बिजनौर महिला अस्पताल में बवाल: आशा कार्यकत्री से मारपीट, अल्ट्रासाउंड स्टाफ पर गंभीर आरोप
धरने पर बैठीं आशाएं, बोलीं – “बिना पैसे काम नहीं होता अस्पताल में”
बिजनौर जिला महिला अस्पताल शुक्रवार को हंगामे का अखाड़ा बन गया। आशा कार्यकत्रियों ने आरोप लगाया कि अल्ट्रासाउंड कक्ष के स्टाफ ने न सिर्फ उनके साथ मारपीट की, बल्कि गर्भवती महिला को धक्का तक दे दिया। घटना के बाद आक्रोशित आशाओं ने अस्पताल के बाहर धरना शुरू कर दिया।
📌 घटना कैसे हुई?
- मण्डावली सैदू ग्राम पंचायत की आशा कार्यकत्री सरिता सुबह गर्भवती महिलाओं काजल (8 माह) और बुशरा (साढ़े 8 माह) को अल्ट्रासाउंड कराने अस्पताल लाई थीं।
- सरिता के अनुसार, जैसे ही वह महिलाओं को अल्ट्रासाउंड कक्ष में ले गईं, वहां मौजूद स्टाफ ने उनसे अभद्रता की और मारपीट कर दी।
- आरोप है कि इसी दौरान एक गर्भवती महिला को धक्का दे दिया गया।
- दूसरी आशा ज्योति ने जब वीडियो बनाने की कोशिश की, तो स्टाफ ने उसका मोबाइल फोन तोड़ दिया।
आशाओं के आरोप
- “अस्पताल में बिना पैसे दिए कोई काम नहीं होता।”
- “अल्ट्रासाउंड स्टाफ ने सरिता के साथ मारपीट की, क्योंकि उसने पैसे देने से इनकार किया।”
- “गर्भवती महिलाओं के साथ लगातार उपेक्षा और बदसलूकी होती है।”
धरना और विरोध
- घटना से गुस्साई आशा कार्यकत्रियों ने अस्पताल के बाहर धरना शुरू कर दिया।
- धरने में शमां, चंद्रो देवी, अनिता देवी, रूमा, हिना और मखनो देवी सहित दर्जनों आशा कार्यकत्रियां शामिल हुईं।
- आशाओं का कहना है कि जब तक दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं होगी, धरना जारी रहेगा।
बड़ा सवाल
👉 क्या सचमुच सरकारी अस्पतालों में बिना पैसे दिए इलाज और जांच संभव नहीं?
👉 गर्भवती महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान की जिम्मेदारी कौन लेगा?
👉 स्वास्थ्य विभाग इस मामले पर कितनी गंभीरता दिखाएगा?
यह मामला सिर्फ एक अस्पताल का नहीं, बल्कि पूरे स्वास्थ्य तंत्र पर सवाल खड़ा करता है। जहां एक ओर सरकार मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता बताती है, वहीं जमीनी हकीकत में उपेक्षा, भ्रष्टाचार और उत्पीड़न की तस्वीर सामने आती है।
✅ यह खबर न केवल एक स्थानीय विवाद है, बल्कि सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की साख और व्यवस्था पर भी बड़ा सवाल है।











