मुख्यमंत्री योगी बोले — “जल संरक्षण हमारी राष्ट्रीय आवश्यकता, चेकडैम और तालाब बनें जनआंदोलन”
प्रदेश में अब तक 6,448 चेकडैमों से 1.28 लाख हेक्टेयर सिंचन क्षमता सृजित
‘एक पेड़ मां के नाम’ की तर्ज पर अब ‘एक चेकडैम गांव के नाम’ अभियान की तैयारी
लखनऊ | 04 अक्टूबर 2025 | मुख्यमंत्री सूचना परिसर से विशेष रिपोर्ट
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को अपने सरकारी आवास पर नमामि गंगे एवं ग्रामीण जलापूर्ति विभाग की उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में कहा कि “जल संकट अब केवल चिंता का नहीं, सामूहिक दायित्व का विषय बन चुका है।”
उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया — “चेकडैम, तालाब और ब्लास्टकूप सिर्फ जल रोकने के साधन नहीं, बल्कि जीवन और कृषि की सुरक्षा के स्तंभ हैं।”
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि ‘एक पेड़ मां के नाम’ जैसी जनभागीदारी से प्रेरित होकर अब ‘एक तालाब गांव के नाम’ या ‘एक चेकडैम गांव के नाम’ जनांदोलन तैयार किया जाए, ताकि प्रदेश में स्थायी जल समाधान स्थापित किया जा सके।
मुख्यमंत्री के प्रमुख बिंदु व निर्देश
🔹 जल प्रबंधन को जनआंदोलन बनाना आवश्यक —
चेकडैम, तालाब और ब्लास्टकूप स्थानीय प्राथमिकता नहीं बल्कि राष्ट्रीय आवश्यकता हैं।
इनकी बदौलत जल संचयन, भूजल रिचार्जिंग और कृषि उत्पादकता तीनों में वृद्धि होती है।
🔹 जल संरक्षण के ठोस परिणाम दिखने लगे हैं —
प्रदेश में वर्ष 2017 तक 82 अतिदोहित और 47 क्रिटिकल क्षेत्र थे,
वर्ष 2024 में यह घटकर 50 अतिदोहित और 45 क्रिटिकल क्षेत्र रह गए हैं।
🔹 कुम्हारों को विशेष छूट —
प्रत्येक वर्ष 01 अप्रैल से 15 जून तक तालाबों से निःशुल्क मिट्टी निकालने की अनुमति,
जिससे तालाब वर्षा जल संचयन के लिए तैयार हो सकें।
🔹 रेन वाटर हार्वेस्टिंग अनिवार्य —
प्रदेश में 100 वर्ग मीटर से बड़े सभी भवनों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम अनिवार्य किया गया है।
यह शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में जल संरक्षण का निर्णायक कदम होगा।
सरकारी प्रयासों की जल चित्रण रिपोर्ट
| घटक | कार्य निष्पादन | प्रभाव |
|---|---|---|
| चेकडैम | 6,448 का निर्माण | 1,28,960 हेक्टेयर अतिरिक्त सिंचन क्षमता |
| डी-सिल्टिंग व मरम्मत | 1,002 चेकडैम | जलधारण क्षमता में वृद्धि |
| तालाबों का पुनर्विकास | 1,343 तालाब | स्थानीय जलस्तर में सुधार |
| ब्लास्टकूप निर्माण | 6,192 | 18,576 हेक्टेयर सिंचन क्षमता सृजित |
| रेन वाटर हार्वेस्टिंग | सभी बड़े भवनों में अनिवार्य | भूजल रिचार्ज में सहयोग |
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा
मुख्यमंत्री ने कहा कि “बरसात के बाद तालाबों का उपयोग मत्स्य पालन और सिंघाड़ा उत्पादन में किया जाए।”
इससे ग्राम स्तर पर हजारों रोजगार अवसर सृजित होंगे और जल संरक्षण के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि हर जनपद में बने चेकडैम, तालाब और ब्लास्टकूप का फोटो डॉक्यूमेंटेशन कराया जाए, ताकि इन परियोजनाओं की पारदर्शिता और प्रभावशीलता सुनिश्चित की जा सके।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रेरक शब्द
“जैसे ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान ने वृक्षारोपण को जनांदोलन बनाया,
वैसे ही चेकडैम और तालाब निर्माण को भी समाज की भागीदारी से बड़े स्तर पर आगे बढ़ाया जाए।
यह न केवल जल संकट से निपटने में सहायक होगा, बल्कि प्रदेश की कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति देगा।”
#WaterPositiveUP — सोशल मीडिया पर जागरूकता अभियान
सरकार अब हर जनपद में #जल_संरक्षण_मिशन और #WaterPositiveUP जैसे सोशल मीडिया अभियानों को बढ़ावा देगी।
स्थानीय जनप्रतिनिधियों, स्कूलों, कॉलेजों और एनजीओ को भी इसमें जोड़ा जाएगा ताकि हर गांव जल-संपन्न गांव बन सके।
समापन विश्लेषण
जल संकट से निपटने में उत्तर प्रदेश अब “Reactive” नहीं बल्कि “Proactive State” बन चुका है।
चेकडैम, तालाब और रेन वाटर हार्वेस्टिंग जैसी पहलें यह दर्शाती हैं कि
मुख्यमंत्री योगी सरकार जल संरक्षण को केवल सरकारी योजना नहीं, बल्कि जन भागीदारी आधारित परिवर्तन आंदोलन के रूप में आगे बढ़ा रही है।
📌 मुख्य निष्कर्ष
- 6,448 चेकडैम, 1.28 लाख हेक्टेयर सिंचन क्षमता
- 16,610 तालाबों में 1,343 पुनर्विकास
- 6,192 ब्लास्टकूप से 18,576 हेक्टेयर सिंचन
- 2024 में केवल 50 अतिदोहित क्षेत्र शेष
- जल संरक्षण से ग्रामीण रोजगार और मत्स्य पालन को प्रोत्साहन










