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सुहागिनों ने मांगी पतियों की दीर्घ आयु, आस्था और भक्ति में डूबी अर्धांगनियां

🌕 श्रद्धा, प्रेम और विश्वास से सजा ‘करवा चौथ’

सुहागिनों ने मांगी पतियों की दीर्घ आयु, आस्था और भक्ति में डूबी अर्धांगनियां

💞 प्यार और विश्वास का पर्व

देश भर में शुक्रवार को करवा चौथ का पर्व पूरे श्रद्धा, प्रेम और उत्साह के साथ मनाया गया। सुहागिन महिलाओं ने पति की लंबी आयु, स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना करते हुए दिनभर निर्जला व्रत रखा और रात में चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत का समापन किया।

🌸 शहर से गांव तक छाई आस्था की छटा

करवा चौथ की रौनक केवल शहरों तक सीमित नहीं रही —  ग्रामीण क्षेत्रों में भी सुहागिनों ने पूरे विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और करवा माता से परिवार की मंगलकामना की।

🪔 पूजन विधि और परंपरा

  • महिलाओं ने मिट्टी या पीतल के करवा में जल भरकर चंद्रमा को अर्घ्य दिया।
  • आटे के दीपक, सिंदूर, अक्षत, रोली, कुमकुम, फल-फूल और मिष्ठान से पूजन किया गया।
  • सोलह श्रृंगार कर महिलाएं सजीं — मेहंदी, चूड़ियां, बिंदी, साड़ी और आभूषणों से आस्था झलकती रही।
  • व्रत के बाद सुहागिनों ने परिवार के वरिष्ठजनों का आशीर्वाद प्राप्त किया।

🌕 चांद से संवाद — प्रेम का प्रतीक

रात के आसमान में जैसे ही चंद्रमा की रजत किरणें फैलीं, सुहागिनों ने छलनी से पति का चेहरा निहारा। यह दृश्य बना प्रेम, विश्वास और समर्पण का अद्भुत प्रतीक। चांदनी के साथ गूंजे मंगल गीतों ने वातावरण को भक्ति और प्रेम से भर दिया।

🌼 करवा चौथ: संस्कृति और समर्पण का संगम

यह पर्व केवल व्रत या अनुष्ठान नहीं, बल्कि भारतीय नारी के विश्वास, प्रेम और त्याग की परंपरा का प्रतीक है। आज के आधुनिक युग में भी करवा चौथ की लोकप्रियता और सांस्कृतिक पहचान उतनी ही प्रबल बनी हुई है।

💬 महिलाओं की जुबानी

“करवा चौथ हमारे लिए सिर्फ व्रत नहीं, यह हमारे वैवाहिक जीवन का भावनात्मक उत्सव है।”

– एक सुहागिन, मुरादाबाद

“यह दिन हमें अपने रिश्ते के प्रति और अधिक समर्पित होने की प्रेरणा देता है।”

– दूसरी महिला, बिजनौर

🕯️ निष्कर्ष

करवा चौथ का यह पर्व हर साल यह संदेश देता है कि प्रेम और आस्था में अपार शक्ति है — जो जीवन को सकारात्मकता, स्नेह और स्थायित्व से भर देती है।

📍 रिपोर्ट: अवनीश त्यागी न्यूज़ डेस्क📅 करवा चौथ विशेष रिपोर्ट | 10 अक्टूबर 2025

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