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खनन में बड़ा खुलासा: वीरू वाला खनन पट्टे में सीमारेखा के बाहर अवैध खुदाई का भंडाफोड़

खनन में बड़ा खुलासा: वीरू वाला खनन पट्टे में सीमारेखा के बाहर अवैध खुदाई का भंडाफोड़

जिलाधिकारी के निर्देश पर हुई सख्त जांच, खनन पट्टा धारक पर कार्रवाई की तैयारी

📍बिजनौर | 11 अक्तूबर, 2025
जनपद बिजनौर में खनन विभाग की लापरवाही और अवैध खनन की शिकायतों के बाद प्रशासन ने अब सख्त रुख अपनाया है। जिलाधिकारी जसजीत कौर के निर्देश पर तहसीलदार नजीबाबाद संतोष कुमार और खनन निरीक्षक सुनील कुमार ने ग्राम वीरू वाला, तहसील नजीबाबाद स्थित खनन पट्टा क्षेत्र का स्थलीय निरीक्षण किया, जहां खनन सीमाओं के उल्लंघन का गंभीर मामला सामने आया।

मुख्य बिंदु (Key Highlights):

  • दिनांक: 11 अक्तूबर, 2025 को जांच टीम ने की मौके पर कार्रवाई।

  • शिकायत स्रोत: खनन निदेशालय एवं सोशल मीडिया से प्राप्त शिकायतों के आधार पर कार्रवाई।

  • स्थान: ग्राम वीरू वाला, तहसील नजीबाबाद, जनपद बिजनौर।

  • निरीक्षण टीम: तहसीलदार नजीबाबाद संतोष कुमार एवं खनन निरीक्षक सुनील कुमार।

  • खुलासा: पट्टा धारक ने आवंटित क्षेत्र से बाहर अवैध रूप से खनन किया।

  • अगला कदम: विस्तृत जांच रिपोर्ट जिलाधिकारी को प्रेषित, कार्रवाई की संभावना प्रबल।

कैसे खुला मामला:

खनन विभाग को सोशल मीडिया और खनन निदेशालय से लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि वीरू वाला क्षेत्र में आवंटित सीमाओं से बाहर मिट्टी और बालू की खुदाई की जा रही है। जिलाधिकारी के निर्देश पर जब टीम मौके पर पहुंची, तो जीपीएस और सीमांकन बिंदुओं के आधार पर सत्यापन किया गया, जिससे स्पष्ट हुआ कि पट्टा धारक ने सीमा से बाहर खनन कर सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाया है।

प्रशासन की सख्त कार्रवाई की तैयारी:

अपर जिलाधिकारी श्रीमती वान्या सिंह ने बताया कि जांच रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंप दी जाएगी। रिपोर्ट के आधार पर संबंधित पट्टा धारक पर राजस्व हानि, पर्यावरणीय क्षति और खनन अधिनियम के उल्लंघन के तहत कठोर कार्रवाई तय है।

अपर जिलाधिकारी का बयान:

“जिलाधिकारी महोदय के निर्देश पर की गई जांच में प्रथम दृष्ट्या अवैध खनन की पुष्टि हुई है। इस प्रकरण में शून्य सहनशीलता की नीति अपनाई जाएगी। किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”
वान्या सिंह, अपर जिलाधिकारी, बिजनौर

प्रभाव और जन-प्रतिक्रिया:

स्थानीय ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है। उनका कहना है कि खनन गतिविधियों से ग्राम की सड़कों को नुकसान, जलस्तर में गिरावट और प्रदूषण जैसी समस्याएं बढ़ रही थीं। प्रशासन की सक्रियता से अब लोगों में भरोसा बढ़ा है कि अवैध खनन माफिया पर शिकंजा कसना शुरू हुआ है।

पृष्ठभूमि: बिजनौर में खनन विवादों का इतिहास

बिजनौर जनपद में पिछले कुछ वर्षों से खनन पट्टों को लेकर विवाद, सीमारेखा उल्लंघन और राजस्व चोरी के कई मामले सामने आ चुके हैं। प्रशासन द्वारा हाल ही में डिजिटल ट्रांजिट पास प्रणाली लागू करने की दिशा में कदम उठाए गए हैं, ताकि फर्जी पास और अवैध परिवहन पर अंकुश लगाया जा सके।

विश्लेषणात्मक टिप्पणी:

यह मामला न केवल एक पट्टा धारक की मनमानी का उदाहरण है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि प्रशासनिक सतर्कता और सोशल मीडिया निगरानी तंत्र किस तरह से अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगा सकता है। यदि इस मामले में त्वरित दंडात्मक कार्रवाई होती है, तो यह खनन माफिया के लिए बड़ा संदेश साबित होगा।

बिजनौर प्रशासन की इस कार्रवाई से स्पष्ट है कि अब खनन नियमों के उल्लंघन पर “ज़ीरो टॉलरेंस पॉलिसी” लागू है। आने वाले दिनों में इस जांच के नतीजे जनपद के अन्य खनन पट्टा धारकों के लिए भी सख्त चेतावनी बन सकते हैं।

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