शामली में गूंजा ‘श्री अन्न महोत्सव’ — जहाँ सेहत, परंपरा और आत्मनिर्भरता ने थामी एक-दूसरे की डोर
“मिलेट्स” की खुशबू से महका कृष्णा गार्डन, किसानों के चेहरे पर आई नई उम्मीद की मुस्कान
📍 शामली | संवाददाता रिपोर्ट
आलेख । अवनीश त्यागी
जब खेतों की खुशबू मिली मंच की रोशनी से…
शनिवार को कृष्णा गार्डन, शामली में नज़ारा कुछ अलग था —
चारों ओर किसानों का जोश, मंच पर सरस्वती वंदना की गूंज, और प्रदर्शनी में मिलेट्स से बने व्यंजनों की मनमोहक खुशबू!
राज्य सरकार के तत्वावधान में आयोजित “जनपद स्तरीय श्री अन्न (मिलेट्स) पुनरोद्धार एवं उपभोक्ता जागरूकता कार्यक्रम” का शुभारंभ विधान परिषद सदस्य चौधरी वीरेन्द्र सिंह ने माँ सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया।
🔸 “श्री अन्न” सिर्फ अनाज नहीं, ये हमारे खेतों की आत्मा हैं — हमारे अन्नदाता की पहचान हैं।
श्री अन्न — मिट्टी से थाल तक की पौष्टिक यात्रा
कार्यक्रम का मकसद था — श्री अन्न (मिलेट्स) को हर घर, हर थाली तक पहुँचाना।
लोगों को बताना कि ये “मोटे अनाज” ही असल में भारत की असली ताकत हैं।
डॉ. कविता भट्ट ने जब कहा —
“जो घर श्री अन्न खाता है, वहाँ बीमारियाँ नहीं, सेहत बसती है”
तो सभागार तालियों से गूंज उठा।
उन्होंने बताया कि बाजरा, ज्वार, रागी, कोदो, सांवा, चेना जैसे अनाज में
फाइबर, प्रोटीन, आयरन और कैल्शियम की भरमार है —
यानी “हर दाना पोषण का ख़ज़ाना”!
“पानी बचाओ, मिलेट्स अपनाओ” — किसानों के नाम संदेश
डॉ. संदीप चौधरी ने कहा —
“श्री अन्न की खेती पानी कम, पर फायदा ज्यादा देती है।
यह फसलें मिट्टी को भी बचाती हैं और किसान की जेब भी भरती हैं।”
उन्होंने बताया कि सहफसली तकनीक और परंपरागत खेती से किसान
अपनी आमदनी दोगुनी करने की दिशा में कदम बढ़ा सकते हैं।
उप कृषि निदेशक प्रमोद कुमार बोले — “मिलेट्स अब ग्लोबल ब्रांड हैं”
“श्री अन्न कोई नई खोज नहीं, बल्कि हमारी पुरातन बुद्धिमत्ता का पुनर्जागरण है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने वर्ष 2023 को ‘अंतरराष्ट्रीय मिलेट्स वर्ष’ घोषित कर
दुनिया को भारत की परंपरा का स्वाद चखाया है।”
उन्होंने बताया कि मिलेट्स सिर्फ भोजन नहीं, बल्कि “आत्मनिर्भर भारत का आधार” बन रहे हैं।
मुख्य अतिथि चौ. वीरेन्द्र सिंह ने कहा — “आओ, थाल में लौटाएँ अपनी परंपरा”
“हमारे जिले के किसान श्री अन्न की ओर लौट रहे हैं और खूब लाभ कमा रहे हैं।
हमें चाहिए कि अपने बच्चों के टिफिन में भी श्री अन्न की खुशबू लौटाएँ।
खिचड़ी, इडली, डोसा, बिस्किट या रोटी — हर रूप में इसे अपनाएँ।”
उन्होंने आह्वान किया कि यह मुहिम सिर्फ सरकार की नहीं,
बल्कि “हर गाँव, हर घर और हर थाली की आवाज़” बने।
कृषि मंच बना ज्ञान का उत्सव
- किसानों को सरसों के निशुल्क मिनीकिट वितरित किए गए।
- मंच संचालन अजय तोमर (सहायक विकास अधिकारी कृषि रक्षा) ने ऊर्जावान अंदाज़ में किया।
- उपस्थित किसान, शिक्षक, विद्यार्थी, एफपीओ सदस्य और महिला समूहों ने कार्यक्रम को “नई सोच का उत्सव” बताया।
कार्यक्रम की खास झलकियाँ
दीप प्रज्वलन के साथ संस्कृत मंत्रोच्चार की गूंज
बाजरे की खिचड़ी और रागी के लड्डू की प्रदर्शनी
महिला स्वयं सहायता समूहों की रचनात्मक भागीदारी
मिनीकिट वितरण पर किसानों में उत्साह की लहर
विश्लेषणात्मक दृष्टि : श्री अन्न आंदोलन क्यों जरूरी है?
👉 भारत आज जिस “मिलेट क्रांति” की ओर बढ़ रहा है,
वह केवल खेती नहीं — एक स्वास्थ्य-संस्कृति आंदोलन है।
👉 श्री अन्न गरीब किसान की रक्षा करता है, उपभोक्ता को पोषण देता है और पर्यावरण को संतुलन।
👉 यह वह सेतु है जहाँ “गाँव का ज्ञान, शहर की सेहत” से मिलता है।
मुख्य बिंदु झटपट जानिए
✅ श्री अन्न = “सेहत + परंपरा + आत्मनिर्भरता”
✅ किसानों के लिए बढ़ी आय और कम लागत
✅ जल संरक्षण में सहायक फसलें
✅ प्रधानमंत्री मोदी के विज़न से मिला वैश्विक मंच
✅ शामली बना पौष्टिक भारत अभियान का अग्रदूत
निष्कर्ष : एक दाना, हजार कहानियाँ
यह कार्यक्रम सिर्फ एक आयोजन नहीं था — यह शामली की मिट्टी से उठी नई चेतना थी।
जब किसानों की आँखों में आत्मविश्वास, मंच पर ज्ञान की गूंज और प्रदर्शनी में परंपरा की सुगंध एक साथ मिली —
तब लगा, श्री अन्न सचमुच भारत की नई पहचान बन चुका है।











