से प्रारंभिक वार्ता की, लेकिन कोई समाधान नहीं निकल पाया।
हालांकि, प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि
“मामले की जांच कराकर उचित कार्रवाई की जाएगी।”
लेकिन किसानों का विश्वास अब केवल कागज़ी बयानबाज़ी पर नहीं है, वे चाहते हैं कि मौके पर कार्यवाही दिखाई दे।
आंदोलन का संभावित असर
विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह धरना लंबा चला तो इसका असर पूरा बिजनौर जनपद झेल सकता है।
तहसील स्तर पर राजस्व कार्य प्रभावित होंगे और ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों का रोष राजनीतिक मुद्दे का रूप भी ले सकता है।
भाकियू की अगली रणनीति अब जनपद व्यापी किसान सम्मेलन करने की बताई जा रही है, जिसमें अन्य ब्लॉकों के किसान भी शामिल होंगे।
निष्कर्ष: किसान बनाम प्रशासन – भरोसे की लड़ाई
भाकियू का यह आंदोलन सिर्फ एक गांव के चकरोड विवाद का प्रतीक नहीं, बल्कि उस व्यवस्था के प्रति अविश्वास का परिणाम है जो किसानों के मुद्दों को फाइलों में दबा देती है।
किसान अब केवल आश्वासन नहीं, कार्रवाई के प्रमाण चाहते हैं।
अगर प्रशासन ने इस आंदोलन को गंभीरता से नहीं लिया, तो यह बिजनौर से निकलकर प्रदेशव्यापी किसान असंतोष का रूप ले सकता है।
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