श्रद्धा और मातृत्व का संगम : पूरे क्षेत्र में श्रद्धापूर्वक मनाया गया अहोई अष्टमी का पर्व
माताओं ने संतान की दीर्घायु और सुख-समृद्धि के लिए रखा व्रत, पूजा-अर्चना के साथ झलकी भक्ति और भावनाओं की छटा
📍 मुरादाबाद से रिपोर्ट | विशेष संवाददाता
जनपद मुरादाबाद के नगरीय एवं ग्रामीण क्षेत्रों में सोमवार को मातृत्व प्रेम और संतान के प्रति समर्पण का प्रतीक पर्व अहोई अष्टमी श्रद्धा, भक्ति और पारंपरिक विधि-विधान के साथ मनाया गया।
शहर के ठाकुरद्वारा, भोजपुर, बहेड़ी ब्रह्मनान, हिमायूपुर, धारकनंगला, मनकुआ मकसूदपुर, वाकरपुर अटायन, डिलारी और कालाझांडा समेत कई गांवों और नगरों में महिलाओं ने अपने बच्चों की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि के लिए उपवास रखा और अहोई माता की आराधना की।
पारंपरिक अनुष्ठानों के साथ पूजन विधि
- माताओं ने सुबह स्नान के बाद उपवास का संकल्प लेकर पूजा स्थलों को गंगाजल से शुद्ध किया।
- घरों की दीवारों पर अहोई माता का चित्र या प्रतीक उकेरकर अथवा बाजार से लाए गए चित्र को लगाया गया।
- पूजा स्थल पर पीले या लाल वस्त्र से सजी चौकी रखी गई, जिस पर माता को अष्टकोणीय रूप में पूर्वोत्तर दिशा में स्थापित किया गया।
- धूप-दीप, फल-फूल, चंदन, चुनरी, नवैध, अक्षत और श्रृंगार सामग्री से माता की अर्चना की गई।
- पूजा के दौरान महिलाओं ने हथेली में गेहूं के सात दाने लेकर अहोई कथा का वाचन और श्रवण किया।
व्रत का पारायण और संतान के लिए आशीर्वाद
- सूर्यास्त के बाद माताओं ने तारों के दर्शन कर आर्ध्य अर्पित किया और संतान को रोली-कुमकुम का तिलक लगाकर आशीर्वाद दिया।
- बच्चों की लंबी उम्र, स्वास्थ्य और सुखमय जीवन की कामना करते हुए व्रत का पारायण (समापन) किया गया।
- कई स्थानों पर सामूहिक कथा वाचन और भजन संध्या के कार्यक्रम भी आयोजित हुए, जिनमें महिलाओं ने भक्ति गीतों के साथ माता का स्मरण किया।
पौराणिक मान्यता और सांस्कृतिक महत्व
- हिंदू मान्यता के अनुसार अहोई अष्टमी व्रत संतान के कल्याण के लिए किया जाता है।
- यह पर्व कार्तिक कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है, ठीक करवा चौथ के चार दिन बाद।
- ऐसा विश्वास है कि इस दिन माता पार्वती ने संतान रक्षण हेतु तपस्या की थी, जिसके बाद उन्होंने महागौरी रूप में संतानों को आशीर्वाद दिया।
- कई महिलाएं यह व्रत संतान प्राप्ति की इच्छा से भी करती हैं।
भक्ति और उल्लास की छटा
अहोई अष्टमी के अवसर पर मंदिरों और घरों में दीपों की रोशनी, गूँजते मंत्रों और भक्ति गीतों से माहौल दिव्य बना रहा।
नारी शक्ति के इस पर्व ने मातृत्व, स्नेह और पारिवारिक एकता का सशक्त संदेश दिया।
🕉️ संक्षेप में – अहोई अष्टमी का भावार्थ
- 🌼 व्रत का उद्देश्य: संतान की दीर्घायु, स्वास्थ्य और समृद्धि
- 🙏 पूजा की विधि: माता अहोई की अष्टकोणीय पूजा, कथा श्रवण, तारों को अर्घ्य
- 🌙 महत्व: मातृत्व प्रेम और पारिवारिक एकता का प्रतीक
- 🧡 मुख्य देवता: माता महागौरी (अहोई माता)












