गंगा से गुलदार तक: पर्यावरण पर जिलाधिकारी की सख्ती
बिजनौर में गंगा समिति, वृक्षारोपण समिति और पर्यावरण समिति की अहम बैठक
मुख्य बिंदु
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आगामी बैठकों में गुलदार प्रकरण पर नियमित समीक्षा होगी
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वन मित्रों का प्रशिक्षण ब्लॉकवार रोस्टर के आधार पर होगा
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मालन नदी जीर्णोद्धार का कार्य फोटोग्राफ सहित पोर्टल पर अपलोड करने के निर्देश
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निजी अस्पतालों पर बायोमेडिकल वेस्ट बारकोड अनिवार्य
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शहर का कूड़ा सड़कों पर नहीं, सिर्फ डंपिंग ग्राउंड में निस्तारण
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वृक्षारोपण की जियो-टैगिंग कर रिपोर्ट वन विभाग को सौंपने के आदेश
बैठक का विवरण
शनिवार शाम कलेक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी जसजीत कौर की अध्यक्षता में गंगा समिति, जिला वृक्षारोपण समिति और जिला पर्यावरण समिति की संयुक्त बैठक आयोजित हुई। बैठक में डीएफओ, पंचायत राज अधिकारी, मनरेगा अधिकारी, अपर मुख्य चिकित्साधिकारी सहित कई विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
जिलाधिकारी ने कहा कि गुलदार से संबंधित घटनाओं की समीक्षा बेहद जरूरी है। इसलिए अब हर बैठक में इसे एजेंडे का अनिवार्य हिस्सा बनाया जाएगा। वन विभाग को “वन मित्रों” की ब्लॉकवार प्रशिक्षण योजना का रोस्टर जारी करने और समय पर प्रशिक्षण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
गंगा और नदियों पर फोकस
गंगा समिति की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने जल शक्ति विभाग को आदेश दिया कि मालन नदी के जीर्णोद्धार कार्य की अद्यतन जानकारी और फोटोग्राफी अनिवार्य रूप से पोर्टल पर अपलोड की जाए। यह पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने का प्रयास है।
पर्यावरण समिति की सख्ती
जिलाधिकारी ने पर्यावरण समिति की बैठक में निजी अस्पतालों को लेकर सख्त रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि हर अस्पताल पर बायोमेडिकल वेस्ट का बारकोड लगाना अनिवार्य होगा। जो अस्पताल सहयोग नहीं करेंगे, उन्हें तुरंत नोटिस जारी किया जाएगा।
साथ ही, नगर निकायों को निर्देश दिया गया कि शहर का कूड़ा सड़कों पर बिल्कुल न फेंका जाए। कचरे का निस्तारण सिर्फ और सिर्फ डंपिंग ग्राउंड में ही कराया जाए।
वृक्षारोपण और निगरानी
बैठक में वृक्षारोपण अभियान की भी समीक्षा हुई। जिलाधिकारी ने कहा कि सभी विभाग अपने-अपने लक्ष्यों के अनुसार पौधारोपण की जियो-टैगिंग कर उसकी रिपोर्ट वन विभाग को उपलब्ध कराएं। इससे वृक्षारोपण की वास्तविक स्थिति की निगरानी आसान होगी।
विश्लेषण:
जिलाधिकारी जसजीत कौर के निर्देश साफ़ संकेत देते हैं कि अब पर्यावरणीय चुनौतियों को हल्के में नहीं लिया जाएगा।
- गुलदार प्रकरण की नियमित समीक्षा से वन्यजीव और मानव सुरक्षा दोनों पर फोकस बढ़ेगा।
- गंगा और मालन नदी पर निगरानी स्वच्छता और जल संरक्षण की दिशा में अहम कदम है।
- बायोमेडिकल वेस्ट और शहरी कचरा प्रबंधन पर सख्ती, स्वास्थ्य और पर्यावरणीय सुरक्षा दोनों के लिए जरूरी है।
- जियो-टैगिंग आधारित वृक्षारोपण जवाबदेही को और मजबूत करेगा।
कुल मिलाकर, यह बैठक जिले में पर्यावरणीय प्रशासन को पारदर्शी और परिणाममुखी बनाने की दिशा में एक ठोस कदम है।











