जैविक खेती में नवाचार की मिसाल — ग्राम उमरी बना “ड्रैगन फ्रूट हब”
DM जसजीत कौर ने किया जैविक ड्रैगन फ्रूट फार्म का निरीक्षण, कहा “प्रगतिशील किसान ही हैं कृषि का भविष्य”
📍स्थान: ग्राम उमरी, विकासखंड धामपुर (जनपद बिजनौर)
दिनांक: 04 अक्टूबर 2025
रिपोर्ट। अवनीश त्यागी
मुख्य बिंदु एक नज़र में
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जिलाधिकारी जसजीत कौर (IAS) ने किया ऋतुराज सिंह के जैविक ड्रैगन फ्रूट फार्म का दौरा
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साथ में उपस्थित – उपजिलाधिकारी धामपुर स्मृति मिश्रा (IAS), उप कृषि निदेशक घनश्याम वर्मा, जिला कृषि अधिकारी जसवीर सिंह तेवतिया, जिला उद्यान अधिकारी
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ड्रैगन फ्रूट + उर्द + गन्ना की सहफसली पद्धति का अनोखा प्रयोग
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जिलाधिकारी ने कहा – “जैविक खेती ही टिकाऊ भविष्य की कुंजी है।”
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अन्य किसानों को प्रेरणा स्रोत बनने पर ऋतुराज सिंह की सराहना
जैविक खेती की नई दिशा — ड्रैगन फ्रूट से बढ़ा नवाचार का मानक
बिजनौर जनपद का ग्राम उमरी अब पारंपरिक खेती से आगे निकलकर जैविक नवाचार का केंद्र बन चुका है। प्रतिष्ठित किसान श्री ऋतुराज सिंह ने आधुनिक तकनीकों और अपनी लगन से ड्रैगन फ्रूट की ऑर्गेनिक खेती को सफल बनाते हुए एक नया मॉडल प्रस्तुत किया है।
उनके फार्म पर ड्रैगन फ्रूट को गन्ना व दलहनी फसलों के साथ इंटरक्रॉपिंग (सहफसली पद्धति) में लगाया गया है — जो भूमि की उर्वरता, जल-संरक्षण, और आर्थिक उत्पादकता तीनों में वृद्धि कर रही है।
ऋतुराज सिंह — मेहनत और नवाचार का संगम
श्री सिंह ने वर्षों के प्रयोगों से यह सिद्ध किया है कि जैविक खेती केवल पर्यावरण हितैषी नहीं, बल्कि लाभकारी और दीर्घकालिक रूप से स्थायी भी है।
उनके फार्म पर ड्रिप इरिगेशन, वर्मी कम्पोस्ट, गोमूत्र आधारित कीटनाशक और प्राकृतिक पोषक तत्वों का उपयोग किया जा रहा है।
🔹 “हमारी कोशिश है कि किसान रासायनिक खेती की जगह प्रकृति संग तालमेल बिठाएं, जिससे मिट्टी और भोजन दोनों स्वस्थ रहें।” — ऋतुराज सिंह
अधिकारियों की सराहना और प्रेरणादायक संदेश
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी श्रीमती जसजीत कौर (IAS) ने फार्म का गहराई से अवलोकन किया और कहा —
“ऐसे प्रगतिशील किसान जनपद का गौरव हैं। जैविक खेती से न केवल उत्पाद की गुणवत्ता बढ़ती है, बल्कि यह किसानों की आय में भी स्थायित्व लाती है।”
उपजिलाधिकारी स्मृति मिश्रा (IAS) ने भी किसानों से आग्रह किया कि वे इस मॉडल को अपनाकर अपनी भूमि की उर्वरता को बनाए रखें।
कृषि विशेषज्ञों की राय
जिला कृषि अधिकारी जसवीर सिंह तेवतिया ने बताया कि ड्रैगन फ्रूट की यह जैविक सहफसली प्रणाली न केवल किफायती है बल्कि रोजगार सृजन में भी मददगार साबित होगी।
उद्यान विभाग के अधिकारियों ने इसे “सस्टेनेबल फार्मिंग का उत्कृष्ट उदाहरण” बताया।
जैविक खेती क्यों है समय की ज़रूरत?
- रासायनिक खादों पर निर्भरता घटाने का प्रभावी तरीका
- मिट्टी की प्राकृतिक उर्वरता को बनाए रखता है
- जल और पर्यावरण प्रदूषण को रोकता है
- उपभोक्ताओं को शुद्ध, सुरक्षित और पौष्टिक उत्पाद देता है
- किसानों के लिए ब्रांड वैल्यू और नए बाज़ारों तक पहुँच का अवसर
“उमरी मॉडल” — कृषि का भविष्य मार्ग
“ग्राम उमरी” अब सिर्फ एक गाँव नहीं, बल्कि जैविक क्रांति का उदाहरण बन चुका है।
यहाँ विकसित मॉडल को आगे चलकर अन्य ब्लॉकों में लागू करने की योजना भी विभागीय स्तर पर बनाई जा रही है, ताकि बिजनौर ‘ऑर्गेनिक हब’ के रूप में पहचाना जा सके।
ग्राम उमरी की यह पहल यह साबित करती है कि किसान केवल अन्नदाता नहीं, नवाचारकर्ता भी हैं।
जिलाधिकारी जसजीत कौर जैसी संवेदनशील प्रशासनिक अधिकारी और ऋतुराज सिंह जैसे प्रगतिशील किसान जब एक साथ मिलकर काम करते हैं, तो कृषि का चेहरा बदलना तय है।












