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बढ़ापुर पंचायत में कबाड़ नीलामी पर बवाल: रात में उठाने की कोशिश ने खोला घोटाले का पिटारा

बढ़ापुर पंचायत में कबाड़ नीलामी पर बवाल: रात में उठाने की कोशिश ने खोला घोटाले का पिटारा
गुपचुप तरीके से कबाड़ बाहर निकालने के आरोप पर देर रात मचा हंगामा, समिति और कर्मचारियों में नोकझोंक

बिजनौर। बढ़ापुर नगर पंचायत में कबाड़ की नीलामी अब सवालों के घेरे में है। शुक्रवार देर रात कबाड़ उठाने की कोशिश ने पूरे नगर को चर्चा में ला दिया। निगरानी समिति के सदस्य मौके पर पहुंचे तो हालात बिगड़ गए। नीलामी की पारदर्शिता पर ठेकेदार पहले ही सवाल उठा चुके थे, लेकिन अब कबाड़ गायब होने और रात के अंधेरे में रिक्शे से सामान बाहर ले जाने की कोशिश ने विवाद को और गहरा दिया है।

मामला क्या है?

चार दिन पहले नगर पंचायत कार्यालय परिसर में जमा कबाड़ की नीलामी हुई थी। एक ठेकेदार ने लोहे को 60 रुपये किलो की दर से खरीदा। लेकिन नीलामी के समय ही ठेकेदारों ने विरोध किया कि जब नया लोहा इससे सस्ता है, तो खरीदार घाटे में कैसे खरीदेगा? आरोप लगे कि खरीदार ने पंचायत कर्मचारियों से पहले ही सांठगांठ कर रखी है और केवल कुछ कुंतल कबाड़ ही खरीदा जाएगा, बाकी को चोरी-छुपे बाहर बेच दिया जाएगा।

रात का हंगामा

  • शुक्रवार देर रात समिति के सदस्य एवं सभासद दानिश अली को सूचना मिली कि कबाड़ को गुपचुप तरीके से बाहर निकाला जा रहा है।
  • दानिश अली मौके पर पहुंचे तो मुख्य द्वार बंद मिला
  • चौकीदार/कर्मचारी विशाल कुमार ने करीब आधा घंटा गेट नहीं खोला
  • अंदर जाने पर एक ई-रिक्शा खड़ा मिला, जिसमें कबाड़ भरा होने का आरोप लगाया गया।

गायब मिला कबाड़

निरीक्षण में सामने आया कि नीलामी के समय मौजूद 9 मोटर और 9 पंखों में से

  • 0 मोटर मिलीं
  • सिर्फ 7 पंखे ही मौके पर थे

इस खुलासे से हंगामा और बढ़ गया।

कर्मचारी बनाम समिति

हंगामे के दौरान दानिश अली और कर्मचारी नीरज कुमार के बीच जमकर नोकझोंक हुई। माहौल इतना गरमा गया कि कंप्यूटर ऑपरेटर योगेश कुमार को बीच-बचाव करना पड़ा।

चेयरमैन-ईओ का हस्तक्षेप

बवाल को शांत कराने के लिए चेयरमैन डॉ. दिलशाद अंसारी और ईओ रवि शंकर शुक्ला ने मौखिक आदेश दिए कि रात के अंधेरे में कबाड़ का कोई सामान नहीं उठाया जाएगा। इसके बाद मामला ठंडा पड़ा।

हाइलाइट्स:

  • कबाड़ नीलामी 60 रुपये किलो की दर से हुई थी।
  • ठेकेदारों ने खरीदार पर कर्मचारियों से मिलीभगत का आरोप लगाया।
  • रात में कबाड़ बाहर ले जाने की कोशिश पर मचा हंगामा।
  • मौके से 9 मोटरों में से एक भी नहीं मिली।
  • नगर में पारदर्शिता को लेकर उठ रहे सवाल।

निष्कर्ष:

बढ़ापुर नगर पंचायत का यह कबाड़ घोटाला अब नगरवासियों की जुबान पर है। सवाल यह है कि क्या वाकई नीलामी पूरी पारदर्शिता से हुई थी या फिर पर्दे के पीछे कोई और खेल चल रहा है? नगरवासी अब प्रशासन से जवाब और ठोस कार्रवाई की उम्मीद कर रहे हैं।

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